रायसेन: मूंग उपार्जन में फर्जीवाड़ा, EOW ने 3 कर्मचारियों पर दर्ज की FIR, किसानों का फर्जी पंजीयन कर ऐसे किया पूरा खेल
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मूंग उपार्जन (खरीदी) में फर्जीवाड़े करने वाले 3 कर्मचारियों पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने FIR दर्ज की है। इन कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि ये कर्मचारी किसानों का फर्जी पंजीयन कर उनके नाम पर बाजार से कम कीमत की मूंग खरीदकर ज्यादा कीमत में उपार्जन केंद्र पर बेच देते थे।
EOW ने जिले की सहकारी समितियों में मूंग उपार्जन के फर्जी पंजीयन के मामले में
प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर रंजीत ठाकुर (निवासी तहसील बरेली, जिला रायसेन), श्रीराम ठाकुर (कंप्यूटर ऑपरेटर, समिति देहरीकला) गौरव ठाकुर (कंप्यूटर ऑपरेटर, समिति भारकच्छ कला) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) एवं 61(2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
ऐसे हुआ पूरा खेल
दरअसल, यह पूरा फर्जीवाड़ा जिला सहकारी बैंक की बाड़ी शाखा के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (देहरीकला और भारकच्छ कला) में 1 जुलाई 2024 से 26 जून 2025 के बीच (वर्ष 2024-25 और 2025-26 के मूंग उपार्जन के दौरान) हुआ। उपार्जन केंद्र पर बैठे कंप्यूटर ऑपरेटरों को यह पता रहता था कि कौन से किसान अपनी फसल का पंजीयन नहीं करा रहे हैं।
आरोपियों ने इन्हीं किसानों की जमीनों को अपने या अपने परिचितों के नाम पर फर्जी तरीके से पंजीकृत कर लिया। चुंकी समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए किसान को समिति में अपनी जमीन का पंजीयन कराना अनिवार्य होता है, इसी बात का फायदा इन्होंने उठाया। हैरानी की बात तो ये है कि पंजीयन पर्ची के कॉलम-5 में, जहाँ जमीन मालिक या कौलीदार का नाम आना चाहिए, उन्होंने खुद को सिक्मीदार बता दिया लेकिन ऐसा कोई कौलीनामा किसानों ने कभी दिया ही नहीं था।
कम दाम में खरीदी, ऊंचे दाम पर बेची
EOW की जांच में यह भी पाया गया कि इन फर्जी पंजीयनों पर तौली गई मूंग किसानों के खेत की उपज नहीं थी। आरोपियों ने बरेली मंडी और स्थानीय व्यापारियों से घटिया किस्म की मूंग महज 1,500 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल (औसतन 3,000 रुपये) में खरीदी। इसी मूंग को उन्होंने सरकारी केंद्रों पर वर्ष 2024-25 के समर्थन मूल्य 8,558 रुपये और वर्ष 2025-26 के समर्थन मूल्य 8,682 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकार को बेच दी।
इतना ही नहीं जिन किसानों के नाम पर मूंग बेची गई और ये पूरा खेल हुआ, उन्हें इस बात की जरा सी भनक तक नहीं थी। किसानों ने अपने बयानों में साफ किया है कि उन्होंने न तो कोई सहमति दी थी और न ही उन्हें इस फर्जीवाड़े का एक भी पैसा मिला। यहां तक कि इन फर्जी पंजीयनों में जो बैंक खाते जोड़े गए थे, वे भी किसानों के नहीं थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इन पूरे हेरफेर में कुल मिलाकर लगभग 13,34,905 रुपये का अनुचित लाभ हुआ और सरकार को इतनी ही हानि पहुंचाई गई है।
जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर थाना आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल में 8 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 95/2026 के तहत यह मामला दर्ज किया है। आरोपी रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर, गौरव ठाकुर एवं अन्य के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) एवं 61(2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया है। फिलहाल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
MP High Court: प्रमोशन में आरक्षण की 50% सीमा का करना होगा पालन, मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश
मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को प्रमोशन देने पर रोक नहीं है, लेकिन इस प्रक्रिया में आरक्षण की निर्धारित 50 प्रतिशत सीमा का सख्ती से पालन करना होगा। हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों में अंतिम फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से बाहर न जाए।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पक्ष रखा।
प्रमोशन पर रोक नहीं, लेकिन आरक्षण की सीमा का पालन जरूरी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कर्मचारियों को लगातार प्रमोशन दिए जा रहे हैं। इस पर याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि एक बार प्रमोशन हो जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बाद में पदावनत यानी रिवर्ट करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरबी राय मामले का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अब तक प्रभावित कर्मचारियों को रिवर्ट नहीं किया गया है।
कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार है, लेकिन आरक्षण की निर्धारित सीमा का पालन भी जरूरी है। इसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से पार नहीं किया जा सकता।
इंद्रा साहनी फैसले का दिया हवाला
डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ मामले में निर्धारित आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लेख किया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि लंबित मामलों में अंतिम निर्णय आने तक प्रमोशन प्रक्रिया में 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।
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