अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक
अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। अमीर लोग अपने घर और जमीन को तुरंत भव्य दिखाने के लिए ओक, पाम और बरगद जैसे बड़े पेड़ों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। कैलिफोर्निया की नापा वैली में हाल ही में 50 फीट ऊंचे और करीब 100 टन वजनी 100 साल पुराने ओक के पेड़ को क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों से जमीन से निकाला गया। इसकी जड़ों को सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए गए और फिर इसे ट्रकों से दूसरी जगह ले जाया गया। बरगद के 2 पेड़ों के लिए 4.5 करोड़ रुपए पाम बीच में एक अरबपति ने अपने लॉन के लिए बरगद के दो पेड़ 4.5 करोड़ रुपए में खरीदे। वहीं, एक अफ्रीकी इमली का पेड़ भी करीब 4.5 करोड़ रुपए में बिका। अमीर लोग पौधों के बड़ा होने का सालों इंतजार नहीं करना चाहते। इसलिए वे पहले से बड़े पेड़ खरीदकर अपनी संपत्ति को तुरंत भव्य और पुराना लुक दे रहे हैं। पेड़ों को लेकर पड़ोसियों में भी होड़ यह क्रेज अब सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। रोड आइलैंड में ओरेकल के लैरी एलिसन और ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन की संपत्तियों के बीच लैंडस्केपिंग को लेकर होड़ की चर्चा है। श्वार्जमैन ने अपनी हवेली को पड़ोसियों की नजरों से छिपाने के लिए चारों ओर 18 फीट ऊंचे 100 से ज्यादा सजावटी पेड़ लगवाए। इन पर 9 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए। पेड़ पहुंचाने के लिए हाईवे बंद कराने पड़ते हैं 50 फीट तक ऊंचे और 100 टन वजनी पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं है। कई बार इन्हें ले जाने के लिए हाईवे बंद कराने और बिजली के तार हटाने पड़ते हैं। बड़े पेड़ों की बढ़ती मांग से इस कारोबार को भी बढ़ावा मिला है। कुछ नर्सरी मालिक तो अरबपति ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक बनवा रहे हैं, ताकि वे हेलिकॉप्टर से आकर अपनी पसंद के पेड़ चुन सकें।
अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा
अमेरिका के इमिग्रेशन इतिहास में बड़ा उलटफेर हुआ है। अमेरिका का स्थायी वीजा कहे जाने वाले ईबी-5 कैटेगरी में आवेदन करने वालों में भारतीय नंबर एक हो गए हैं। भारतीयों ने चीन के आवेदकोें को पीछे छोड़ दिया है। पिछले तीन साल में 12,900 भारतीयों और 9,875 चीनी नागरिकों ने EB-5 वीजा के लिए आवेदन किया। इस वीजा के जरिए अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का मौका मिलता है। इसके लिए अमेरिका में करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। साथ ही, कम से कम 10 अमेरिकियों को रोजगार देना जरूरी है। ग्रामीण इलाकों में निवेश करने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। ग्रीन कार्ड के बराबर जैसा है ईबी-5 वीजा ईबी-5 को इन्वेस्टर वीजा भी कहते हैं, ये अमेरिकी ग्रीन कार्ड के बराबर होता है। अमेरिका में एच-1 बी वीजा को लेकर ट्रम्प प्रशासन की ओर से की जा रही सख्तियों के चलते भारतीय अब ईबी-5 वीजा का दांव चल रहे हैं। इससे अमेरिकी नागरिकता मिलनी तय हो जाती है। ईबी-5 वीजा आवेदन के साथ रकम जमा कराने के बाद ही आवेदक को अमेरिका में रहने की अनुमति भी मिल जाती है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए 165 आवेदन, 1 को ही जारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सितंबर, 2025 में अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए ट्रम्प गोल्ड कार्ड शुरू किया था। इसमें अमेरिका में लगभग साढ़े 9 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होती है। ट्रम्प का गोल्ड कार्ड फ्लॉप ही साबित हुआ है। वित्त मंत्री लटनिक ने अप्रैल, 2026 में बताया था कि 338 लोगों ने इस बारे में पड़ताल की। कोर्ट फाइलिंग के अनुसार, दुनिया भर से 165 लोगों ने आवेदन किया और एक ही व्यक्ति काे अब तक ट्रम्प गोल्ड कार्ड जारी किया गया है। ट्रम्प के गोल्ड कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी कानूनी मान्यता पर है। ट्रम्प ने इसे राष्ट्रपति के तौर पर मिली कार्यकारी शक्ति का इस्तेमाल करके शुरू किया है। ऐसे में डर है कि जब ट्रम्प सत्ता से बाहर हो जाएंगे तो नई सरकार इस गोल्ड कार्ड को खत्म कर सकती है। प्रोफेसर-स्कॉलर कोटा समय से पहले खत्म अमेरिका में ग्रीन कार्ड के बराबर ईबी-1 वीजा का कोटा इस साल समय से पहले ही खत्म हो गया है। 30 सितंबर को अंतिम तारीख थी, लेकिन 7 हजार का कोटा 1 सितंबर को ही खत्म हो गया। इस कैटेगरी में प्रोफेसर, साइंटिस्ट और रिसर्च स्कॉलर आवेदन कर सकते हैं।
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