अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा
अमेरिका के इमिग्रेशन इतिहास में बड़ा उलटफेर हुआ है। अमेरिका का स्थायी वीजा कहे जाने वाले ईबी-5 कैटेगरी में आवेदन करने वालों में भारतीय नंबर एक हो गए हैं। भारतीयों ने चीन के आवेदकोें को पीछे छोड़ दिया है। पिछले तीन साल में 12,900 भारतीयों और 9,875 चीनी नागरिकों ने EB-5 वीजा के लिए आवेदन किया। इस वीजा के जरिए अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का मौका मिलता है। इसके लिए अमेरिका में करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। साथ ही, कम से कम 10 अमेरिकियों को रोजगार देना जरूरी है। ग्रामीण इलाकों में निवेश करने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। ग्रीन कार्ड के बराबर जैसा है ईबी-5 वीजा ईबी-5 को इन्वेस्टर वीजा भी कहते हैं, ये अमेरिकी ग्रीन कार्ड के बराबर होता है। अमेरिका में एच-1 बी वीजा को लेकर ट्रम्प प्रशासन की ओर से की जा रही सख्तियों के चलते भारतीय अब ईबी-5 वीजा का दांव चल रहे हैं। इससे अमेरिकी नागरिकता मिलनी तय हो जाती है। ईबी-5 वीजा आवेदन के साथ रकम जमा कराने के बाद ही आवेदक को अमेरिका में रहने की अनुमति भी मिल जाती है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए 165 आवेदन, 1 को ही जारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सितंबर, 2025 में अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए ट्रम्प गोल्ड कार्ड शुरू किया था। इसमें अमेरिका में लगभग साढ़े 9 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होती है। ट्रम्प का गोल्ड कार्ड फ्लॉप ही साबित हुआ है। वित्त मंत्री लटनिक ने अप्रैल, 2026 में बताया था कि 338 लोगों ने इस बारे में पड़ताल की। कोर्ट फाइलिंग के अनुसार, दुनिया भर से 165 लोगों ने आवेदन किया और एक ही व्यक्ति काे अब तक ट्रम्प गोल्ड कार्ड जारी किया गया है। ट्रम्प के गोल्ड कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी कानूनी मान्यता पर है। ट्रम्प ने इसे राष्ट्रपति के तौर पर मिली कार्यकारी शक्ति का इस्तेमाल करके शुरू किया है। ऐसे में डर है कि जब ट्रम्प सत्ता से बाहर हो जाएंगे तो नई सरकार इस गोल्ड कार्ड को खत्म कर सकती है। प्रोफेसर-स्कॉलर कोटा समय से पहले खत्म अमेरिका में ग्रीन कार्ड के बराबर ईबी-1 वीजा का कोटा इस साल समय से पहले ही खत्म हो गया है। 30 सितंबर को अंतिम तारीख थी, लेकिन 7 हजार का कोटा 1 सितंबर को ही खत्म हो गया। इस कैटेगरी में प्रोफेसर, साइंटिस्ट और रिसर्च स्कॉलर आवेदन कर सकते हैं।
डेटा लीक को लेकर दक्षिण कोरिया गंभीर, जेंडर मंत्रालय कानूनी कार्रवाई पर कर रहा विचार
सोल, 9 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में डेटा लीक को लेकर फिक्र जाहिर की गई है। महिलाओं और परिवार से जुड़े मामलों के मंत्रालय ने डेटा लीक मामले में गूगल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना पर विचार शुरू कर दिया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश में संवेदनशील सरकारी और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि डेटा लीक कैसे हुआ और इसमें गूगल की सेवाओं या उसके डेटा प्रबंधन तंत्र की क्या भूमिका रही। अधिकारियों का मानना है कि यदि जांच में कंपनी की लापरवाही या कानूनी जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
दक्षिण कोरिया में यह मुद्दा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सरकार पिछले कुछ समय से डिजिटल अपराधों, खासकर महिलाओं से जुड़े ऑनलाइन अपराधों और अवैध यौन सामग्री के प्रसार के खिलाफ अभियान तेज कर रही है।
सरकार की चिंता केवल यह नहीं है कि आपत्तिजनक सामग्री इंटरनेट पर मौजूद है, बल्कि यह भी है कि एक बार सामग्री हटाए जाने के बाद वह दूसरे प्लेटफॉर्म या नए वेबसाइट पते के जरिए फिर सामने आ जाती है। इसी वजह से प्रशासन अब ऐसे नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की रणनीति पर काम कर रहा है।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया में डिजिटल यौन अपराधों के 17,629 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या 2024 की तुलना में 4.7 प्रतिशत अधिक है। सरकार का कहना है कि उसने इस दौरान 15 लाख से ज्यादा आपत्तिजनक यौन सामग्री हटाने की कार्रवाई की और 53,000 से अधिक पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराई।
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अपराधी तकनीक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके पीड़ितों की निजी तस्वीरों या जानकारी का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में केवल अपराधियों को पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन तकनीकी प्रणालियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी जिनके जरिए इस तरह की सामग्री या डेटा का प्रसार होता है।
इसी व्यापक संदर्भ में गूगल के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई को देखा जा रहा है। यदि मंत्रालय आगे बढ़कर मामला दर्ज करता है, तो यह दक्षिण कोरिया में बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
दक्षिण कोरिया सरकार पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्मों से अवैध और नुकसानदेह सामग्री पर तेजी से कार्रवाई करने की अपेक्षा कर रही है। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि डेटा लीक का वास्तविक दायरा क्या था, संवेदनशील जानकारी किस तरह बाहर आई, और इस मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
--आईएएनएस
केआर/
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