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Nepal Police ने बाढ़ राहत सामग्री को लेकर सोशल मीडिया दावों का किया खंडन

काठमांडू, नौ सितंबर नेपाल पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे उन ‘झूठे और निराधार’ दावों से सावधान रहने को कहा है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई राहत सामग्री ले ली, लेकिन उसका वितरण नहीं किया। समाचार पोर्टल ‘रातोपति डाट कॉम’ के अनुसार, यह चेतावनी ‘सीपीएन (यूएमएल) के सचिव महेश बस्नेत के उन आरोपों के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राहत सामग्री सेना और पुलिस की बैरकों तथा कार्यालयों में रखी जा रही है और कुछ खाद्य सामग्री सड़ने के लिए छोड़ दी गई। नेपाल पुलिस ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों को निशाना बनाकर ‘‘निराधार, मनगढ़ंत और भ्रामक’’ सूचनाएं प्रसारित किए जाने की जानकारी उसके संज्ञान में आई है।

पुलिस ने कहा कि पिछले महीने हिमालयी देश में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान चौबीसों घंटे खोज, बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों में जुटे हुए हैं। बयान में कहा गया है, ‘‘ हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए ये आरोप कि सेना और पुलिस ने राहत सामग्री अपने कब्जे में ले ली और उसका वितरण नहीं किया, या सामग्री खराब होने के लिए छोड़ दी गई, झूठे और निराधार हैं।’’ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन के कारण 26 अगस्त को अचानक बाढ़ आई। इससे भोटेकोशी नदी उफान पर आ गई और उत्तरी तथा मध्य नेपाल के कई हिस्सों में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।

बुधवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 1,365 हो गई, जबकि 5,326 लोग लापता हैं। बयान में कहा गया कि सुरक्षा बलों के जवान फंसे हुए और प्रभावित लोगों को बचाने, लापता लोगों की तलाश करने, घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, बरामद शवों के रखरखाव और राहत सामग्री वितरित करने में जुटे हुए हैं। बयान में कहा गया कि आपदा के दौरान अपुष्ट आरोपों से, बचाव और राहत कार्यों में तैनात सुरक्षा कर्मियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है, जनता के बीच सुरक्षा एजेंसियों के प्रति अविश्वास पैदा हो सकता है और आपदा प्रबंधन से जुड़े संवेदनशील प्रयासों में बाधा आ सकती है।

समाचार पत्र ‘द हिमालयन टाइम्स’ के अनुसार, नेपाल पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके कब्जे में कोई राहत सामग्री नहीं है। पुलिस ने जनता और सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों या अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार न करें, जिनसे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है या प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे सुरक्षा कर्मियों का मनोबल गिर सकता है। बस्नेत ने आरोप लगाया था कि एक आश्रय स्थल में पीड़ितों ने भोजन की कमी की शिकायत की, जबकि राहत सामग्री सेना और पुलिस के पास रखी हुई थी।

उन्होंने दावा किया था कि सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों को सड़ने के लिए छोड़ दिया गया तथा “वन-डोर सिस्टम” के तहत राहत सामग्री सुरक्षा प्रतिष्ठानों के भीतर रखी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि हेलीकॉप्टरों को बचाव अभियान चलाने से रोका गया। साथ ही उन्होंने आपदा से निपटने के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और स्वयंसेवी संगठन हामी नेपाल की आलोचना की।

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ऐसे कृत्यों को स्वीकार नहीं...हूतियों ने सऊदी पर बम बरसाया, भारत को जबरदस्त गुस्सा आया

भारत ने बुधवार को सऊदी अरब में एनर्जी सुविधाओं पर यमन के हूथी विद्रोहियों के हमलों की निंदा की। भारत ने कहा कि ऐसे हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा कमज़ोर होती है और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नेविगेशन की आज़ादी को खतरा पैदा होता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की ये टिप्पणियां भारतीय पक्ष की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थीं। इससे पहले मंगलवार को हूतियों ने कहा था कि उन्होंने एक बड़े ऑपरेशन के तहत दक्षिणी सऊदी अरब में तेल की दिग्गज कंपनी सऊदी अरामको की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया है। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों के कारण कई तेल प्रतिष्ठानों और यूटिलिटी साइटों पर आग लग गई और 73 लोग घायल हो गए।

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सऊदी अरब में हूती हमलों का ज़िक्र करते हुए जायसवाल ने कहा कि भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हुए हमलों, खासकर आम नागरिकों और आर्थिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की निंदा करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमज़ोर करते हैं और बाब-अल-मंदेब में नेविगेशन की आज़ादी के लिए खतरा पैदा करते हैं, उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। दक्षिणी सऊदी अरब में ऊर्जा से जुड़े अहम इंफ्रास्ट्रक्चर हैं, जिनमें जिज़ान रिफाइनरी भी शामिल है, जो रोज़ाना 4,00,000 बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती है। ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने के बाद, सऊदी अरब के ऊर्जा निर्यात के लिए बाब-अल-मंदेब का महत्व बढ़ गया है।

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भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद बढ़ाने के बावजूद, सऊदी अरब देश के शीर्ष तीन ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में बना हुआ है। यमन में ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों और सऊदी-समर्थित बलों के बीच हाल के दिनों में लड़ाई तेज़ी से बढ़ी है। इन झड़पों को 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्ष-विराम के बाद से सबसे गंभीर माना जा रहा है; उस संघर्ष-विराम ने आठ साल के भीषण संघर्ष के बाद बड़े पैमाने पर हो रही लड़ाई को रोक दिया था। हूथी विद्रोहियों के लिए बाब-अल-मंदेब एक मुख्य केंद्र रहा है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा जलमार्ग है। हूथियों ने जुलाई में सऊदी जहाजों की आवाजाही रोकने (नाकेबंदी) की घोषणा की और बाब-अल-मंदेब के पास सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।

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