Car Sales: अगस्त में टाटा पंच ने मारी बाजी; मारुति की 4 कारें टॉप 5 बेस्ट सेलर्स में शामिल
Car Sales: भारत में हर साल लाखों यात्री वाहनों की बिक्री होती है। इनमें हैचबैक, एसयूवी और एमपीवी जैसे अलग-अलग सेगमेंट की कारें शामिल हैं। अगस्त 2026 में भी कई कारों की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। बिक्री के आंकड़ों के मुताबिक, टॉप-5 सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों की सूची में टाटा और मारुति सुजुकी के मॉडल शामिल रहे। खास बात यह है कि इस सूची में मारुति सुजुकी की चार कारों ने जगह बनाई है, जबकि टाटा पंच पहले नंबर पर रही।
पहले नंबर पर रही टाटा पंच
टाटा मोटर्स की कॉम्पैक्ट एसयूवी टाटा पंच अगस्त में सबसे ज्यादा बिकने वाली कार रही। पंच के पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों वर्जन की कुल 21,320 यूनिट्स की बिक्री हुई।
अगस्त 2025 में इसी अवधि के दौरान पंच की 10,704 यूनिट्स बिकी थीं। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इसकी बिक्री में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दूसरे नंबर पर मारुति वैगनआर
सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों की सूची में मारुति सुजुकी वैगनआर दूसरे स्थान पर रही। अगस्त 2026 में कंपनी ने इसकी 20,180 यूनिट्स की बिक्री की।
अगस्त 2025 में वैगनआर की 14,552 यूनिट्स बिकी थीं। इस साल इसकी बिक्री में पिछले साल की तुलना में अच्छी वृद्धि देखने को मिली है।
तीसरे नंबर पर रही मारुति स्विफ्ट
मारुति सुजुकी की लोकप्रिय हैचबैक स्विफ्ट ने इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। अगस्त 2026 में इसकी 19,832 यूनिट्स की बिक्री हुई।
वहीं, अगस्त 2025 में कंपनी ने स्विफ्ट की 12,385 यूनिट्स बेची थीं। इससे साफ है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल स्विफ्ट की मांग में भी मजबूत बढ़ोतरी हुई है।
चौथे नंबर पर मारुति फ्रॉन्क्स
कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में लोकप्रिय मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स टॉप-5 में चौथे स्थान पर रही। अगस्त 2026 में इसकी 18,730 यूनिट्स की बिक्री हुई।
अगस्त 2025 में फ्रॉन्क्स की 12,422 यूनिट्स बिकी थीं। यानी एक साल में इसकी बिक्री में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
टॉप-5 में मारुति अर्टिगा भी शामिल
मारुति सुजुकी की लोकप्रिय एमपीवी अर्टिगा ने भी टॉप-5 में जगह बनाई है। अगस्त 2026 में कंपनी ने इसकी 18,516 यूनिट्स की बिक्री की।
अगस्त 2025 में अर्टिगा की 18,445 यूनिट्स बिकी थीं। यानी इस बार इसकी बिक्री लगभग पिछले साल के स्तर पर ही रही।
टॉप-5 में मारुति का दबदबा
अगस्त 2026 की सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप-5 कारों की सूची में टाटा पंच को छोड़कर बाकी चार मॉडल मारुति सुजुकी के रहे। इससे भारतीय कार बाजार में मारुति के अलग-अलग सेगमेंट के मॉडलों की मजबूत मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है।
(मंजू कुमारी)
Hartalika Teej: परंपराएं वही, अंदाज नया! बदलते दौर में बदली हरतालिका तीज की रंगत
Hartalika Teej: भारतीय पर्व परंपरा में हरतालिका तीज एक ऐसा पर्व है, जो प्राकृतिक जुड़ाव, दांपत्य प्रेम, सौभाग्य और पारिवारिक रिश्तों की सुंदर डोर से गुंथा होता है। भीगे-भीगे मौसम की हरियाली, झूले, लोकगीत, मेहंदी और श्रंगार से सजे इस त्योहार का स्वरूप आज के दौर में कुछ बदल गया है। लेकिन आधुनिकता के इस स्पर्श से पर्व की सुंदरता और निखर उठी है।
हरतालिका तीज भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है, जो प्रकृति, प्रेम, सौभाग्य और पारिवारिक रिश्तों का सुंदर संगम माना जाता है। बरखा ऋतु की हरियाली, झूले, लोकगीत, मेहंदी और पारंपरिक श्रंगार, सदियों से इस त्योहार की पहचान रहे हैं।
समय के साथ जीवनशैली, परिवारों की संरचना और उत्सव मनाने के तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन हरतालिका तीज का महत्व आज भी बरकरार है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब परंपराओं के साथ आधुनिकता का संतुलन भी देखने को मिलता है।
बरकरार है परंपराओं का मूल भाव
हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाला उत्सव भी है। इस अवसर पर आज भी महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, व्रत रखती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
बदलते समय और जीवनशैली में अनेक बदलाव आने के बावजूद इस पर्व से जुड़ी परंपराओं का मूल भाव आज भी पहले जैसा ही बना हुआ है।
पारंपरिक श्रंगार में जुड़ा मॉडर्न टच
कुछ दशक पहले तक हरतालिका तीज पर महिलाएं पारंपरिक साड़ी, लहंगा और कुछ निश्चित तरह के पुश्तैनी भारी गहनों से श्रंगार करती थीं। अब इसके साथ इंडो-वेस्टर्न ड्रेसेस, लाइट ज्वेलरी सेट और ट्रेंडी मेकअप भी शामिल हो गए हैं।
हालांकि हरी चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी और सिंदूर आज भी तीज के श्रंगार की सबसे महत्वपूर्ण पहचान बने हुए हैं।
सोशल मीडिया से बढ़ी उत्सव की रौनक
आज हरतालिका तीज केवल घर या मोहल्ले तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपनी मेहंदी, पारंपरिक लुक, पूजा की झलक और पारिवारिक तस्वीरें साझा करते हैं।
डिजिटल माध्यमों ने त्योहार की खुशियों को दूर-दराज रहने वाले रिश्तेदारों तक भी पहुंचाने का काम किया है। कहने का मतलब है कि इसके जरिए महिलाएं अपने आस-पास ही नहीं दूर रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों से भी जुड़ पाती हैं।
पर्यावरण के प्रति बढ़ी जागरूकता
पर्व के उल्लास के साथ महिलाएं पर्यावरण संरक्षण कस भी ध्यान रखती हैं। प्लास्टिक की सजावट की जगह प्राकृतिक फूलों, पत्तियों और मिट्टी से बनी सजावटी वस्तुओं का उपयोग बढ़ा है। कई परिवार हरतालिका तीज के अवसर पर पौधारोपण भी करते हैं, जिससे पर्व का संबंध प्रकृति से और मजबूत होता है।
संयुक्त परिवार से बना है जुड़ाव
पहले हरतालिका तीज जैसे पर्व संयुक्त परिवारों में बड़े स्तर पर मनाए जाते थे। आज न्यूक्लियर फैमिली यानी एकल परिवारों का चलन बढ़ा है। लेकिन महिलाएं अपने पारिवारिक जुड़ाव को नहीं भूलती हैं।
ऑनलाइन माध्यम से परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़कर त्योहार का आनंद लेती हैं। वीडियो कॉल पर पूजा में शामिल होना, शुभकामनाएं देना और साथ में वर्चुअल सेलिब्रेशन करना अब आम बात बन गई है।
पारंपरिक व्यंजनों के साथ पौष्टिक विकल्प
एक समय तक हरतालिका तीज पर घेवर, मालपुआ, खीर और पूड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन ही बनाए जाते थे। आज भी इनका महत्व बना हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी जागरूकता की वजह से महिलाएं खुद और परिवार के लिए कम चीनी, बाजरे या मल्टीग्रेन से बने विकल्पों को भी अपनाने लगी हैं। इससे स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बना रहता है।
काम-काजी महिलाओं का सेलिब्रेशन
आज बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी और व्यवसाय से जुड़ी हैं। ऐसे में पूरे दिन की व्यस्तता के बावजूद वे हरतालिका तीज पर सुविधानुसार समय पर पूजा जरूर करती हैं और परिवार के साथ समय भी बिताती हैं। कई संस्थानों में हरतालिका तीज थीम पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे कार्यस्थल पर भी उत्सव का माहौल बनता है।
बरकरार लोकगीत-झूलों की परंपरा
हरतालिका तीज की पहचान लोकगीतों और झूलों से भी जुड़ी रही है। शहरों में भले ही बड़े पेड़ों पर झूले कम दिखाई देते हों, लेकिन सांस्कृतिक संस्थाएं, आवासीय सोसाइटीज और सामुदायिक केंद्र इस परंपरा को जीवित रखने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसमें पुरानी के साथ मिलकर नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है।
उपहारों में भी आया बदलाव
पहले तीज पर सिंधारा में पारंपरिक मिठाइयां, कपड़े और श्रंगार का सामान दिया जाता था। अब इनके साथ पौधे, हस्तनिर्मित उपहार, ऑर्गेनिक ब्यूटी प्रोडक्ट्स और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार गिफ्ट देने का चलन बढ़ा है। इससे परंपरा के साथ आधुनिक सोच भी दिखाई देती है। महिलाएं बड़े चाव से पसंदीदा उपहार खरीदती और अपनों को देती हैं।
पर्व-संस्कृति से जुड़ रही नई पीढ़ी
हरतालिका तीज का वास्तविक महत्व तभी बना रहेगा, जब नई पीढ़ी इसके सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को समझेगी। सुखद है कि पूजा की परंपरा, लोककथाओं, त्योहार के महत्व और प्रकृति से इसके संबंध के बारे में जानने और इससे जुड़ने के लिए नई पीढ़ी में काफी उत्साह दिखता है।
पुरानी पीढ़ी की महिलाएं पूरे मन से नई पीढ़ी को पर्व संस्कृति की विरासत सौंप रही हैं। कहने का सार है कि हरतालिका तीज, बदलते समय के साथ नई पहचान जरूर बना रही है, लेकिन इसकी आत्मा आज भी प्रेम, आस्था, प्रकृति और पारिवार से जुड़ी है।
आधुनिक जीवनशैली ने इसके स्वरूप को नया अंदाज दिया है, पर इसकी परंपराएं आज भी लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम कर रही हैं। यही संतुलन हरतालिका तीज की खूबसूरती है, जो आज भी इसे प्रासंगिक बनाता है।
गौरी देवी (संस्कृति एवं लोक परंपरा विशेषज्ञ)
प्रस्तुति:नैंसी गुप्ता
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