यूपी में अब 70 की उम्र तक डॉक्टर देंगे सेवा, रिटायरमेंट उम्र बढ़ी : ब्रजेश पाठक
लखनऊ, 9 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने ऐलान किया है कि अब चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की सेवा की उम्र सीमा बढ़ाकर 70 साल कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला डॉक्टरों के लंबे अनुभव का लाभ जनता को देने के लिए लिया गया है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश के चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले डॉक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 70 साल कर दी गई है। इसका मतलब है कि डॉक्टर 70 साल की उम्र तक सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
पाठक ने कहा, हमने यह फैसला जनहित में लिया है ताकि मरीजों को सीनियर और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के अनुभव का फायदा मिल सके। मैं उन सभी डॉक्टरों और उत्तर प्रदेश की जनता को बधाई देता हूं जिन्हें इस फैसले से फायदा होगा।
बता दें कि वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रदेश में सरकारी डॉक्टर 65 साल की उम्र तक ही सेवा दे सकते थे लेकिन प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स (सीएचसी) और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (पीएचसी) में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का यह फैसला मरीजों के लिए भी राहत दे सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सीनियर डॉक्टरों के पास दशकों का क्लीनिकल अनुभव होता है, जो गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज में बेहद महत्वपूर्ण है। रिटायरमेंट की उम्र 65 से 70 साल करने से अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं पांच साल और मिल सकेंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और बेहतर होगी।
डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही इसका शासनादेश जारी होने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कोफोर्ज के अंतरिक ऑडिट में सामने आई चिंताओं के बाद चेयरमैन ने दिया इस्तीफ, करीब 9 प्रतिशत गिरा स्टॉक
मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। मिडकैप आईटी कंपनी कोफोर्ज के अंतरिक ऑर्डट में कंपनी के बोर्ड मूल्यांकन प्रोसेस को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरमैन ओपी भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है।
भट्ट के इस्तीफे की खबर के बाद बुधवार को कोफोर्ज के शेयर में बड़ी गिरावट देखी गई। अब तक के कारोबार में शेयर vs 1780.70 रुपए का इंट्रडे लो बनाया है, जो कि उसकी पिछली क्लोजिंग 1,950 रुपए के करीब 8.71 प्रतिशत कम है।
फिलहाल सुबह 10:45 पर शेयर 4.50 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,862 रुपए पर था।
रेगुलेटरी फाइलिंग में कोफोर्ज ने बताया कि उसके इंटरनल ऑडिटर ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही के इंटरनल ऑडिट प्लान के तहत, बोर्ड इवैल्यूएशन प्रोसेस और उससे बनी बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट (बीईआर) की समीक्षा की। यह प्रोसेस भट्ट की देखरेख में किया गया था।
ऑडिट में बोर्ड के मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी के प्रोसेस और उसके डिस्क्लोजर में कमियां पाई गईं, जिसमें चेयरमैन के प्रदर्शन के मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी भी शामिल थी।
फाइलिंग के अनुसार, जब बीईआर रिपोर्ट बोर्ड के सामने पेश की गई थी, तो उसमें मौजूद या उससे जुड़ी कुछ अहम जानकारी बोर्ड को पूरी तरह से नहीं बताई गई थी।
इंटरनल ऑडिटर की रिपोर्ट के बाद, बोर्ड ने भट्ट से इस बारे में सफाई मांगी।
भट्ट ने अपने काम का बचाव करते हुए कहा कि बोर्ड के मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने नेक नीयत से काम किया था। हालांकि, बोर्ड द्वारा उनके स्पष्टीकरण की समीक्षा पूरी करने या इस मामले पर कोई अंतिम फैसला लेने से पहले ही, 8 सितंबर को उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
फिलहाल कोफोर्ज ने मौजूदा नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर विवेक शर्मा को 31 जनवरी, 2027 तक बोर्ड का अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है।
इसके अलावा, कंपनी के अनुसार, भट्ट वॉकहार्ट लिमिटेड के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर भी हैं, जहां वे ऑडिट, स्टेकहोल्डर्स रिलेशनशिप और कैपिटल जुटाने वाली कमेटियों के सदस्य हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
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