(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, नौ सितंबर अमेरिका ने कथित वीजा धोखाधड़ी के मामलों के खिलाफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अभियान के बीच चेन्नई में स्थापित आईटी कंपनी ‘कॉग्निजेंट’ द्वारा विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड के लिए किए जाने वाले स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों (पीईआरएम) पर रोक लगा दी है। यह प्रक्रिया अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की दिशा में उठाया जाने वाला शुरुआती कदम माना जाता है। अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी’एस्पसीटो ने मंगलवार को घोषणा की कि उन्होंने चेन्नई में स्थापित ‘कॉग्निजेंट’ और ‘क्लाउडेरा’ के स्थायी श्रम प्रमाणन संबंधी आवेदनों पर रोक लगा दी है।
डी’एस्पोसिटो ने कहा, ‘‘अमेरिकी कामगारों के लिए खतरे को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’
उन्होंने बताया कि दोनों कंपनियों के खिलाफ जांच व्हाइट हाउस धोखाधड़ी कार्य बल और अन्य अधिकारियों के साथ समन्वय में की गई। ‘पीईआरएम’ एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी देने और उनके ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले अमेरिकी श्रम विभाग से मंजूरी लेती हैं। इस प्रक्रिया के तहत नियोक्ताओं को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए कोई योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कामगार मौजूद नहीं है तथा किसी विदेशी कामगार को नियुक्त करने से अमेरिकी कामगारों के वेतन या काम करने की परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
जुलाई में ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और पीईआरएम रोजगार वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी को लेकर बड़े पैमाने पर जांच शुरू की थी। ‘कॉग्निजेंट’ की स्थापना 1994 में चेन्नई में हुई थी और अब इसका मुख्यालय न्यू जर्सी के टीनेक में है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून तक कॉग्निजेंट के लिए ए-1बी वीजा की 3,510 याचिकाओं को मंजूरी मिली थी, जबकि 2020 में यह संख्या 9,413 थी।
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एक ताकतवर देश जहां भगवान हनुमान का अपमान किया गया वो देश अब बर्बादी की कगार पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस देश के नेताओं को पीटने वाली एआई वीडियोस तक डाल रहे हैं। जिस देश का नागरिक दुनिया का हर व्यक्ति बनना चाहता था। उसी देश को छोड़कर अब लोग भाग रहे हैं। सोचिए एक तरफ हर जगह हनुमान अंश की धूम है। उसी वक्त इस देश के एक पत्रकार ने भारत को चिढ़ाने के लिए हनुमान जी का अपमान कर दिया। इस पत्रकार जैसे लाखों लोग इस देश में बसे हैं। यह होश उड़ा देने वाली कहानी कनाडा से आई है।
कनाडा के हजारों लोग ओंटारियो शहर में लगी 55 फीट ऊंची भगवान हनुमान की मूर्ति से नफरत करते हैं। इन्हीं में से एक कनाडा का यह पत्रकार है। इस नफरती पत्रकार ने 55 फीट ऊंची भगवान हनुमान की मूर्ति के आगे जो बयान दिया उसे सुनकर भारत के लोगों का खून खौल जाएगा। इसने कहा कि मैं कनाडा में ओंटारियो के ब्रमटन में सबसे बड़ी हिंदू मूर्ति के सामने खड़ा हूं जो 55 फीट ऊंची है। यह मूर्ति उस सभ्यता को दिखाती है जो खंडर हो चुकी है। यह मूर्ति उन लोगों की कहानी है जो खो चुके हैं। यह मूर्ति ऐसे देश को दिखाती है जहां के लोग अपनी किस्मत को लेकर बेपरवाह हैं। यह लोग खुद से ही नफरत करते हैं। यानी इस पत्रकार ने भारतीय लोगों का भी अपमान किया है। इसने कहा कि कनाडा को डायवर्सिटी ले डूब रही है।
हैरानी की बात देखिए कि कनाडा के कई नेता और पत्रकार हमेशा से भारत को यह नसीहत देते आए हैं कि भारत को अपने देश में डायवर्सिटी यानी विविधता को बचाना चाहिए। लेकिन यह मक्कार लोग अपनी ही बात से पलट गए। कनाडा के इन लोगों ने कहा है कि हमारे देश में हनुमान मूर्ति के लिए जगह नहीं है। हम एक ईसाई देश हैं। भारत के लोग हमारे देश पर कब्जा करना चाहते हैं। अब इन लोगों ने ऐसी घटिया बात कही है तो इनको जवाब मिलना चाहिए। बता दें कि कनाडा के मूल निवासी गोरे नहीं थे। यह जो पत्रकार है, यह भी कनाडा का मूल निवासी नहीं है। गोरे लोग यूरोप से आए और कनाडा के मूल निवासियों को भगाकर कनाडा पर कब्जा कर लिया और आज यह खुद को कनाडा का नागरिक बोलते हैं। कनाडा पर भारतीय लोग तो कब्जा नहीं करेंगे लेकिन इन लोगों ने कनाडा पर कब्जा किया था। दूसरी बात हनुमान जी की मूर्ति की। इन लोगों को कनाडा में हनुमान जी की एक मूर्ति से दिक्कत है। मगर कनाडा समेत कई पश्चिमी देश भारत में चर्च को फंड देते हैं। भारत में हजारों चर्च बनाने के लिए पैसा देते हैं। मिशनरियों के जरिए हिंदुओं का धर्मांतरण करते हैं।
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