रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए क्या है भारत की रणनीति? विदेश मंत्रालय ने किया खुलासा
Russia Ukraine War: रूस यूक्रेन संघर्ष दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए भारत समेत कई देशों से गुहार लगा चुका है. भारत ने भी शांति के पक्ष में अपना रुझान दिखाया है. अब भारत ने रूस यूक्रेन युद्ध रोकने की रणनीति बना ली है. इसके लिए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन और पोलैंड का दौरा भी किया है.
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत यूक्रेन और रूस दोनों के साथ संपर्क में है. रूस यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने में हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है. मंत्रालय ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने द्विसाप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की हालिया यात्रा का मुख्य उद्देश्य संवाद और कूटनीति की संभावनाओं का पता लगाना था, साथ ही उन्होंने भारत के इस निरंतर रुख को दोहराया कि यह युद्ध का युग नहीं है.
'किसी भी समस्या का समाधान युद्ध नहीं'
प्रवक्ता जयसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री के हालिया यूक्रेन और पोलैंड दौरे के दौरान भारत ने एक बार फिर अपना रुख साफ किया कि यह युद्ध का दौर नहीं है. किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं हो सकता. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की बात दोहराते हुए कहा कि लंबे समय से चले आ रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अब रास्ता निकालना जरूरी है. भारत का मानना है कि इसका समाधान संबंधित देशों को बातचीत के जरिए तलाशना होगा.
जयसवाल ने कहा कि अगर भारत युद्ध खत्म कराने में किसी भी तरह मदद कर सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है. भारत लगातार रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या कोई ऐसा सुझाव या रास्ता है, जिससे इस संघर्ष को खत्म करने में मदद मिल सके.
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3 सितंबर को राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिले थे जयशंकर
जयसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 3 सितंबर को यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा और राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की. जयसवाल के मुताबिक, बातचीत में जयशंकर ने कहा कि भारत लगातार यह कहता रहा है कि यह युद्ध का समय नहीं है और किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं हो सकता.
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं नजरें
आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बैठकों को लेकर जयसवाल ने कहा कि पीएम मोदी कई देशों के नेताओं से मुलाकात करेंगे. इन बैठकों में रूस-यूक्रेन युद्ध भी चर्चा के प्रमुख मुद्दों में से एक रहेगा. जयसवाल ने कहा कि इन बैठकों में किन नेताओं से बातचीत होगी और उनका समय क्या रहेगा, इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी. उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष समेत कई मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी.
रूसी सेना में 24 भारतीय अभी भी...
रूसी सेना में शामिल भारतीय नागरिकों के मुद्दे पर जयसवाल ने कहा कि भारत ने यह मामला रूसी सरकार के सामने उठाया है. भारत को उम्मीद है कि रूसी सेना में सेवा दे रहे भारतीय नागरिकों को जल्द रिहा किया जाएगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि करीब 24 भारतीय अभी भी रूसी सेना में सेवा दे रहे हैं. भारत ने इस मुद्दे को रूसी सरकार के सामने उठाया है और उम्मीद जताई है कि उन्हें जल्द से जल्द रिहा कर भारत वापस भेजा जाएगा.
इससे पहले 31 अगस्त को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया था कि कुल 227 भारतीय नागरिक रूसी सेना में भर्ती हुए थे. इनमें से 139 लोगों को सेना से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 51 की मौत हो चुकी है. उन्होंने कहा कि भारत बाकी लोगों की रिहाई और सुरक्षित वापसी के लिए रूस के साथ लगातार बातचीत कर रहा है.
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Stock Market Today: शेयर बाजार में आज भी भारी गिरावट, सेंसेक्स 550 अंकों से ज्यादा टूटा, निफ्टी 23,500 से नीचे फिसला
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में खुला. सुबह 9:22 पर सेंसेक्स 533 अंक या 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,044 और निफ्टी 135 अंक या 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,498 पर था. शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव बनाने का काम आईटी और सर्विसेज सेक्टर ने किया.
सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज टॉप लूजर्स थे. निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी कंज्पशन, निफ्टी ऑयलएंडगैस और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग भी लाल निशान में थे.
वहीं, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी पीएसई, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मेटल और निफ्टी कमोडिटीज हरे निशान में थे. सेंसेक्स पैक में एलएंडटी, एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स और कोटक महिंद्रा बैंक गेनर्स थे. एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, एचयूएल, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट,आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन, मारुति सुजुकी और एशियन पेंट्स लूजर्स थे.
एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हुआ है. टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल हरे निशान में थे, जबकि जकार्ता लाल निशान में था. अमेरिकी बाजार मंगलवार को लाल निशान में बंद हुए थे. मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 1.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और नैस्डैक 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए.
जानकारों ने कहा कि अभी मार्केट पर दो बड़ी चुनौतियों का असर पड़ रहा है. पहली, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही है. दूसरी, तेजी से बढ़ते आईपीओ मार्केट की वजह से मार्केट से लिक्विडिटीकम हो रही है, जिससे निफ्टी में लगातार गिरावट देखी जा रही है. शायद, दूसरी वजह का असर पहली वजह से ज्यादा है.
उन्होंने आगे कहा कि जून के बाद से आईपीओ से होने वाला लिस्टिंग गेन बढ़कर लगभग 22 प्रतिशत हो गया है, जिससे रिटेल और इंस्टीट्यूशनल, दोनों तरह के निवेशक आईपीओ मार्केट की ओर आकर्षित हो रहे हैं. यह बात समझ में आती है क्योंकि इस साल अब तक निफ्टी का रिटर्न -9.5 प्रतिशत रहा है. यहां तक कि एफआईआई, जिन्होंने इस साल अब तक एक्सचेंजों के जरिए 2,84,000 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची है, उन्होंने भी इस साल अब तक आईपीओ में लगभग 36,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है.
स्रोत- आईएएनएस
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