MP उच्च शिक्षा विभाग की नई पहल, अब e-GyanSetu YouTube चैनल पर छात्रों को मिलेंगे विभिन्न विषयों के ई-कंटेंट वीडियो
मध्य प्रदेश के कॉलेज छात्रों के लिए अच्छी खबर है। ई-ज्ञानसेतु यूट्यूब चैनल पर अब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण ई-वीडियो कंटेंट मिलेंगे। यह कंटेंट उच्च शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में शासकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय के प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों से तैयार कराया गया है।
दरअसल, छात्रों को डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ई-वीडियो कंटेंट अब e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध होंगे। ई- वीडियो कंटेंट के प्रकाशन का उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार आज, 9 सितंबर को शाम 5 बजे शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण Google Meet एवं e-GyanSetu YouTube Channel के माध्यम से किया जाएगा।
क्या खास है इसमे
- e-GyanSetu पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से छात्र अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अध्ययन कर सकेंगे।
- छात्रों को विषयवस्तु को दोहराने, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझने तथा अपनी सीखने की गति के अनुसार अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी।
- अब तक 2,305 वीडियो शूट किए जा चुके हैं, जिनमें से 954 वीडियो का एडिटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है।
- सत्यापन पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा।
विभिन्न विषयों और पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 की भावना के अनुरूप तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व उच्च शिक्षा मंत्री परमार के मार्गदर्शन में प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों और पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं।
ग्राफिक्स/डिजिटल विजुअल्स का उपयोग
ई-वीडियो कंटेंट को छात्रों के लिए अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स एवं डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया गया है। ये वीडियो प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं।
वीडियो की प्रमाणिकता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार ई-कंटेंट का विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता और शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर वैलिडेशन बोर्ड द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जाता है। सत्यापन के बाद ही वीडियो को छात्रों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा।
भाषा पर भी फोकस
छात्रों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी तथा संस्कृत सहित क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए गए हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुँचाने में मदद मिलेगी।
ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल पर विद्यार्थियों को मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-वीडियो कंटेंट
उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार 9 सितंबर को करेंगे ई-वीडियो कंटेंट के प्रकाशन का शुभारंभ
RM-https://t.co/4n0xw2s1m6#MadhyaPradesh pic.twitter.com/ECNM5wO31Z
— Higher Education Department, MP (@highereduminmp) September 8, 2026
ई-ज्ञानसेतु YouTube Channel से अब पढ़ाई होगी Next Level
फिंगर प्रिंट पर Digital Education Facility
UG विद्यार्थियों के लिए विभिन्न विषयों के ई-कंटेंट वीडियो और वो भी Smart और Digital फार्मेट में#MadhyaPradesh pic.twitter.com/dx7O0jLn9E
— Higher Education Department, MP (@highereduminmp) September 8, 2026
अब तक नहीं हिली ‘डॉक्टर हनुमान’ की प्रतिमा, अब IIT की टीम बताएगी राज, 10 दिन की कोशिश भी रही बेअसर
उज्जैन के कंठाल क्षेत्र में स्थित खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का बाहरी ढांचा हटाने के बाद प्रशासन ने प्रतिमा को सुरक्षित दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की लेकिन करीब 10 दिनों तक चली मशक्कत के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। भारी क्रेन, जेसीबी और मजदूरों की पूरी ताकत भी नाकाम रही। इसके बाद प्रशासन ने विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया और IIT इंदौर की टीम को मौके पर बुलाया गया।
वहीं नगर निगम के मुताबिक प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए अब वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
IIT इंदौर की जांच से तय होगा प्रतिमा कैसे हटेगी
दरअसल मंगलवार को IIT इंदौर के विशेषज्ञ खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे और करीब दो घंटे तक विशेष उपकरणों से प्रतिमा की गहराई और आसपास की संरचना की जांच की। टीम अब अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर यह तय होगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से कैसे और कब दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि मंदिर के पुजारी के आग्रह पर विशेषज्ञों को बुलाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। दरअसल, कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है और मंदिर प्रस्तावित सड़क के हिस्से में आ रहा था। मंदिर का ढांचा हटाने के बाद कार्रवाई प्रतिमा पर आकर रुक गई। प्रशासन अब ऐसी कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता जिससे प्रतिमा को नुकसान पहुंचे।
1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा
वहीं विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी का कहना है कि प्रतिमा को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। उनके मुताबिक पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को कई बार इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था। यही वजह हो सकती है कि भारी मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। उन्होंने बताया कि प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह की प्रतिमाएं बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से चढ़ रहे सिंदूर की मोटी परत के कारण इसकी मूल बनावट भी पूरी तरह साफ नजर नहीं आती।
इधर, श्रद्धालुओं की नजर में यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं है। वर्षों से लोग इस मंदिर को ‘डॉक्टर हनुमान’ के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। मंदिर के पुजारी महेश बैरागी बताते हैं कि यहां छोटे बच्चों को झाड़नी की जाती है और तावीज दिया जाता है। उनका कहना है कि कई परिवारों ने यहां आकर अपनी मनोकामना पूरी होने का अनुभव साझा किया है।
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