'उकसावे वाली हरकतों पर लगे लगाम', SCO समिट में व्लादिमीर पुतिन का पश्चिमी देशों को संदेश
बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया को इतिहास के सबसे बड़े सबक की याद दिलाई. 1 सितंबर की ऐतिहासिक तारीख का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसी दिन द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ था. पुतिन ने आह्वान किया कि सदस्य देशों को ऐसे किसी भी उकसावे को रोकने के लिए मिलकर काम करना होगा, जिससे नए सैन्य टकराव की स्थिति बने.
Maratha Reservation Dispute: कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल, क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन और क्या है मराठा आरक्षण का पूरा विवाद?
महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में मराठा आरक्षण का मुद्दा वर्षों से सबसे संवेदनशील विषय रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस पूरे आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे मनोज जरांगे पाटिल ने एक बार फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल ने अंतरवाली सराटी पहुंचकर जरांगे पाटिल से मुलाकात की और उनकी गिरती सेहत का हवाला देते हुए अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया। हालांकि, जरांगे पाटिल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 11 सितंबर तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 12 सितंबर से वह अपने लाखों समर्थकों के साथ मुंबई पहुंचकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
किसान परिवार से निकलकर मराठा आंदोलन का चेहरा बने मनोज जरांगे पाटिल
मनोज जरांगे पाटिल मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड़ जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में जालना जिले के अंबड तालुका स्थित अंकुशनगर में निवास करते हैं। वे बेहद साधारण पृष्ठभूमि और सामान्य कृषक परिवार से आते हैं, लेकिन लंबे समय से सामाजिक कार्यों और मराठा समुदाय के अधिकारों की लड़ाई से गहराई से जुड़े रहे हैं।
इस लंबे संघर्ष के दौरान उन्होंने मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए अपनी निजी संपत्ति और जमीन तक बेच दी। साल 2023 में जालना के अंतरवाली सराटी गांव में उनके अनशन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज की घटना के बाद जरांगे पाटिल रातों-रात पूरे महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन के सबसे बड़े जननेता बनकर उभरे। उनकी सीधी, ठेठ बोली और समुदाय के प्रति समर्पण के कारण आज राज्य का बड़ा मराठा युवा वर्ग उनके साथ मजबूती से खड़ा नजर आता है।
कुनबी प्रमाणपत्र का पेच और ओबीसी कोटे में हिस्सेदारी का पूरा विवाद
मराठा आरक्षण विवाद का मुख्य केंद्र कुनबी जाति प्रमाण पत्र और अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी का कोटा है। कुनबी महाराष्ट्र का एक पारंपरिक कृषि आधारित समुदाय है, जिसे राज्य में पहले से ही ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
मनोज जरांगे पाटिल का तर्क है कि मराठा समुदाय भी ऐतिहासिक और पारंपरिक रूप से खेती-किसानी पर ही निर्भर रहा है, इसलिए सभी पात्र मराठों को कुनबी मानकर उन्हें ओबीसी श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए ताकि उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का सीधा लाभ मिल सके।
58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स का सच और जाति सत्यापन प्रक्रिया की बाधा
राज्य सरकार द्वारा गठित शिंदे समिति ने पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों जैसे हैदराबाद गजट, सातारा गजट और बॉम्बे गजट की गहन जांच के बाद लगभग 58 लाख पुराने कुनबी रिकॉर्ड्स की पहचान की है। मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांग यह है कि इन 58 लाख रिकॉर्ड्स को आधार मानकर बिना किसी प्रशासनिक हीलाहवाली के सभी पात्र मराठों, उनकी वंशावली और रक्त संबंधियों को तुरंत कुनबी और जाति सत्यापन प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
इसके साथ ही वे जिला स्तर पर बनी जाति सत्यापन समितियों की जटिल प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं क्योंकि उनका आरोप है कि ये समितियां वैध दावों को भी खारिज कर देती हैं।
आंदोलनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की मांग
केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि जरांगे पाटिल ने सरकार के सामने कई अन्य प्रशासनिक और सामाजिक मांगें भी रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि पिछले मराठा आरक्षण आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमों को बिना शर्त तुरंत वापस लिया जाए। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारियों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।
वे मराठा-कुनबी समुदाय के लिए अलग राज्य स्तरीय विभाग या मंत्रालय बनाने, अन्नासाहेब पाटिल महामंडल का ब्याज रिफंड जारी करने और 'सारथी' संस्था के माध्यम से दी जाने वाली छात्रवृत्तियों को तुरंत लागू करने पर भी जोर दे रहे हैं।
सरकार का रुख और 11 सितंबर के बाद आगे का संभावित घटनाक्रम
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि वह मराठा समुदाय को कानूनी रूप से टिकाऊ और मजबूत आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि कुनबी रिकॉर्ड्स के आधार पर तेजी से प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, दूसरी तरफ राज्य के विभिन्न अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) संगठन अपने कोटे में मराठों के समावेश का विरोध कर रहे हैं, जिससे सरकार के लिए कानूनी और सामाजिक संतुलन बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
फिलहाल जरांगे पाटिल ने केवल पानी और दवाइयां लेने की बात कही है, लेकिन अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया है। यदि 11 सितंबर तक सरकार कोई ठोस सरकारी आदेश या अध्यादेश जारी नहीं करती है, तो 12 सितंबर को होने वाला मुंबई मार्च राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है।
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