Maratha Reservation Dispute: कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल, क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन और क्या है मराठा आरक्षण का पूरा विवाद?
महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में मराठा आरक्षण का मुद्दा वर्षों से सबसे संवेदनशील विषय रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस पूरे आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे मनोज जरांगे पाटिल ने एक बार फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल ने अंतरवाली सराटी पहुंचकर जरांगे पाटिल से मुलाकात की और उनकी गिरती सेहत का हवाला देते हुए अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया। हालांकि, जरांगे पाटिल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 11 सितंबर तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 12 सितंबर से वह अपने लाखों समर्थकों के साथ मुंबई पहुंचकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
किसान परिवार से निकलकर मराठा आंदोलन का चेहरा बने मनोज जरांगे पाटिल
मनोज जरांगे पाटिल मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड़ जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में जालना जिले के अंबड तालुका स्थित अंकुशनगर में निवास करते हैं। वे बेहद साधारण पृष्ठभूमि और सामान्य कृषक परिवार से आते हैं, लेकिन लंबे समय से सामाजिक कार्यों और मराठा समुदाय के अधिकारों की लड़ाई से गहराई से जुड़े रहे हैं।
इस लंबे संघर्ष के दौरान उन्होंने मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए अपनी निजी संपत्ति और जमीन तक बेच दी। साल 2023 में जालना के अंतरवाली सराटी गांव में उनके अनशन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज की घटना के बाद जरांगे पाटिल रातों-रात पूरे महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन के सबसे बड़े जननेता बनकर उभरे। उनकी सीधी, ठेठ बोली और समुदाय के प्रति समर्पण के कारण आज राज्य का बड़ा मराठा युवा वर्ग उनके साथ मजबूती से खड़ा नजर आता है।
कुनबी प्रमाणपत्र का पेच और ओबीसी कोटे में हिस्सेदारी का पूरा विवाद
मराठा आरक्षण विवाद का मुख्य केंद्र कुनबी जाति प्रमाण पत्र और अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी का कोटा है। कुनबी महाराष्ट्र का एक पारंपरिक कृषि आधारित समुदाय है, जिसे राज्य में पहले से ही ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
मनोज जरांगे पाटिल का तर्क है कि मराठा समुदाय भी ऐतिहासिक और पारंपरिक रूप से खेती-किसानी पर ही निर्भर रहा है, इसलिए सभी पात्र मराठों को कुनबी मानकर उन्हें ओबीसी श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए ताकि उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का सीधा लाभ मिल सके।
58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स का सच और जाति सत्यापन प्रक्रिया की बाधा
राज्य सरकार द्वारा गठित शिंदे समिति ने पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों जैसे हैदराबाद गजट, सातारा गजट और बॉम्बे गजट की गहन जांच के बाद लगभग 58 लाख पुराने कुनबी रिकॉर्ड्स की पहचान की है। मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांग यह है कि इन 58 लाख रिकॉर्ड्स को आधार मानकर बिना किसी प्रशासनिक हीलाहवाली के सभी पात्र मराठों, उनकी वंशावली और रक्त संबंधियों को तुरंत कुनबी और जाति सत्यापन प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
इसके साथ ही वे जिला स्तर पर बनी जाति सत्यापन समितियों की जटिल प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं क्योंकि उनका आरोप है कि ये समितियां वैध दावों को भी खारिज कर देती हैं।
आंदोलनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की मांग
केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि जरांगे पाटिल ने सरकार के सामने कई अन्य प्रशासनिक और सामाजिक मांगें भी रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि पिछले मराठा आरक्षण आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमों को बिना शर्त तुरंत वापस लिया जाए। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारियों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।
वे मराठा-कुनबी समुदाय के लिए अलग राज्य स्तरीय विभाग या मंत्रालय बनाने, अन्नासाहेब पाटिल महामंडल का ब्याज रिफंड जारी करने और 'सारथी' संस्था के माध्यम से दी जाने वाली छात्रवृत्तियों को तुरंत लागू करने पर भी जोर दे रहे हैं।
सरकार का रुख और 11 सितंबर के बाद आगे का संभावित घटनाक्रम
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि वह मराठा समुदाय को कानूनी रूप से टिकाऊ और मजबूत आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि कुनबी रिकॉर्ड्स के आधार पर तेजी से प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, दूसरी तरफ राज्य के विभिन्न अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) संगठन अपने कोटे में मराठों के समावेश का विरोध कर रहे हैं, जिससे सरकार के लिए कानूनी और सामाजिक संतुलन बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
फिलहाल जरांगे पाटिल ने केवल पानी और दवाइयां लेने की बात कही है, लेकिन अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया है। यदि 11 सितंबर तक सरकार कोई ठोस सरकारी आदेश या अध्यादेश जारी नहीं करती है, तो 12 सितंबर को होने वाला मुंबई मार्च राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है।
'मुझे धोखा मिला... जिंदगी का सबसे बुरा दौर था': Badshah से शादी टूटने पर छलका Isha Rikhi का दर्द, Bigg Boss 20 में आएंगी नजर
Isha Rikhi in Bigg Boss: सिंगर-रैपर बादशाह ने हाल ही में पत्नी ईशा रिखी से अलग होने की पुष्टि कर सभी को चौंका दिया। शादी के मजह 5 महीने बाद ही दोनों के रिश्ते में दरार आ गई और दोनों ने इस रिश्ते को खत्म करने का फैसला लिया। अब पंजाबी अभिनेत्री ईशा जल्द ही बिग बॉस के 20वें सीजन में नजर आने वाली हैं। शो में एंट्री से पहले उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात की है।
बादशाह से अलगाव को लेकर अब तक चुप रहने वाली ईशा ने पहली बार इस रिश्ते और उससे जुड़े अनुभवों पर अपनी बात रखी है। बिंग बॉस 20 के प्रीमियर से पहले दिए एक इंटरव्यू में ईशा ने कई खुलासे किए।
रिश्ते को पब्लिक के बीच तमाशा नहीं बनाना चाहती थीं ईशा
ईटाइम्स से बातचीत में ईशा ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक इस मामले पर चुप रहना इसलिए चुना क्योंकि वह अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक नहीं बनाना चाहती थीं। अभिनेत्री ने कहा कि उस समय वह खुद से कई सवाल करती थीं और सोचती थीं कि आखिर उनसे ऐसी क्या गलती हुई। उन्होंने बताया कि वह जिस व्यक्ति से प्यार करती थीं, उसे बचाने के साथ-साथ अपने रिश्ते को भी बचाने की कोशिश कर रही थीं।
ईशा ने साफ किया कि वह कभी नहीं चाहती थीं कि दो लोगों के बीच की निजी समस्या सोशल मीडिया या लोगों के सामने किसी तरह का ड्रामा बन जाए।
मां के शादी की तस्वीरें शेयर करने पर हुआ था विवाद
ईशा ने ये भी बताया कि उनकी मां ने उनकी और बादशाह की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थीं, जबकि खुद एक्ट्रेस ने ऐसा नहीं किया था। उन्होंने बताया कि इन पोस्ट्स को लेकर उनकी अपनी मां से कई बार बहस हुई, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि जो कुछ भी हुआ, वह किसी वजह से हुआ था और उनके बस में नहीं था। एक्ट्रेस ने माना कि उस समय वह बहुत डरी हुई थीं, खासकर इसलिए क्योंकि उनकी मां कुछ और कह रही थीं और बादशाह कुछ और, जिससे वह उलझन में पड़ गई थीं।
'मुझे लगा कि मेरे साथ धोखा हुआ'
ईशा ने आगे कहा- "हमने (पोस्ट के बाद) कई बार बात की। वह (बादशाह) मुझे एक अलग ही तस्वीर दिखा रहे थे, जो सच नहीं थी। मैं खुद से सवाल कर रही थी: मैं इतनी बेवकूफ कैसे हो सकती हूं? यह मेरी ज़िंदगी का सबसे बुरा दौर था।" जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें धोखा मिला है, तो वह कहती हैं, "धोखा मिला? मैं कहूँगी कि हाँ, मुझे धोखा मिला।"
शादी की तस्वीरों के बाद बढ़ी चर्चा
ईशा और बादशाह अपने रिश्ते को लेकर इसी साल मार्च में चर्चा में आए थे। उस समय ईशा की मां पूनम रिखी ने सोशल मीडिया पर बादशाह-ईशी की प्राइवेट शादी समारोह की कुछ तस्वीरें साझा की थीं।
तस्वीरें सामने आने के बाद दोनों के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, ईशा ने बताया कि वह खुद अपने निजी रिश्ते को सार्वजनिक नहीं करना चाहती थीं।
बाद में दोनों ने 1 सितंबर को एक साझा बयान जारी कर अलग होने की पुष्टि की और लोगों से उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की।
हालांकि, इन हालिया दावों पर बादशाह की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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