Eating Habits: लंच-डिनर के बाद मीठे की आदत पड़ेगी भारी! शरीर को हो सकते हैं बड़े नुकसान
Eating Habits: खाने के बाद कुछ मीठा मिल जाए तो कई लोगों को लगता है कि खाना पूरा हुआ। लंच हो या डिनर, मिठाई, चॉकलेट, आइसक्रीम या मीठे पेय की क्रेविंग अगर रोज की आदत बन जाए, तो यह सिर्फ स्वाद का मामला नहीं रह जाता। ज्यादा शुगर का नियमित सेवन धीरे-धीरे शरीर की मेटाबॉलिक सेहत पर असर डाल सकता है।
खासकर भारी भोजन के तुरंत बाद मीठा खाने की आदत को नजरअंदाज करना सही नहीं है। बार-बार ज्यादा शुगर लेने से वजन बढ़ने, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और दांतों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि खाने के बाद मीठे की तलब आखिर क्यों होती है और इससे बचने के लिए क्या किया जा सकता है?
खाने के बाद मीठा खाने की क्रेविंग क्यों होती है?
भोजन के बाद मीठा खाने की इच्छा कई कारणों से हो सकती है। कई बार यह शरीर की वास्तविक जरूरत से ज्यादा एक आदत या मानसिक जुड़ाव होती है। अगर किसी व्यक्ति को हर दिन खाना खत्म करने के बाद मिठाई खाने की आदत है, तो समय के साथ दिमाग उस समय मीठे की अपेक्षा करने लगता है।
इसके अलावा, भोजन में प्रोटीन, फाइबर या अन्य पोषक तत्वों की कमी और लंबे समय तक अनियमित खान-पान भी भूख तथा क्रेविंग को प्रभावित कर सकता है। तनाव, नींद की कमी और दिनभर की थकान भी मीठी चीजों की इच्छा को बढ़ा सकती है।
ज्यादा मीठा खाने से होने वाली परेशानियां
बढ़ सकता है वजन
मिठाई और अन्य मीठे खाद्य पदार्थों में कैलोरी काफी ज्यादा हो सकती है। भोजन के बाद रोजाना अतिरिक्त कैलोरी लेने की आदत लंबे समय में वजन बढ़ाने में योगदान कर सकती है।
ब्लड शुगर पर असर
शुगर युक्त खाद्य पदार्थ ब्लड ग्लूकोज को तेजी से बढ़ा सकते हैं। बार-बार ज्यादा मात्रा में शुगर लेने की आदत मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं मानी जाती और लंबे समय में टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़ी हो सकती है।
दांतों को नुकसान
मुंह में मौजूद बैक्टीरिया शुगर का इस्तेमाल करके ऐसे एसिड बना सकते हैं जो दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाते हैं। नियमित रूप से मीठा खाने से कैविटी का खतरा बढ़ सकता है।
ज्यादा मीठे की आदत मजबूत हो सकती है
हर भोजन के बाद मीठा खाने से यह एक नियमित व्यवहार बन सकता है। धीरे-धीरे व्यक्ति को लगता है कि बिना मिठाई के खाना अधूरा है और क्रेविंग को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
डाइट की गुणवत्ता बिगड़ सकती है
अगर भोजन के बाद बार-बार मिठाई या मीठे स्नैक्स लिए जाएं, तो डाइट में पोषक तत्वों की जगह अतिरिक्त कैलोरी बढ़ सकती है। इससे संतुलित आहार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
मीठे की क्रेविंग से कैसे बचें?
मीठा पूरी तरह बंद करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। सबसे पहले रोजाना खाने के बाद मिठाई लेने की आदत को कम करने की कोशिश की जा सकती है। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल करना, पर्याप्त पानी पीना और नियमित नींद लेना मददगार हो सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Parenting Tips: बच्चों के लिए क्यों खास है रागी? हड्डियों-दांतों से लेकर आयरन तक, जानें 5 फायदे
Ragi Benefits for Kids: रागी यानी फिंगर मिलेट को लंबे समय से भारतीय खान-पान का हिस्सा माना जाता है। इसकी मदद से दलिया, चीला, डोसा, इडली और पोरिज जैसे कई व्यंजन बनाए जा सकते हैं। बच्चों को रागी खिलाने का फायदा यह है कि इसे उनकी पसंद के हिसाब से मीठा या नमकीन बनाकर परोसा जा सकता है।
रागी में कैल्शियम, फाइबर, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। जानें बच्चों के लिए रागी के 5 फायदे और इसे उनकी डाइट में शामिल करने के आसान तरीके।
1. हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद
रागी में कैल्शियम पाया जाता है, जो बच्चों की बढ़ती उम्र में हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी होता है। इसलिए संतुलित डाइट में रागी को शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।
2. पेट को लंबे समय तक भरा रखता है
रागी में फाइबर मौजूद होता है। फाइबर वाला खाना पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। बच्चों के नाश्ते में रागी का दलिया या चीला शामिल किया जा सकता है।
3. शरीर को मिलता है आयरन
रागी में आयरन भी पाया जाता है। शरीर में आयरन की मदद से हीमोग्लोबिन बनाने की प्रक्रिया होती है। बच्चों की डाइट में रागी के साथ दूसरे आयरन वाले खाद्य पदार्थ भी शामिल किए जा सकते हैं।
4. प्रोटीन भी देता है रागी
रागी में कुछ मात्रा में प्रोटीन भी पाया जाता है। इसे दूध, दही या दाल जैसी चीजों के साथ मिलाकर बच्चे की थाली को और पौष्टिक बनाया जा सकता है।
5. बच्चों की डाइट में ला सकते हैं वैरायटी
बच्चों को रोज एक जैसा खाना पसंद नहीं आता। ऐसे में रागी को अलग-अलग रूप में खिलाना आसान हो सकता है। कभी रागी डोसा, कभी चीला तो कभी दलिया बनाकर बच्चे की डाइट में बदलाव किया जा सकता है।
बच्चों को रागी कैसे खिलाएं?
अगर बच्चा रागी खाने में नखरे करता है, तो इसे जबरदस्ती खिलाने के बजाय उसकी पसंद के व्यंजन में शामिल करें।
- रागी का हल्का दलिया बनाएं।
- रागी से चीला या डोसा तैयार करें।
- रागी इडली ट्राई कर सकते हैं।
- दूध के साथ रागी का पोरिज बना सकते हैं।
- सब्जियों के साथ नमकीन रागी चीला बनाया जा सकता है।
सिर्फ रागी से पूरी नहीं होगी पोषण की जरूरत
रागी पौष्टिक अनाज है, लेकिन बच्चों को संतुलित खाना देना ज्यादा जरूरी है। उनकी थाली में दाल, दूध-दही, सब्जियां, फल, मेवे और दूसरे अनाज भी उम्र और जरूरत के हिसाब से शामिल करें।
(Disclaimer): हर बच्चे की खाने की जरूरत अलग होती है। बच्चे की उम्र, पसंद और डाइट को ध्यान में रखते हुए रागी की मात्रा तय करें। अगर बच्चे को किसी खास भोजन से एलर्जी या परेशानी है, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
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