Cricket in USA: अमेरिका में ट्रेडिशनल क्रिकेट नहीं... पॉपुलेरिटी बढ़ाने का क्या है 'पोंटिंग प्लान'
Cricket in USA: अमेरिका (USA) में 2024 का टी20 विश्वकप संयुक्त रूप से आयोजन किया गया था। इस बड़े टूर्नामेंट में अमेरिका ने काफी अच्छा परफार्म किया था। ग्रुप स्टेज में टीम ने पाकिस्तान जैसी टीम को हराकर सुपर-8 में जगह बनाई थी। इसके बावजूद USA में क्रिकेट अभी भी उभरते हुए खेलों में से एक ही है। हालांकि देश में 'मेजर लीग क्रिकेट' टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा है। लेकिन आमतौर पर क्रिकेट को देश में अभी भी बड़ी पहचान नहीं मिल पाई है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग का मानना है कि USA में क्रिकेट को T20 के तौर पर रीब्रांड करने से वहां सफलता मिल सकती है।
पोंटिंग ने द एथलेटिक से बातचीत में कहा- अगर मैं इसे सिर्फ गेम को बेचने और प्रमोट करने के लिए यहां लाता, तो मैं इसे क्रिकेट नहीं कहता। इसे बस T20 क्रिकेट के तौर पर रीब्रांड किया जाता। क्रिकेट वाली बात को छोड़ ही दीजिए। दुनिया के जिन हिस्सों में लोग क्रिकेट खेलते हुए बड़े नहीं हुए हैं। वहां के युवा जब क्रिकेट का नाम सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि यह 5 दिन तक चलने वाला लंबा गेम है, जबकि ऐसा नहीं है। मैं इसकी तुलना बेसबॉल से करूंगा और बच्चों को यह समझने का मौका दूंगा कि T20 क्रिकेट के एक गेम में आप 15 छक्के लगाते हैं, जबकि बेसबॉल के एक गेम में आप एक से भी कम होम रन लगाते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि USA में ODI और टेस्ट क्रिकेट को कैसे प्रमोट किया जा सकता है, तो पोंटिंग ने यहां बड़े प्रारुप को लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा- यह वैसा मार्केट नहीं। मुझे इसकी बिल्कुल भी चिंता नहीं है। मुझे टेस्ट क्रिकेट बहुत पसंद है। मैंने T20 से कहीं ज्यादा टेस्ट क्रिकेट खेला है, लेकिन अब मैं T20 गेम पर काफी काम कर रहा हूं।
MLC से अमेरिका में क्रिकेट शुरू
मेजर लीग क्रिकेट 2023 में शुरू हुई थी। अभी इसमें 6 टीमें कैलिफ़ोर्निया और टेक्सास में होने वाले 6 हफ़्ते लंबे टूर्नामेंट में खेलती हैं। भले ही सभी टीमों के पास अपने होम वेन्यू (घरेलू मैदान) न हों, फिर भी यह लीग बड़े नामों को निवेशकों के तौर पर आकर्षित करती है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला और एडोब के CEO शांतनु नारायण के अलावा भारत का अंबानी परिवार भी MLC टीम के मालिक के तौर पर शामिल है। आने वाले सालों में इस लीग में टीमों की संख्या बढ़कर 8 हो जाएगी और इसमें स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं।
वॉशिंगटन फ्रीडम के हेड कोच पोंटिंग ने बताया कि USA में क्रिकेट का विकास उनकी उम्मीद से धीमा रहा है। पोंटिंग ने कहा- शुरुआत में MLC से जुड़ने की एक वजह यह थी कि मैं USA में रहकर इसके विकास का हिस्सा बनना चाहता था, लेकिन यह मेरी उम्मीद से थोड़ा धीमा रहा है। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने जमीनी स्तर पर जाकर इसे प्रमोट करने में काफी सक्रियता दिखाई है।
तंबाकू की लत पड़ रही भारी! कैंसर के 40% मरीज युवा, विशेषज्ञों की बड़ी चेतावनी
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि तंबाकू का सेवन अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। पहले जहां तंबाकू से जुड़ी गंभीर बीमारियां अधिक उम्र में दिखाई देती थीं, वहीं अब कम उम्र के युवा भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
इंदौर के सरकारी और निजी अस्पतालों में हर साल हजारों नए कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने लंबे समय तक तंबाकू या उससे जुड़े उत्पादों का सेवन किया है। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
तंबाकू और ई-सिगरेट की बढ़ती लत बना रही युवाओं को शिकार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू के पारंपरिक रूपों के साथ-साथ ई-सिगरेट का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है। हालांकि भारत में ई-सिगरेट की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद कई माध्यमों से यह युवाओं तक पहुंच रही है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं में इसका चलन बढ़ने की बात भी सामने आ रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि शुरुआत में इसे फैशन या शौक के रूप में अपनाया जाता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है। इसके बाद व्यक्ति तंबाकू के अन्य उत्पादों की ओर बढ़ता है। चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र की युवतियां भी तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के साथ अस्पताल पहुंच रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता अभियान के साथ-साथ परिवार और स्कूल स्तर पर भी बच्चों को इसके खतरों के बारे में लगातार जानकारी देना जरूरी है।
तंबाकू से बढ़ रहे कैंसर और अन्य गंभीर रोग
चिकित्सकों के अनुसार तंबाकू का सबसे बड़ा असर कैंसर के रूप में सामने आता है। ओरल कैंसर यानी मुंह का कैंसर भारत में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। इसके अलावा फेफड़ों का कैंसर, गले का कैंसर, खाने की नली का कैंसर, पेट का कैंसर और रक्त से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां भी तंबाकू सेवन से जुड़ी हुई हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि तंबाकू सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि हृदय रोग, सांस की बीमारी, दमा और आंखों से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ाता है। वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। भारत में गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का उपयोग भी बड़ी समस्या बना हुआ है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि तंबाकू से दूरी बनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी जल्दी इस आदत को छोड़ा जाए, स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को उतना ही कम किया जा सकता है।
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