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india vs pakistan: विमेंस एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मुकाबला, स्मृति और हरमनप्रीत पर सभी की निगाहें

india vs pakistan womens asia cup: महिला एशिया कप में आज बड़ा मुकाबला होने जा रहा। टूर्नामेंट के 9वें मुकाबले में भारत और पाकिस्तान की टीमें भिड़ने जा रही है। दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में रात 7.30 बजे टॉस होगा। इसके बाद 8 बजे से खेल शुरू होगा। 

क्रिकेट फैंस की निगाहें भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर और ओपनर स्मृति मंधाना पर टिकी रहेंगी। हरमनप्रीत कौर अपना 150वां टी20 इंटरनेशनल बतौर कप्तान खेलेंगी। वह पुरुष और महिला क्रिकेट में 150 टी20I में कप्तानी करने वाली पहली खिलाड़ी होंगी। मंधाना टी20I में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में सूजी बेट्स से आगे निकलने से सिर्फ 78 रन दूर हैं।

स्मृति मंधाना से हांगकांग के खिलाफ शानदार शतक लगाया था। शेफाली वर्मा ने भी अर्धशतक ठोका था। भारतीय ओपनर्स बेहतरीन फॉर्म में है। हालांकि मीडिल ऑर्डर का रन नहीं बनाना एक चिंता का विषय जरुर है। दूसरी तरफ पाकिस्तान की बल्लेबाजी भारतीय बैटिंग लाइनअप की तुलना में कमजोर है। थाईलैंड के खिलाफ पिछले मुकाबले में मुनीबा अली ने तेजी से रन बनाने की क्षमता दिखाई थी। उन्होंने अर्धशतक लगाया था। 

भारत और पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग-11 

भारत : 1 स्मृति मंधाना, 2 शैफाली वर्मा, 3 प्रतिका रावल, 4 हरमनप्रीत कौर (कप्तान), 5 ऋचा घोष (विकेटकीपर), 6 भारती फुलमाली, 7 दीप्ति शर्मा, 8 प्रेमा रावत, 9 क्रांति गौड़, 10 एन श्री चरणी, 11 नंदनी शर्मा। 

पाकिस्तान : 1 मुनीबा अली (विकेटकीपर), 2 शवाल जुल्फिकार, 3 गुल फिरोजा, 4 आयशा जफर, 5 सदफ शमास, 6 फातिमा सना (कप्तान), 7 उम्म-ए-हानी, 8 एयमान फातिमा, 9 तुबा हसन, 10 नशरा संधू, 11 सादिया इकबाल। 

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जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी का चेहरा एलिस वीडल कैसे बनीं:लेस्बियन होकर भी समलैंगिक शादी के खिलाफ, श्रीलंका में जन्मी प्रवासी विरोधी नेता की पार्टनर

जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन AfD की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD पार्टी की चीफ एलिस वीडेल खुद लेस्बियन हैं। उनकी शादी श्रीलंका में जन्मी एक महिला से हुई है। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडेल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडेल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? बचपन: नाजी अतीत वाले फैमिली में जन्म जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई और उन्हें जज बना दिया गया। उनका परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो उनका परिवार सिलेसिया से भागकर पश्चिमी जर्मनी आ गया। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। 1985 में जब वीडल के दादा की मौत हुई, तब वह सिर्फ छह साल की थीं। वीडल के मुताबिक, उनके दादा ने नाजी शासन के दौरान जो काम किए थे, उस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, “वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए वह कभी-कभी अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं।” स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनकी सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और इसके बाद जर्मनी लौट आईं। राजनीति में आने से पहले वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। उनका जन्म श्रीलंका में हुआ था और बचपन में एक स्विस परिवार ने उन्हें गोद ले लिया था। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई और 2009 से वे साथ रहने लगीं। आज वीडल और सारा स्विट्जरलैंड में अपने दो गोद लिए हुए बेटों के साथ रहती हैं। दोनों बच्चों की परवरिश साथ मिलकर करती हैं। सारा के मुताबिक वह खुद घर में पत्नी की जिम्मेदारियां निभाती हैं। दोनों ने अपने रिश्ते को काफी निजी रखा है और उनकी पहली मुलाकात कब और कहां हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई। राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गई थीं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की राजनीति, शरणार्थी बने बड़ा मुद्दा फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की राजनीति की दिशा बदल दी। सीरिया में 2011 से चल रहा गृहयुद्ध तब तक और ज्यादा हिंसक हो चुका था। अपनी जान बचाने के लिए सीरिया के लाखों लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। सिर्फ सीरिया ही नहीं, अफगानिस्तान, इराक और कुछ दूसरे देशों में युद्ध और हिंसा से परेशान लोग भी यूरोप की ओर बढ़ने लगे। कुछ ही महीनों में यूरोप पहुंचने वाले शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ गई और बड़ी संख्या में लोग जर्मनी पहुंचने लगे। शरणार्थी संकट AfD के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। यानी जो पार्टी शुरुआत में यूरो और आर्थिक मुद्दों को लेकर बनी थी, वह धीरे-धीरे प्रवासियों और शरणार्थियों के विरोध के लिए पहचानी जाने लगी। एक साल बाद 2016 में AfD ने अपना पहला घोषणापत्र जारी किया। इसमें समलैंगिता का विरोध भी जुड़ गया। पार्टी ने स्कूलों में सेक्स और यौन विविधता से जुड़ी शिक्षा का विरोध किया। विरोधाभास: लेस्बियन होकर भी समलैंगिक शादी के खिलाफ यहीं एलिस वीडेल और AfD को लेकर विरोधाभाष दिखता है। जो पार्टी प्रवासियों और समलैंगिक विवाह के खिलाफ है, उसी पार्टी की सबसे बड़ी नेता खुद एक समलैंगिक महिला हैं और एक अप्रवासी महिला के साथ परिवार चला रही हैं। जब वीडल से पूछा गया कि वह खुद लेस्बियन होने के बावजूद ऐसी पार्टी की नेता क्यों हैं, जो समलैंगिक अधिकारों का विरोध करती है, तो उनका जवाब था कि उनका लेस्बियन होना और AfD की नेता होना ही एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। वीडल का कहना है कि समलैंगिक लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा कुछ मुस्लिम गिरोहों से है। उनका तर्क है कि अगर जर्मनी दूसरे देशों से आने वाले लोगों की संख्या पर रोक लगाए और आव्रजन को सख्त करे, तो समलैंगिक लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी। यानी वीडल अपनी लेस्बियन पहचान को AfD से अलग नहीं देखतीं। वह इसी पहचान का हवाला देकर पार्टी की प्रवासियों को लेकर सख्त नीति का बचाव करती हैं। यही विरोधाभास उन्हें AfD का एक अलग तरह का चेहरा बनाता है। वीडल समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता देने के खिलाफ रही हैं। हालांकि, वह समलैंगिक जोड़ों को कानूनी पार्टनरशिप देने के पक्ष में हैं। इसका मतलब है कि शादी किए बिना भी दो लोगों के रिश्ते को कानून की मान्यता मिल जाए और उन्हें संपत्ति, मेडिकल फैसलों और कुछ आर्थिक या पारिवारिक मामलों में कानूनी अधिकार मिल सकें। जर्मनी की अगली चांसलर की रेस में 2013 में बनी AfD को उसी साल के चुनाव में 4.7% वोट मिले थे। अब हाल के सर्वे में पार्टी को करीब 27-28% वोट मिल रहे हैं। यानी करीब एक दशक में AfD का समर्थन कई गुना बढ़ गया है। पूर्वी जर्मनी में मजबूत पकड़: सैक्सोनी और थुरिंगिया जैसे राज्यों में AfD का मजबूत आधार है। हाल ही में सैक्सोनी-अनहाल्ट में पार्टी को करीब 44% वोट मिले, जो उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सरकार बनाने की होगी। जर्मनी की दूसरी बड़ी पार्टियां अब तक AfD के साथ गठबंधन करने से इनकार करती रही हैं। इसलिए सिर्फ सबसे ज्यादा वोट मिल जाना वीडल के चांसलर बनने के लिए काफी नहीं होगा। उन्हें सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन भी हासिल करना होगा। यही तय करेगा कि AfD की बढ़ती ताकत 2029 में एलिस वीडल को जर्मनी की चांसलर की कुर्सी तक पहुंचा पाती है या नहीं। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… जर्मनी में पहली बार कट्टरपंथी AfD पार्टी ने चुनाव जीता:यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों का दबदबा बढ़ा, फ्रांस में ले-पेन, ब्रिटेन में नाइजल फराज मजबूत पूर्वी जर्मनी के छोटे से राज्य सैक्सोनी-अनहाल्ट में रविवार को दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की। यूरोप में शायद पहली बार हुआ है जब किसी राज्य चुनाव के नतीजे को लोकतंत्र के भविष्य से इतना जोड़कर देखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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3 जीवनदान, 20वां अर्धशतक...भारत लगातार छठी बार महिला एशिया कप फाइनल में पहुंचा

India through to the final of the 2026 Women’s Asia Cup: महिला एशिया कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में भारत ने बांग्लादेश को 40 रनों से हराकर लगातार छठी बार फाइनल में जगह बनाई. शेफाली वर्मा के शानदार अर्धशतक (150 रन के लक्ष्य) और दीप्ति शर्मा के 3 विकेटों की बदौलत टीम इंडिया ने यह आसान जीत दर्ज की. इस मैच में एन. श्री चरणी ने एक कैलेंडर वर्ष में 35 टी20I विकेट लेकर पूनम यादव के रिकॉर्ड की बराबरी की. अब खिताबी मुकाबले में भारत का सामना श्रीलंका या पाकिस्तान से होगा. Thu, 10 Sep 2026 23:30:32 +0530

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