DK Shivakumar ने Ballari में BJP की रैली को दी अनुमति, अधिकारियों को दिए निर्देश
बेंगलुरु/बल्लारी, आठ सितंबर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह किसी को भी प्रदर्शन करने से नहीं रोकेंगे और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भाजपा को बल्लारी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज मैदान में 10 सितंबर को जनसभा आयोजित करने की अनुमति दें। विपक्षी भाजपा ने दावा किया कि सरकार ने दबाव में आकर अनुमति देने का फैसला किया है, जबकि शुरुआत में उसने प्रदर्शन को मंजूरी देने से इनकार कर पार्टी (भाजपा) को रोकने की कोशिश की थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इससे पहले कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार और विफलताओं के खिलाफ अपनी 10 दिवसीय पदयात्रा के समापन के अवसर पर मैदान में जनसभा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई थी।
प्राधिकारियों ने 2015 के एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के मैदान और इमारतें निजी संगठनों या संघों को सार्वजनिक या निजी कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों, बिक्री स्टॉल, मनोरंजन कार्यक्रमों और ऐसे अन्य आयोजनों के लिए उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं। भाजपा की ‘बल्लारी चलो’ पदयात्रा एक सितंबर को रायचूर जिले के लिंगसुगुर से शुरू हुई थी और इसका समापन 10 सितंबर को बल्लारी में होना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के नेतृत्व में निकाली जा रही इस पदयात्रा में पार्टी के कई नेता, विधायक, विधान परिषद सदस्य, प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष और कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘वे (भाजपा) आपको गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने (अधिकारियों से) कहा है कि वे जिस सबसे बड़े मैदान की मांग करें, वह उन्हें दिया जाए। मैंने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सड़कों पर कोई बाधा न हो, बस इतना ही।
मैं किसी को नहीं रोकूंगा।’’ बेंगलुरु में संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें सौ प्रेस वार्ताएं करने दें और सौ बयान तथा आरोप लगाने दें। वे जो भी आरोप लगाएं, सब झूठ है।
राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) खुद झूठ का पुलिंदा है। जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया कहा करते थे, झूठ उनका इष्ट देवता है। उन्हें जो करना है, करने दें।’’ सूत्रों के अनुसार, अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद शिवकुमार ने बल्लारी के उपायुक्त से बात की और उन्हें मंजूरी देने का निर्देश दिया।
सूत्रों ने बताया कि भाजपा ने अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दे को ‘‘बड़ा मुद्दा’’ बनाने का फैसला किया था और कांग्रेस सरकार को ‘‘अलोकतांत्रिक’’ तथा ‘‘असंवैधानिक’’ बताने के उद्देश्य से आंदोलन की योजना बनाई थी। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने शुरू में अधिकारियों पर अनुमति नहीं देने के लिए दबाव डाला था, लेकिन भाजपा के प्रयासों के चलते प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करके अनुमति देनी पड़ी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार के दबाव के बीच उपायुक्त असहाय नजर आ रहे थे।
सरकार का कहना था कि किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए-उन्हें जहां करना है, करें, अगर चाहें तो शहर के बाहर करें। राज्य सरकार की ओर से उपायुक्त पर ऐसा दबाव था, इसलिए हमारे कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी गई। हमने प्रशासन के इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान भी किया था।’’ विजयेंद्र ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा ने तय किया था कि यदि अनुमति नहीं दी गई तो वह उपायुक्त कार्यालय के सामने जनसभा करेगी।
उन्होंने कहा, “लेकिन हमें खुशी है कि हमारे दबाव के आगे झुकते हुए प्रशासन ने अनुमति दे दी। मैं राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं कि लोकतंत्र में इस तरह के प्रदर्शनों और आंदोलनों को दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पदयात्रा के रूप में हमारा आंदोलन वैध और शांतिपूर्ण है।
हम किसी तरह की हिंसा नहीं कर रहे हैं। इसे दबाने का कोई भी प्रयास अलोकतांत्रिक है और किसी को भी ऐसा नहीं करना चाहिए।’’ भाजपा ने 10 सितंबर को अपराह्न तीन बजे से रात आठ बजे तक मैदान में जनसभा आयोजित करने की अनुमति मांगी थी और प्राधिकारियों को बताया था कि इसमें 50,000 से अधिक लोगों एवं गणमान्य व्यक्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। बल्लारी जिला भाजपा अध्यक्ष अनिल कुमार मोका को सात सितंबर को भेजे गए एक पत्र में बल्लारी और विजयनगर जिलों के प्री-यूनिवर्सिटी शिक्षा विभाग के उप निदेशक ने 2015 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों के मैदानों और भवनों का ऐसे आयोजनों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देने के संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
पत्र में कहा गया कि निर्देशों का पालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित कॉलेज के प्राचार्य को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। पत्र में कहा गया था, “उपरोक्त के मद्देनजर, बल्लारी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज मैदान में 10 सितंबर को प्रस्तावित बड़ी जनसभा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए, आपके अनुरोध पर विचार नहीं किया जा सकता।
Kanker NIA Court ने 2015 के पुलिस मुठभेड़ मामले में 5 माओवादियों को सुनाई सजा
कांकेर, आठ सितंबर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने 2015 में भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी इलाके में पुलिस दल पर हुए माओवादी हमले के मामले में माओवादी दंपती समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि माओवादी दंपती पर क्रमशः 25 लाख रुपये और आठ लाख रुपये का इनाम है।
उन्होंने बताया कि कांकेर में एनआईए की विशेष न्यायाधीश विभा पांडेय की अदालत ने सोमवार को 2015 के भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी पर हुए पुलिस दल पर हमले के मामले में ‘स्पेशल जोनल कमेटी’ सदस्य प्रभाकर राव और उनकी पत्नी ‘डिविजनल कमेटी’ सदस्य राजे कांगे समेत पांच नक्सलियों को दोषी ठहराया। अधिकारियों ने बताया कि अन्य आरोपियों में श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार और रमेश कुमार कुमेटी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अदालत ने प्रभाकर और राजे को सात-सात वर्ष तथा अन्य नक्सलियों को पांच-पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाई।
उन्होंने बताया कि नक्सली प्रभाकर और राजे कांगे के खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण सहित विभिन्न थानों में कुल 64 और 36 मामले दर्ज हैं। उनके खिलाफ कई गंभीर नक्सली वारदातों में शामिल होने, थाना प्रभारी और गोपनीय सैनिक की हत्या एवं जनअदालत में हत्या जैसे मामले में शामिल होने के आरोप हैं। अधिकारियों ने बताया कि सात सितंबर, 2015 को कांकेर जिले के कोरेर थाना से 49 पुलिस कर्मियों को गश्त में रवाना किया गया था।
जब वह भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचे थे तब नक्सली प्रभाकर और राजे कांगे तथा लगभग आठ अन्य वर्दीधारी माओवादियों ने उनपर गोलीबारी कर दी। बाद में पुलिस दल ने जब जवाबी कार्रवाई की तब नक्सली वहां से फरार हो गए। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बाद में प्रभाकर, राजे कांगे तथा उन्हें सहयोग और संरक्षण देने के आरोप में श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार और रमेश कुमार कुमेटी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
अधिकारियों ने बताया कि अदालत ने सुनवाई के बाद 29 अगस्त 2026 को मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया था तथा सोमवार को आरोपियों को मामले में दोषी पाते हुए निर्धारित धाराओं के तहत सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को वैज्ञानिक तथा तकनीकी तरीके से सुरक्षित रखने और अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में कांकेर पुलिस ने विशेष सावधानी बरती। अधिकारियों ने बताया कि माओवादी प्रभाकर और राजे कांगे से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज/डिजिटल साक्ष्यों को साइबर प्रकोष्ठ, पुलिस मुख्यालय के तकनीकी सहयोग से आवश्यक प्रक्रिया के तहत जुटाया और संरक्षित किया गया।
इसके बाद उस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विधिवत अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया, जिसे अदालत ने साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया। इसी प्रकार, जांच के दौरान पुलिस द्वारा की गई विभिन्न कार्यवाहियों और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों को भी ई-साक्ष्य के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में संरक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप विवेचना संबंधी कार्यवाहियों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखते हुए उन्हें अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया।
अदालत द्वारा इन ई-साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक रूप से संरक्षित विवेचना संबंधी दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाना, कांकेर पुलिस की आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग, वैज्ञानिक विवेचना तथा साक्ष्य संकलन की बेहतर प्रक्रिया को दर्शाता है।
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