Senior Citizens की संख्या 2050 तक होगी दोगुनी, केंद्र सरकार तैयार कर रही स्वास्थ्य और देखभाल तंत्र
नयी दिल्ली, आठ सितंबर बुजुर्गों की तेजी से बढ़ती आबादी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती के साथ-साथ आर्थिक अवसर भी पेश कर रही है। सरकार बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य देखभाल, आवास, देखभाल सेवाओं और अन्य सहायता सुविधाओं का एक व्यापक तंत्र तैयार करने पर काम कर रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांशु पंत ने कहा कि आज देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा वरिष्ठ नागरिकों का है और उनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में देश में वरिष्ठ नागरिकों की अनुमानित आबादी करीब 16-17 करोड़ है। अगले 20-22 वर्ष में यह संख्या दोगुनी होने की संभावना है।’’ पंत ने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं और जीवन स्तर में सुधार के कारण जीवन प्रत्याशा में काफी वृद्धि हुई है और यह हर साल बढ़ रही है। ऐसे में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करना जरूरी हो गया है।
सचिव ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को हर साल पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए करीब 800 देखभाल गृह संचालित कर रहा है और ऐसे केंद्र संचालित करने के लिए राज्य सरकारों को भी सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि नीति में ‘डे केयर होम’ संचालित करने के प्रावधान को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों की ओर से वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन सभी सुविधाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय ने जीवन ऐप शुरू किया है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बड़े शहरों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की जरूरत बढ़ रही है।
इसी उद्देश्य से मंत्रालय ने शतायु डैशबोर्ड ऐप शुरू किया है, जो देखभाल की जरूरत रखने वाले बुजुर्गों और सेवा देने वाले देखभालकर्ताओं के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद करेगा। मंत्रालय के सचिव ने कहा कि जिन लोगों को देखभालकर्ता की जरूरत है, वे इस डैशबोर्ड के माध्यम से अपने क्षेत्र में उपलब्ध देखभालकर्ताओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उनके साथ व्यवस्था कर सकते हैं। बुजुर्गों की बढ़ती आबादी एक ओर जहां जनसांख्यिकीय चुनौती है, वहीं दूसरी ओर यह एक बड़ा आर्थिक अवसर भी पैदा कर रही है।
एएसएलआई-जेलएलएल की रिपोर्ट भारत की सिल्वर इकोनॉमी: सीमित क्षेत्र से जरूरी क्षेत्र तक के अनुसार, नीतिगत समर्थन मिलने पर भारत के वरिष्ठ नागरिकों की आवास सुविधाओं से संबंधित बाजार वर्ष 2030 तक 10.1 अरब अमेरिकी डॉलर का हो सकता है। इसके लिए करीब 7.7 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया (एएसएलआई) के अध्यक्ष राजगोपाल जी ने कहा, ‘‘भारत में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या अब भविष्य की बात नहीं रह गई है, बल्कि यह बदलाव हमारे सामने हो रहा है।
आज 60 वर्ष से अधिक आयु के भारतीयों की संख्या 16.6 करोड़ से अधिक है, जो 2050 तक दोगुनी होने का अनुमान है। ऐसे में हमें अभी से बुजुर्गों के लिए जरूरी तंत्र तैयार करना होगा।’’ जेलएलएल के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक करण सिंह सोढ़ी ने कहा कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या वर्तमान में 16.69 करोड़ है, जो वर्ष 2050 तक बढ़कर 34.6 करोड़ हो सकती है।
Swachh Vayu Survekshan में PM10 के कारण Indore दूसरे स्थान पर खिसका, Lucknow अव्वल
इंदौर, आठ सितंबर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में इंदौर के पहले पायदान से फिसलकर दूसरे स्थान पर आने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पीएम10 कणों को जिम्मेदार ठहराया है और इनके स्तर को घटाने के उपाय तेज करने की घोषणा की है। सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर को 200 में से 197 अंक मिले, जबकि लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। सर्वेक्षण में 195 अंकों के साथ जबलपुर तीसरे और 192-192 अंकों के साथ भोपाल तथा आगरा संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे।
वर्ष 2025 के सर्वेक्षण में 200 में से 200 अंक प्राप्त करके शीर्ष पायदान पर रहने वाला इंदौर इस बार लखनऊ से महज एक अंक से पिछड़ गया और यह तमगा बरकरार नहीं रख सका। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पीएम10 कणों के मानक में पिछड़ने के कारण सर्वेक्षण में हमें लखनऊ से एक अंक कम मिला है।” इंदौर, मध्यप्रदेश का सबसे ज्यादा वाहन घनत्व वाला शहर है। भार्गव ने कहा कि शहर में यातायात और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण, जिसमें पीएम10 कण शामिल हैं, को कम करने के लिए पूरे साल कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यातायात सिग्नल पर ‘रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ’ जैसी जन जागरूकता पहल, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और ई-बसों के संचालन पर तेजी से काम किया जाएगा। भार्गव ने कहा कि घर-घर से कचरा जमा करने वाली सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने और कारखानों को डीजल के बजाय सीएनजी जैसे हरित ईंधन पर स्थानांतरित करने के लिए भी ठोस प्रयास किए जाएंगे। पीएम10 (पार्टिकुलेट मैटर-10) हवा में मौजूद अति सूक्ष्म कण होते हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है।
ये कण वाहनों के धुएं, सड़कों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन से पैदा होते हैं और सांस के साथ मनुष्य के श्वसन तंत्र में चले जाते हैं। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के प्रमुख पैमानों में शहरी निकायों की ओर से पीएम10 के स्तर में कमी लाने के लिए किए जाने वाले उपाय शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ से महज एक अंक से पिछड़ने के बावजूद इंदौर की समग्र वायु गुणवत्ता का रिकॉर्ड मजबूत रहा है।
इंदौर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में पिछले वर्षों की तुलना में पीएम10 के स्तर में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और इस वर्ष पीएम10 का वार्षिक औसत लगभग 81 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों के तहत आवासीय, औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हवा में पीएम10 का वार्षिक औसत 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर निर्धारित किया गया है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की मूल्यांकन अवधि के दौरान इंदौर में 98 फीसदी से अधिक दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) औसतन 200 से नीचे बना रहा।
तय पैमाने के मुताबिक, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि धूल के नियंत्रण के लिए शहर में रोजाना लगभग 700 किलोमीटर लंबी सड़कों को मशीनों से बुहारा जा रहा है और निर्माण स्थलों के अपशिष्ट के निपटारे के लिए भी अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं। इंदौर राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार आठ बार अव्वल रहा है, जो शहरों की साफ-सफाई को लेकर केंद्र सरकार की एक अलग रैंकिंग स्पर्धा है।
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