कंधार की सुनहरी किशमिश पर संकट, पाकिस्तान की नाकेबंदी के बीच भारतीय व्यापारियों ने खोजा नया रास्ता
Afghanistan Dry Fruits Export: काबुल से मिली खबरों के अनुसार, जमीनी रास्तों के बंद होने, हवाई माल ढुलाई (एयर फ्रेट) महंगी होने और सीमित वैकल्पिक रास्तों की वजह से अफगान निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. उन्हें अपना सामान वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में संघर्ष करना पड़ रहा है.
कंधार पहुंचे भारतीय व्यापारी तलाश रहे नए रास्ते
टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, आसानी से इंपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए सूखे मेवे खरीदने कंधार गए भारतीय व्यापारियों का एक समूह अब वैकल्पिक रास्तों के जरिए अफगान सूखे मेवे नई दिल्ली एक्सपोर्ट करना चाहता है. रविवार की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंधार के किसानों ने बताया कि प्रांत की मशहूर सुनहरी किशमिश पहले भारत एक्सपोर्ट की जाती थी, लेकिन वह रास्ता अब बंद है.
कैसे तैयार होती है कंधार की 'गोल्डन' किशमिश?
'गोल्डन' किस्म की किशमिश को स्थानीय रूप से 'अब्जोश' किशमिश कहा जाता है. इसे 'आइटा' नाम के अंगूर से बनाया जाता है. सुनहरी किशमिश तैयार करने के लिए किसान अंगूरों को एक खास घोल में डुबोते हैं और फिर उन्हें सात दिनों तक तैयार जमीन पर फैलाकर रखते हैं.
एयर फ्रेट महंगा होने से बढ़ी व्यापारियों की चिंता
कंधार के ज्यादातर ताजे और सूखे मेवे पड़ोसी, अरब और यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट किए जाते हैं. हालांकि, हाल ही में एयर फ्रेट यानी हवाई माल ढुलाई की लागत बढ़ने से सूखे मेवे के व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. भारत के एक व्यापारी आनंद ने अफगान न्यूज वेबसाइट को बताया, "हम यहां तीन-चार दिनों से सूखे मेवे खरीद रहे हैं और फिर उन्हें दूसरे एशियाई देशों के जरिए नई दिल्ली भेजते हैं. अफगानिस्तान के साथ हमारा व्यापार ऐसा ही है."
चाबहार और दूसरे रास्तों का इस्तेमाल बढ़ा
सरकारी आंकड़ों से पहले ही पता चला था कि एक तरफ पाकिस्तान सीमा का बंद होना और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष अफगानिस्तान के वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं. अलग-अलग रिपोर्टों में ऐसे आंकड़े दिए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि अफगान व्यापारियों ने वैकल्पिक रास्तों के तौर पर ईरान के चाबहार पोर्ट, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होकर जाने वाले रेल कॉरिडोर और भारत के लिए एयर फ्रेट लिंक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. ये विकल्प व्यापार को जारी रखने में मदद करते हैं, लेकिन इनकी लागत ज्यादा होती है और इनमें भू-राजनीतिक जोखिम भी होते हैं.
भारत-अफगानिस्तान व्यापार 907.85 मिलियन डॉलर तक पहुंचा
भारत अफगानिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक बना हुआ है. पाकिस्तान द्वारा रास्ते बंद करने के बावजूद 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 907.85 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया. भारत मुख्य रूप से सूखे मेवे, केसर और मसाले इंपोर्ट करता है, जबकि दवाएं, मशीनरी और खाद्य उत्पाद एक्सपोर्ट करता है. हालांकि, अब पश्चिम एशिया में युद्ध और एयर फ्रेट की बढ़ती लागत ने व्यापारियों को और ज्यादा प्रभावित किया है.
पाकिस्तान के रास्ते व्यापार में लगातार आई गिरावट
पिछले साल पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष के हिंसक होने और डूरंड लाइन पर व्यापारिक रास्ते बंद होने से पहले ही इस्लामाबाद ने भारत से अफगानिस्तान आने वाले सामान के लिए रुकावटें पैदा कर दी थीं. ऐसे में पाकिस्तान की रुकावटों के बावजूद चाबहार पोर्ट और एयर कॉरिडोर के जरिए ही व्यापार जारी रह सका.
पाकिस्तान कस्टम्स के डेटा का हवाला देते हुए रिपोर्ट्स में कहा गया है कि काबुल की पिछली सरकारों के साथ इस्लामाबाद के तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद कंटेनर ट्रैफिक 2016-2017 में लगभग 60,500 कंटेनर से बढ़कर 2020-2021 में लगभग 89,000 कंटेनर हो गया था. यह तालिबान के सत्ता में लौटने से ठीक पहले की बात है.
2022-23 में 1 लाख से ज्यादा कंटेनर का ट्रैफिक
तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान के रास्ते होने वाले ट्रांजिट कार्गो में शुरू में सुधार हुआ. 2022-2023 में कंटेनर ट्रैफिक 102,886 तक पहुंच गया, जिसकी कीमत 6.7 अरब डॉलर थी. हालांकि, रिपोर्ट्स में आगे कहा गया है कि यह पीक यानी उच्चतम स्तर था. इसके बाद 2024-2025 में यह संख्या घटकर 42,959 कंटेनर रह गई, जिनकी कीमत 1.36 अरब डॉलर थी.
अक्टूबर 2025 में एक तीखी झड़प के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा बंद कर दी गई थी. कस्टम्स के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में यह संख्या घटकर सिर्फ 11,592 कंटेनर रह गई, जिनकी कीमत 367 मिलियन डॉलर थी.
पाकिस्तान के रास्ते अफगान निर्यात में भारी गिरावट
इन रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान के रास्ते भारत और अन्य देशों को होने वाला अफगानिस्तान का निर्यात 2024-2025 में 454 मिलियन डॉलर से घटकर 2025-2026 में सिर्फ 7 मिलियन डॉलर रह गया. ऐसे में अफगान व्यापारियों के लिए भारत तक सामान पहुंचाने के लिए चाबहार पोर्ट, रेल कॉरिडोर और एयर फ्रेट जैसे वैकल्पिक रास्तों की अहमियत बढ़ गई है.
इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन का मामला, मेटा इंडिया प्रमुख तलब
नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड को 9 सितंबर को अपने सामने पेश होने के लिए बुलाया है। यह मामला बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मटीरियल (सीएसईएएम) से कथित तौर पर जुड़े विज्ञापनों की जांच से संबंधित है।
कमीशन ने बीबीसी आई की एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया और 3 जुलाई, 2026 को मेटा प्लेटफॉर्म्स, इंक. को नोटिस जारी करके आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा। मेटा ने नोटिस मिलने के एक हफ्ते बाद अपना जवाब दिया।
उस जवाब की समीक्षा करने के बाद, एससीपीसीआर ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया। चल रही प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर, कमीशन ने अब मेटा इंडिया के एमडी और हेड को 9 सितंबर को पेश होने और आगे की जानकारी देने के लिए बुलाया है।
बीबीसी आई की जांच में आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटीरियल को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन चला रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा देखे गए विज्ञापनों में रेप वीडियो और चाइल्ड वीडियो जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था और यूजर्स को मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर मौजूद चैनलों पर भेजा गया था, जहां कथित तौर पर यह मटीरियल सिर्फ 99 रुपए में खरीदा जा सकता था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इंस्टाग्राम पर विज्ञापन तभी पब्लिश किए जाते हैं जब उन्हें प्लेटफॉर्म की मॉडरेशन टेक्नोलॉजी से मंजूरी मिल जाती है। जब बीबीसी ने इंस्टाग्राम को एक विज्ञापन के बारे में बताया, तो प्लेटफॉर्म ने कथित तौर पर एक दिन बाद जवाब दिया कि पोस्ट ने उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं किया है।
एनसीपीसीआर की जांच का मकसद इन आरोपों के पीछे की सच्चाई का पता लगाना और कमीशन को दिए गए मेटा के जवाब की पर्याप्तता की जांच करना है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली पुलिस को उन आरोपों की गहन जांच करने का निर्देश दिया है जिनमें कहा गया है कि भारत में इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के जरिए सीएसएएम (बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री) को बढ़ावा दिया गया। एनएचआरसी ने पुलिस से यह भी जांच करने को कहा है कि क्या मेटा और संबंधित संस्थाओं ने बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के तहत अपनी अनिवार्य रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियों को पूरा किया है या नहीं।
एनएचआरसी ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की उन रिपोर्टों पर संज्ञान लेने के बाद यह मामला उठाया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम विज्ञापनों में खास शब्दों का इस्तेमाल किया गया और यूजर्स को ऐसे चैनलों पर भेजा गया जहां कथित तौर पर ऐसी सामग्री बेची जा रही थी।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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