100 बार फरियाद का दावा, फिर खुद पर डीजल उड़ेला, जमीन विवाद में दिव्यांग हीरालाल ने प्रशासन पर लगाये गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश हैं कि कोई भी गरीब, पीड़ित, शोषित परेशान नहीं होना चाहिए, जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक या फिर सीधे किसी कार्यालय तक आने वाली शिकायत को दूर करना अफसरों की जिम्मेदारी है लेकिन आज नीमच कलेक्ट्रेट में घटे एक घटनाक्रम को देखने के बाद ऐसा लगता है कि या तो इस जिले के अफसर मुख्यमंत्री के आदेश को तबज्जो नहीं देते या फिर उन्हें उनके निर्देश सुनाई नहीं देते।
नीमच कलेक्ट्रेट के बाहर आज उस समय हड़कंप मच गया जब अपनी फ़रियाद लेकर आये बुजुर्ग पति पत्नी में से पति ने खुद पर डीजल उड़ेल लिया, कुछ अनहोनी हो पाती उससे पहले ही सुरक्षा कर्मियों ने ब्बुजुर्ग को पकड़ लिया और उसके हाथ से डीजल की केन और माचिस ले ली, खबर लगते ही जनसुनवाई कर रहे अफसर दौड़े दौड़े बाहर आये और उससे आवेदन लिया, जिसमें बुजुर्ग जोड़े ने जमीन विवाद के चलते उन्हें दी जा रही प्रताड़ना की कहानी लिखी थी।
नीमच कलेक्ट्रेट के बाहर से आई ये तस्वीर सिर्फ एक जमीन विवाद की कहानी नहीं, ये उस बेबसी की तस्वीर है, जहां फरियाद करते-करते एक दिव्यांग व्यक्ति खुद पर डीजल उड़ेलने तक पहुंच गया। कंजाड़ा के हीरालाल का आरोप है कि सर्वे नंबर 702 की उसकी जमीन को लेकर उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। उसका दावा है कि वह इस मामले को लेकर 100 से ज्यादा बार अधिकारियों के चक्कर लगा चुका है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
पहले भी डाला चुका घासलेट, कहा न्याय मिले नहीं तो यहाँ से लाश जाएगी
हीरालाल के मुताबिक, वह पहले भी अपने ऊपर घासलेट डाल चुका हैऔर अब एक बार फिर उसने अपने ऊपर डीजल डाल लिया । वीडियो में वह बेहद भावुक होकर कहता सुनाई दे रहा है कि उसकी जमीन का निराकरण किया जाए, वरना वह अपनी जान देने की बात तक कह रहा है। उसने अपर कलेक्टर पर गड़बड़ी करने और उसे परेशान करने के आरोप लगाये। रोते हुए हीरालाल का कहना है कि या तो उसे न्याय मिलेगा या फिर उसकी लाश यहाँ से जाएगी।
प्रशासन ने कहा जाँच चल रही है आज इनकी पेशी थी नहीं पहुंचे
प्रशासन की ओर से एसडीएम पराग जैन ने कहा कि मामले में एडीएम ने पहले ही जांच के आदेश दे दिए हैं और मनासा एसडीएम कोर्ट में सुनवाई चल रही है आज हीरालाल को वहां सुनवाई में उपस्थित होना था लेकिन वे वहां उपस्थित नहीं हुआ और यहाँ आ गए। एसडीएम ने कहा शिकायत के निराकरण के लिए विधिवत जांच, सुनवाई और आगे अपील की प्रक्रिया की होती है जिसका सबको पालन करना होता है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल
लेकिन अब सवाल ये है एक दिव्यांग फरियादी अगर पहले भी ऐसा कदम उठा चुका था और आज फिर खुद पर डीजल डालने की नौबत आ गई तो आखिर उसकी शिकायत के समाधान की वह कौन-सी कड़ी है, जहां बार-बार फरियाद अटक रही है?
जमीन का विवाद अपनी जगह है लेकिन किसी फरियादी का इस हद तक पहुंच जाना, व्यवस्था के लिए निश्चित तौर पर गंभीर चेतावनी है।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
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