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निक्की तंबोली करने जा रहीं मुस्लिम बॉयफ्रेंड अरबाज से शादी? बताया बच्चे किस धर्म को करेंगे फॉलो

Nikki Tamboli-Arbaz Patel: एक्ट्रेस निक्की तंबोली (Nikki Tamboli) और एक्टर अरबाज पटेल (Arbaz Patel) को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है. पिछले दिनों देखने को मिला था कि दोनों ने सोशल मीडिया पर एक दूसरे को अनफॉलो कर दिया था. जिसके बाद उनके ब्रेकअप को लेकर खबरें आने लगी थी. इस खबर के सामने आने के बाद दोनों के फैंस काफी दुखी हो गए थे. हालांकि, उन्होंने ये सब अपने वीडियो सॉन्ग की हाइप बढ़ाने के लिए किया था. जिसके बाद साफ हुआ कि दोनों का ब्रेकअप नहीं हुआ है. अब सोशल मीडिया पर कपल की शादी और बच्चों का धर्म क्या होगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं. 

बताया बच्चे किस धर्म को करेंगे फॉलो

हाल ही में निक्की तंबोली और अरबाज पटेल ने फिल्मी ज्ञान से खास बातचीत की है, इस दौरान कपल ने अपने रिलेशन और धर्म को लेकर खुलकर बात की. दरअसल, निक्की और अरबाज को एक ट्रोल का कमेंट बताया गया, जिस पर दोनों ने खुलकर जवाब दिया. कपल से पूछा गया कि निक्की और अरबाज के बच्चे कौन सा धर्म अपनाएंगे? इस पर निक्की ने करारा जवाब दिया. एक्ट्रेस ने कहा, 'आज कल आपको पता है ना कि सरकार ने बोला है कि मां का धर्म बच्चे फॉलो करेंगे. ये कानून अगस्त में ही लागू हो गया है. दोस्तों प्लीज थोड़ा ज्ञान लो और फिर बात करो.' ऐसे में उनके जवाब से साफ है अगर दोनों की शादी होती है तो उनके बच्चें हिंदू धर्म को ही फॉलो करेंगे. 

अरबाज पटेल ने सवाल का जवाब देने से किया परहेज

निक्की तंबोली ने अपने जवाब से तो ट्रोलर्स मुंह बंद कर दिया था. लेकिन अरबाज पटेल इस मुद्दे पर थोड़े बचते हुए नजर आए. उन्होंने कहा, 'देखों हम लोगों का इतना ही है कि हमें हिंदू मुस्लिम और धर्म में घुसना ही नहीं है. हमारे मुंह से कुछ निकले और फिर वो कुछ और बोले.' 

इसी के साथ अरबाज के जवाब से समझा सकता है कि वह इस टॉपिक पर बात करने से परहेज कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर उनके मुंह से कुछ ऐसा-वैसा निकल जाएगा, तो कॉन्ट्रोवर्सी हो सकती है. वहीं, निक्की ने इस पर कहा कि उनके मुंह से कुछ नहीं निकलेगा. उन्होंने कहा, 'हमारे मुंह से कुछ निकलेगा ही नहीं. हमारे लिए धर्म जरूरी नहीं है हमारे लिए इंसानियत जरूरी है.' 

'मोहब्बत बांटो तभी आपको प्यार मिलेगा'

वहीं, निक्की की बात को आगे बढ़ाते हुए अरबाज कहते है कि हमारे में बोलते हैं कि आपका ईमान आपके साथ है. आपके दिल दिमाग में है. उन्होंने कहा, 'हमारे में बोलते हैं कि आपका ईमान आपके साथ है. आपके दिल दिमाग में है. तुम कौन होते हो बोलने वाले सही और गलत. ऊपर वाला जानता है आपकी नीयत और आपके दिल के हाल. आप जिंदगी में मोहब्बत चाहते हो तो मोहब्बत बांटो. तभी आपको प्यार मिलेगा.'

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क्या शादी करने वाले हैं अरबाज और निक्की?

अरबाज और निक्की ने अभी तक शादी करने को लेकर किसी तरह की बात नहीं की है. हालांकि, उनकी बातों से समझा जा सकता है कि वह अपने इस रिश्ते को काफी इंपोर्टेंट मानते हैं और एक दूसरे प्यार करते हैं. ऐसे में अगर दोनों शादी करते हैं तो निक्की के मुताबिक, उनके बच्चे हिंदू धर्म को फॉलो करेंगे. वहीं, दूसरी तरफ अरबाज पटेल मानते हैं कि उनके लिए धर्म से ऊपर इंसानियत है. इसी के साथ सोशल मीडिया पर दोनों को लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई है.

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Uttarakhand Election 2027: देहरादून जिले में भाजपा ने लगाया था क्लीन स्वीप

Uttarakhand Election 2027: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सिर्फ प्रशासनिक केंद्र नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा जिला भी है. दरअसल, यहां पहाड़ी जिलों से अलग सियासी मिजाज शहरी और आधुनिक है. यहां ट्रैफिक, स्मार्ट सिटी, भू-कानून और रोजगार जैसे मुद्दे हर बार चुनावी बहस का केंद्र बनते हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आइए जानते हैं जिले की सभी सीटों का पूरा सियासी समी​करण.

देहरादून में मुस्लिम आबादी करीब 12 प्रतिशत

जनगणना 2011 के मुताबिक देहरादून जिले की कुल आबादी करीब 16 लाख 97 हजार है, जिसमें पुरुषों की हिस्सेदारी करीब 52.6 प्रतिशत (8 लाख 92 हजार) और महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 47.4 प्रतिशत (8 लाख 4 हजार) है. साक्षरता की बात करें तो यहां 84 प्रतिशत साक्षरता दर दर्ज की गई थी, जिसमें पुरुष साक्षरता लगभग 89 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 79 प्रतिशत थी. वहीं, धार्मिक आबादी की बात करें तो जिले में हिंदू आबादी करीब 84 प्रतिशत, मुस्लिम आबादी करीब 12 प्रतिशत और सिख समुदाय करीब 2 प्रतिशत है. इसके अलावा ईसाई, बौद्ध और जैन समुदाय की भी सक्रिय मौजूदगी है. 

देहरादून जिले में 10 विधानसभा सीटें, जिसमें से 2 आरक्षित

देहरादून जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं चकराता, विकासनगर, सहसपुर, धर्मपुर, रायपुर, राजपुर रोड, देहरादून कैंट, मसूरी, डोईवाला और ऋषिकेश. बता दें इनमें से चकराता सीट अनुसूचित जनजाति (जौनसारी समुदाय) के लिए और राजपुर रोड सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. बाकी आठों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं.

देहरादून जिले में भाजपा ने लगाया था क्लीन स्वीप

चुनाव आयोग के डेटा पर नजर डालें तो यहां 2022 के विधानसभा चुनाव में देहरादून जिले की दसों सीटों में से नौ पर भाजपा ने कब्जा जमाया था.वहीं, एक सीट कांग्रेस का उम्मीदवार विजयी रहा था. आइए आपको हर सीट के बारे में बताते हैं.

देहरादून कैंट सीट पर बीजेपी ने सविता कपूर को उतारा था. बता दें वे दिवंगत विधायक हरबंस कपूर की पत्नी हैं. बीजेपी की परंपरागत सीट और लोगों की सहानुभूति के चलते सविता ने वि​जय दर्ज की. बता दें उन्होंने कांग्रेस के सूर्यकांत धस्माना को करीब 21 हजार वोटों से हराया था.

धर्मपुर विधानसभा सीट की बात करें तो यहां भाजपा के विनोद चमोली ने कांग्रेस के दिनेश अग्रवाल को करीब 10 हजार वोटों से मात दी थी.

रायपुर सीट पर भाजपा के उमेश शर्मा 'काऊ' ने कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट को करीब 30 हजार वोटों के भारी अंतर से हराया था.

राजपुर रोड (सुरक्षित) सीट पर भाजपा के खजान दास ने कांग्रेस के राजकुमार को करीब 11 हजार वोटों से पराजित किया था.

मसूरी सीट से कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी कांग्रेस की गोदावरी थपलियाल को हराकर विधानसभा पहुंचे. 

डोईवाला सीट पर भाजपा के बृजभूषण गैरोला ने कांग्रेस के गौरव चौधरी को करीब 29 हजार वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी.

ऋषिकेश सीट पर भाजपा के प्रेमचंद अग्रवाल ने कांग्रेस के जयेंद्र चंद रमोला को करीब 19 हजार वोटों से हराया था. बता दें वह पिछले चुनाव में यहां से तीसरी बार जीते थे. 

सहसपुर सीट पर भाजपा के सहदेव सिंह पुंडीर ने कांग्रेस के आर्येंद्र शर्मा को करीब साढ़े आठ हजार वोटों से हराया था.

विकासनगर में भाजपा के मुन्ना सिंह चौहान ने कांग्रेस के नवप्रभात को महज पांच हजार वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी.

चकराता (सुरक्षित) सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने भाजपा के रामशरण नौटियाल को करीब साढ़े नौ हजार वोटों से हराया था. 

देहरादून के शहरी इलाकों में भाजपा का दबदबा, चकराता में कांग्रेस मजबूत 

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही देहरादून जिले की शहरी सीटों पर भाजपा की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक  देहरादून कैंट सीट तो लंबे समय तक हरबंस कपूर का पर्याय बन चुकी थी, जो यहां से कई बार लगातार जीतते रहे हैं. उधर, मसूरी और ऋषिकेश जैसी सीटों पर भी भाजपा का प्रभाव लगातार बना रहा है.

ये सीट रही है कांग्रेस का गढ़ जाति और स्थानीय मुद्दे तय करते हैं नतीजे  

एक रिपोर्ट के मुताबिक चकराता सीट जहां जौनसार जाति के लोग अधिक रहते हैं दशकों से कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है. बता दें यहां आदिवासी जौनसारी समुदाय का प्रभुत्व है और प्रीतम सिंह सरीखे नेता यहां से बार-बार जीतते आए हैं. राजनीतिक जानकारों की मानें तो राज्य में किसी भी दल की लहर रही हो विकासनगर और सहसपुर जैसी पछवादून की सीटों पर मुकाबला अक्सर कड़ा रहा है. यहां जाति और स्थानीय मुद्दे नतीजे तय करते हैं. 

देहरादून जिले की विधानसभा में अब क्या हैं मौजूदा हालात?

2027 के चुनाव से पहले देहरादून में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम तेजी से चल रहा है. हाल की रिपोर्टों के मुताबिक जिले में करीब साढ़े 15 लाख से ज्यादा मतदाता दर्ज हैं और मतदाता सूची में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं. दिलचस्प यह है कि मतदाता संख्या के लिहाज से रायपुर सीट अब जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीट बन गई है जबकि राजपुर रोड और देहरादून कैंट अपेक्षाकृत छोटी सीटें रह गई हैं. वहीं, राजनीतिक तौर पर भाजपा शहरी विकास कार्यों और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को आधार बनाकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, जबकि कांग्रेस बेरोजगारी, बढ़ते जमीन के दामों और भू-कानून जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है. चकराता में कांग्रेस की पकड़ बरकरार रहने की उम्मीद जताई जा रही है जबकि बाकी सीटों पर पार्टी अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है.

किस सीट पर क्या जातीय समीकरण, जानें डिटेल

- चकराता (सुरक्षित) सीट पर जौनसारी जनजाति समुदाय का दबदबा, यही समुदाय यहां हार-जीत तय करता है.

- विकासनगर व सहसपुर सीट पर गढ़वाली राजपूत-ब्राह्मण समाज के साथ पंजाबी और गुर्जर समुदाय भी असरदार हैं.

- राजपुर रोड (सुरक्षित) सीट पर दलित मतदाता निर्णायक हैं, साथ ही यहां पंजाबी-सिख और ब्राह्मण समाज की भी बड़ी मौजूदगी है.

- देहरादून कैंट सीट पर पंजाबी, सिंधी और कायस्थ समेत शहरी मध्यवर्गीय मतदाता निर्णायक हैं.

- धर्मपुर व रायपुर  सीट पर सरकारी कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी और प्रवासी आबादी हार-जीत का अंतर तय करती है. 

- मसूरी सीट पर मुस्लिम, ईसाई और गढ़वाली राजपूत समुदाय का मिलाजुला प्रभाव रहता है.

- डोईवाला सीट पर सिख-पंजाबी किसान वर्ग और गुर्जर समुदाय के साथ पहाड़ों से आए प्रवासी मतदाता अहम हार जीत पर अहम रोल निभाते हैं.

- ऋषिकेश सीट पर ब्राह्मण, पंजाबी और तीर्थाटन से जुड़े व्यापारी वर्ग के साथ बाहरी राज्यों से आई आबादी वोट पर असरदार है.

FAQ

Q. देहरादून जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A. देहरादून जिले में कुल दस विधानसभा सीटें हैं, जिनके नाम हैं चकराता, विकासनगर, सहसपुर, धर्मपुर, रायपुर, राजपुर रोड, देहरादून कैंट, मसूरी, डोईवाला और ऋषिकेश.

Q. इनमें से कौन-सी सीटें आरक्षित हैं?
A. चकराता सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए और राजपुर रोड सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है. बाकी आठ सीटें सामान्य श्रेणी की हैं.

Q. 2022 चुनाव में देहरादून जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
A. भाजपा को नौ सीटें मिलीं जबकि सिर्फ चकराता सीट कांग्रेस के खाते में गई थीं.

Q. देहरादून जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A. जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 84 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 12 प्रतिशत है. इसके अलावा सिख समुदाय की आबादी भी करीब 2 प्रतिशत है.

Q. जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
A. शहरी सीटों पर भाजपा का दबदबा लगातार बना रहा है, खासकर देहरादून कैंट, मसूरी और ऋषिकेश जैसी सीटों पर इसका प्रभाव है. वहीं चकराता सीट दशकों से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है.

Q. 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
A. मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है और रायपुर सीट अब जिले की सबसे बड़ी सीट बन गई है.

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