सौभाग्य योजना से यूपी में रोशन हुए लाखों घर, देश में सबसे आगे रहा उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश ने हर घर तक बिजली पहुंचाने की मुहिम में देश के बाकी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए बड़ी उपलब्धि दर्ज की है. प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना यानी सौभाग्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 91.8 लाख से ज्यादा घरों को बिजली कनेक्शन दिया गया. यह संख्या देश के किसी भी अन्य राज्य से अधिक है. योजना के तहत देशभर में कुल 2.86 करोड़ से ज्यादा घरों को बिजली से जोड़ा गया था.
2017 में शुरू हुई थी सौभाग्य योजना
सौभाग्य योजना की शुरुआत 2017 में ऐसे परिवारों तक बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी, जो अब तक बिजली कनेक्शन से वंचित थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2017 को इस योजना की घोषणा की थी. शुरुआती लक्ष्य दिसंबर 2018 तक निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में मार्च 2019 तक बढ़ाया गया.
योजना का मकसद देश में बिजली की पहुंच से छूटे परिवारों को अंतिम छोर तक कनेक्शन उपलब्ध कराना था. खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण मानी गई.
कितना था योजना का बजट?
सौभाग्य योजना के लिए केंद्र सरकार ने 16,320 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था. योजना के तहत 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना यानी SECC के आधार पर चिन्हित गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का प्रावधान था.
वहीं, अन्य इच्छुक परिवारों के लिए कनेक्शन की लागत 500 रुपये रखी गई थी. इस राशि को किस्तों में चुकाने की सुविधा भी दी गई थी.
कनेक्शन के साथ मिलीं ये सुविधाएं
सिर्फ बिजली का कनेक्शन देना ही योजना का उद्देश्य नहीं था. प्रत्येक कनेक्शन के साथ नजदीकी बिजली पोल से सर्विस केबल, एनर्जी मीटर, एलईडी बल्ब, एक लाइट प्वाइंट की वायरिंग और मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट जैसी सुविधाएं भी शामिल थीं.
इससे बिजली से वंचित परिवारों को अपने घरों में रोशनी के साथ रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों के लिए भी सुविधा मिली.
यूपी ने सबसे ज्यादा घरों को जोड़ा
सौभाग्य योजना के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे प्रमुख रहा. राज्य में 91.8 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन दिए गए. यह संख्या बिहार में दिए गए करीब 32.6 लाख, ओडिशा के 24.5 लाख और असम के 23.3 लाख कनेक्शनों से काफी अधिक रही.
योजना शुरू होने के समय उत्तर प्रदेश में बिजली कनेक्शन से वंचित परिवारों की संख्या देश में सबसे ज्यादा थी. ऐसे में राज्य में इतने बड़े पैमाने पर कनेक्शन पहुंचना चुनौती के आकार और अभियान की गति, दोनों को दर्शाता है.
2022 में औपचारिक रूप से बंद हुई योजना
सरकार के अनुसार मार्च 2019 तक चिन्हित सभी इच्छुक बिजली-विहीन परिवारों को कनेक्शन दिया जा चुका था. हालांकि, कुछ परिवारों ने शुरुआत में कनेक्शन लेने से इनकार किया था. बाद में इच्छा जताने वाले ऐसे परिवारों को भी सात राज्यों में जोड़ा गया, जिनमें उत्तर प्रदेश शामिल था.
सौभाग्य योजना 31 मार्च 2022 को औपचारिक रूप से बंद हुई. उस समय तक देश में कुल 2.86 करोड़ से ज्यादा परिवारों को बिजली से जोड़ा जा चुका था. योजना के तहत 14,082 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हुईं और 6,305 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान जारी किया गया.
बिजली कनेक्शन ने बदली तस्वीर
सौभाग्य योजना का असर सिर्फ घरों में रोशनी पहुंचाने तक सीमित नहीं रहा. बिजली कनेक्शन ने ग्रामीण और कमजोर परिवारों के लिए पढ़ाई, मोबाइल चार्जिंग और घरेलू जरूरतों को आसान बनाने में भी भूमिका निभाई. उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में घरों तक बिजली पहुंचना राज्य के विद्युतीकरण अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जा सकता है.
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