Relationship Tips: हर दूरी बाउंड्री नहीं होती! इन 5 आदतों से कहीं आप रिश्तों से बच तो नहीं रहे?
Relationship Tips: रिश्तों में अपनी सीमाएं तय करना जरूरी है, लेकिन हर बार बातचीत से बचना या लोगों को खुद से दूर कर लेना बाउंड्री नहीं कहलाता। कई बार हम अपनी भावनात्मक असहजता और मुश्किल बातचीत से बचने के लिए भी इसे ‘पर्सनल स्पेस’ का नाम दे देते हैं। अगर आप भी किसी रिश्ते में बार-बार ऐसा करते हैं, तो इन 5 आदतों पर एक बार जरूर गौर करें।
1. गुस्सा होने पर पूरी तरह बात बंद कर देना
किसी बहस के बाद थोड़ी देर का ब्रेक लेना गलत नहीं है। इससे व्यक्ति खुद को शांत कर सकता है और बाद में स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।
लेकिन अगर हर विवाद के बाद कई दिनों तक बात न की जाए या सामने वाले को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाए, तो यह बाउंड्री से ज्यादा समस्या से बचने का तरीका हो सकता है।
2. ‘मैं किसी को जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हूं’
हर व्यक्ति को अपनी प्राइवेसी रखने का पूरा अधिकार है। आपको अपनी जिंदगी की हर बात किसी के साथ साझा करना जरूरी नहीं है।
करीबी रिश्तों में अचानक दूरी बना लेना, बार-बार प्लान कैंसिल करना सामने वाले को उलझन में डाल सकता है। ऐसे में सही तरीके से अपनी बात रखना बेहतर होता है।
3. ‘मुझे इमोशनल बातें पसंद नहीं’
हर व्यक्ति अपनी भावनाओं को अलग तरीके से व्यक्त करता है। कुछ लोग खुलकर बात कर लेते हैं, जबकि कुछ को अपनी भावनाएं शब्दों में बताने में समय लगता है।
लेकिन अगर हर गंभीर बातचीत से बचने के लिए खुद को ‘इमोशनल इंसान नहीं हूं’ कहकर बात टाल दी जाए, तो इससे रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है।
4. हर परेशानी के बाद रिश्ता खत्म कर देना
अपनी मानसिक शांति के लिए किसी रिश्ते से दूरी बनाना कई बार जरूरी हो सकता है। लेकिन हर बहस या छोटी निराशा पर रिश्ता खत्म कर देना सही नहीं होता।
ऐसा कदम उठाने से पहले खुद से पूछें कि क्या सामने वाले ने सच में कोई सीमा पार की है या सिर्फ उसकी किसी बात से आपको बुरा लगा है। अगर समस्या बातचीत से सुलझ सकती है, तो अपनी बात रखना बेहतर हो सकता है।
5. ‘मुझे किसी की जरूरत नहीं’
इंडिपेंडेंट रहना अच्छी बात है। अपनी जिंदगी, फैसलों और समय पर खुद का नियंत्रण होना एक हैल्दी रिश्ते की पहचान हो सकता है। लेकिन अगर अपनी परेशानियां किसी से साझा न करना और भावनात्मक रूप से लोगों से दूरी बनाए रखना है।
तो खुद को भावनात्मक रूप से बचाने की कोशिश हो सकती है। इंडिपेंडेंट रहते हुए भी किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अपनी जिंदगी में जगह दी जा सकती है।
बाउंड्री और अवोइडेंस में क्या फर्क है?
बाउंड्री का मतलब है अपनी जरूरतों और भावनाओं को स्पष्ट तरीके से बताना। वहीं, अवोइडेंस में व्यक्ति असहज बातचीत, टकराव या भावनाओं का सामना करने के बजाय उनसे बचने लगता है।
रिश्तों में बाउंड्री बनाना जरूरी है, लेकिन हर दूरी को बाउंड्री का नाम देना सही नहीं। कभी-कभी खुद से यह पूछना भी जरूरी होता है कि हम किसी मुश्किल बातचीत से बचने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं। यही सवाल रिश्तों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।
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