शेयर बाजार में आज दहाड़ रहे हैं डिफेंस कंपनियों के स्टॉक, 1.10 लाख करोड़ रुपये अप्रवूल का असर
Defence Stocks: आज मंगलवार का दिन डिफेंस कंपनियों के लिए शानदार रहा है। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स में भी आज उछाल देखने को मिली है।
Hartalika Teej 2026: साड़ी, चूड़ी, सिंदूर… तीज पर मायके से क्यों आता है सुहाग का सामान? जानें वजह
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज आते ही विवाहित महिलाओं के श्रृंगार और व्रत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस त्योहार से जुड़ी एक ऐसी परंपरा भी है, जो सीधे बेटी और उसके मायके के रिश्ते से जुड़ी है। कई घरों में तीज पर मायके से बेटी के लिए साड़ी, चूड़ी, सिंदूर, मेहंदी, मिठाई और अन्य सुहाग की सामग्री भेजी जाती है। आखिर इस रस्म की शुरुआत क्यों हुई और इसे इतना खास क्यों माना जाता है?
हरतालिका तीज पर मायके से क्यों आता है सुहाग का सामान?
हरतालिका तीज को आमतौर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, व्रत और सुहाग की कामना से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इस पर्व का एक खूबसूरत सामाजिक और पारिवारिक पक्ष भी है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में तीज के अवसर पर शादीशुदा बेटियों के मायके से उनके लिए कपड़े, श्रृंगार सामग्री और मिठाई भेजने की परंपरा है। कई जगह इसे ‘सिंधारा’ कहा जाता है, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसके नाम और रस्मों में अंतर भी देखने को मिलता है।
इस परंपरा के पीछे सबसे बड़ा भाव बेटी के प्रति माता-पिता का स्नेह, आशीर्वाद और अपनापन माना जाता है। शादी के बाद बेटी भले ही दूसरे घर चली जाए, लेकिन त्योहार के बहाने मायके का यह स्नेह उसके साथ बना रहता है।
साड़ी, चूड़ी और सिंदूर का क्या है महत्व?
तीज के अवसर पर भेजे जाने वाले सामान में सुहाग से जुड़ी चीजों को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि इनके महत्व और रस्में अलग-अलग परिवारों तथा क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं।
साड़ी को त्योहार के अवसर पर बेटी के लिए नए वस्त्र और सम्मान के भाव से जोड़ा जाता है। मायके से आई साड़ी पहनकर महिला तीज की पूजा और उत्सव की तैयारियां करती है। चूड़ियां महिलाओं के श्रृंगार का अहम हिस्सा हैं। तीज के मौके पर नई चूड़ियां पहनने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है।
सिंदूर और बिंदी विवाहित महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार से जुड़े हैं। वहीं मेहंदी तीज के उत्सव और श्रृंगार को पूरा करती है। हाथों पर मेहंदी लगाना कई क्षेत्रों में तीज की खास रस्मों में शामिल है। इन चीजों के साथ मिठाई, फल और अन्य उपयोगी सामान भी बेटी के लिए भेजे जाते हैं।
सिर्फ सुहाग की रस्म नहीं, बेटी के लिए मायके का प्यार भी
मायके से भेजा जाने वाला यह सामान केवल धार्मिक परंपरा के तौर पर नहीं देखा जाता। इसके साथ एक भावनात्मक पहलू भी जुड़ा हुआ है। शादी के बाद जब बेटी अपने ससुराल में रहती है, तब तीज जैसे त्योहार उसे मायके से जोड़ने का अवसर देते हैं। माता-पिता अपनी बेटी के लिए उसकी पसंद का सामान भेजकर यह जताते हैं कि त्योहार के मौके पर भी उनका स्नेह और आशीर्वाद उसके साथ है। यही वजह है कि कई परिवारों में सिंधारा भेजने की रस्म आज भी उत्साह के साथ निभाई जाती है।
शिव-पार्वती से जुड़ी है हरतालिका तीज की मान्यता
धार्मिक परंपरा के अनुसार, हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने की कथा से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी कथा के आधार पर हरतालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
विवाहित महिलाएं इस व्रत को अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना से जोड़ती हैं। वहीं, अविवाहित युवतियों के बीच भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से इस व्रत को करने की परंपरा प्रचलित है। ये धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनका पालन अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार किया जाता है।
2026 में कब है हरतालिका तीज?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
इस बार सोमवार को तीज पड़ने के कारण भी पर्व को लेकर खास चर्चा है। हालांकि पूजा और व्रत की स्थानीय परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने क्षेत्र में मान्य पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
बदलते समय में भी कायम है मायके की यह परंपरा
आज त्योहार मनाने के तरीके काफी बदल गए हैं। ऑनलाइन खरीदारी और बदलती जीवनशैली के बीच भी तीज पर मायके से बेटी के लिए सामान भेजने की परंपरा कई परिवारों में कायम है।
साड़ी, चूड़ी, सिंदूर और मेहंदी जैसी चीजें इस रस्म का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा सबसे बड़ा संदेश बेटी के लिए मायके का प्यार और आशीर्वाद है। यही भाव इस परंपरा को आज भी खास बनाता है।
नोट: हरतालिका तीज की तिथि, पूजा के समय और परंपराओं में क्षेत्र व पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। धार्मिक महत्व से जुड़े विवरण लोक-परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Hindustan
Haribhoomi






