अच्छे ड्राइवरों का कम होगा इंश्योरेंस प्रीमियम? मिलेगा इनाम! मोदी सरकार का नया प्लान
Driving License Point System: सड़क पर लापरवाही बरतना अब सीधे आपके ड्राइविंग लाइसेंस पर भारी पड़ सकती है. दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए एक नया सिस्टम लाने की योजना बनाई है. ये सिस्टम क्रेडिट स्कोर की तरह काम करेगा. यानी अच्छी ड्राइविंग करने वालों को इसका फायदा मिलेगा और बार-बार नियम तोड़ने पर चालक का लाइसेंस खतरे में पड़ सकता है. आइए विस्तार से इस नए सिस्टम के बारे में समझने का प्रयास करते हैं.
गडकरी ने यह ऐलान कहां और कब किया?
यह जानकारी नितिन गडकरी ने दिल्ली में आयोजित सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी SIAM के 66वें सालाना सम्मेलन में दी है. उन्होंने बताया कि मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए एक ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम पर काम कर रहा है. इसका मकसद उन चालकों की पहचान करना है जो लगातार यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं.
नया पॉइंट सिस्टम काम कैसे करेगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर बार ट्रैफिक नियम तोड़ने पर चालक के लाइसेंस से निगेटिव पॉइंट काटे जाएंगे. जैसे ही यह पॉइंट एक तय सीमा से नीचे गिरेगा, लाइसेंस को सस्पेंड या पूरी तरह रद्द भी किया जा सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो अब हर उल्लंघन सिर्फ चालान भरकर खत्म नहीं होगा बल्कि उसका रिकॉर्ड सीधे आपके लाइसेंस से जुड़ जाएगा.
????India is considering a graded points system for driving licences under which repeat traffic offenders could face suspension or cancellation of their licences. pic.twitter.com/E4gG74Tbx8
— Indian Infra Report (@Indianinfoguide) September 5, 2026
क्या सिर्फ सजा ही मिलेगी, या कोई फायदा भी होगा?
जानकारी के अनुसार गडकरी ने साफ किया कि यह सिस्टम सिर्फ सख्ती के लिए नहीं है. जो चालक लंबे समय तक जिम्मेदारी से गाड़ी चलाएंगे और नियमों का पालन करेंगे उन्हें अच्छे पॉइंट और कुछ खास सुविधाएं भी दी जा सकती हैं. इसे कुछ हद तक बैंकिंग सेक्टर के क्रेडिट स्कोर जैसा मॉडल कहा जा सकता है जहां अच्छे व्यवहार का सीधा फायदा मिलता है.
अच्छे ड्राइवरों को असल में क्या फायदा होगा?
गडकरी के मुताबिक साफ-सुथरे ड्राइविंग रिकॉर्ड वाले लोगों को बीमा कंपनियों की तरफ से भी प्रोत्साहन मिल सकता है. इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में सुरक्षित ड्राइविंग का असर बीमा प्रीमियम पर भी दिख सकता है. यानी कम प्रीमियम या अतिरिक्त छूट जैसे फायदे संभव हैं. यह कदम लोगों को नियम तोड़ने से रोकने के साथ-साथ जिम्मेदार ड्राइविंग को बढ़ावा देने की कोशिश भी है.
इस कदम के पीछे सरकार की मंशा क्या है?
गडकरी का कहना है कि भारत में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने में चालकों का व्यवहार सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. इसी वजह से मंत्रालय चाहता है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन सीधे लाइसेंस के रिकॉर्ड से जुड़े ताकि बार-बार गलती दोहराने वालों पर नजर रखी जा सके और उन्हें अपने व्यवहार में बदलाव लाने के लिए मजबूर किया जा सके.
केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए Bharat NCAP 2.0 लाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, नए कार्यक्रम को अक्टूबर 2027 से लागू करने की योजना है।
— PB-SHABD (@PBSHABD) September 4, 2026
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क्या ड्राइवर ट्रेनिंग को लेकर भी कोई कदम उठाया जा रहा है?
जनवरी 2025 में शुरू हुई नीति के तहत देशभर में करीब 1,600 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर बनाने की योजना है. गडकरी के अनुसार अब तक करीब 10 लाख चालकों को इन केंद्रों के जरिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है. बता दें फिलहाल ये नया प्रस्ताव विचार-विमर्श के चरण में है. गडकरी ने SIAM सम्मेलन में इसकी रूपरेखा साझा की है लेकिन इसे औपचारिक रूप से लागू करने की तारीख या पूरी नियमावली सामने नहीं आई है.
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पहले 180 दिन रखेंगे पूरे जीवन की नींव, जानिए क्यों जरूरी है बच्चों के लिए सही पोषण
नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। बच्चे के जीवन की शुरुआत जितनी नाजुक होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण भी। जन्म के बाद के शुरुआती दिन और खासकर पहले छह महीने बच्चे के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। यही वह समय होता है जब बच्चे को सही पोषण, प्यार और देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। बच्चे के जीवन के पहले 180 दिन, यानी पहले छह महीने, उसके पूरे जीवन पर गहरा असर डाल सकते हैं।
पहले छह महीनों में मां का दूध बच्चे के लिए सबसे महत्वपूर्ण और अनमोल पोषण माना जाता है। इसमें बच्चे की जरूरत के मुताबिक पोषक तत्व होते हैं, जो उसके शारीरिक विकास और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। जन्म के बाद मां का पहला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, भी बच्चे के लिए बेहद अहम होता है। यह गाढ़ा और पीले रंग का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और नवजात को शुरुआती सुरक्षा देने में मदद करता है।
शिशु के जीवन के पहले छह महीने तक सिर्फ स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है। इस दौरान सामान्य तौर पर बच्चे को पानी, शहद या अन्य खाद्य पदार्थ देने की जरूरत नहीं होती। मां का दूध ही बच्चे के लिए पोषण और तरल की जरूरत पूरी करने में मदद करता है।
स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। बच्चे को मां की गोद में मिलने वाला स्पर्श और अपनापन उसके भावनात्मक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
जब बच्चा छह महीने का हो जाता है, तो उसकी बढ़ती पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्तनपान के साथ पौष्टिक पूरक आहार शुरू किया जाता है। बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार नरम, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन धीरे-धीरे उसकी डाइट में शामिल किया जा सकता है। इस दौरान स्तनपान जारी रखना भी महत्वपूर्ण है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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