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'हर चीज़ की एक सीमा होती है... सारा फंड कहाँ जा रहा है?' सिविक कामों में लापरवाही पर दिल्ली CM रेखा गुप्ता का कड़ा रुख

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में 50 साल पुरानी इमारत ढहने के दर्दनाक हादसे के बाद जहाँ एक तरफ राहत और बचाव कार्य जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मुख्यमंत्री नागरिक (सिविक) कार्यों में देरी और लापरवाही को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को जमकर फटकार लगाती नज़र आ रही हैं।

हालांकि वीडियो की सटीक पृष्ठभूमि और इसके सत्य निकेतन हादसे से सीधे जुड़ाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आम जनता और सोशल मीडिया यूज़र्स इसे प्रशासनिक ढिलाई पर मुख्यमंत्री की सख्त प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं। एक वीडियो में गुस्से में मुख्यमंत्री को यह कहते हुए सुना गया, "हर चीज़ की एक सीमा होती है। मैं पिछले दो सालों से आपको 800 करोड़ रुपये का फंड दे रही हूं। सारा फंड कहां जा रहा है? क्या यह पैसा आपकी जेब में जा रहा है?"

हालांकि बातचीत से यह साफ नहीं हुआ कि गुप्ता को किस बात पर गुस्सा आया, लेकिन ऐसा लग रहा था कि वह किसी इलाके में कुछ स्लैब ठीक करने के काम से नाखुश थीं। इसी वजह से उन्होंने दो अधिकारियों को फटकार लगाई। जब उनमें से एक ने सभी स्लैब ठीक करने के लिए एक हफ़्ते का और समय मांगा, तो उन्होंने उन्हें और भी ज़्यादा फटकार लगाई और कहा कि वह इस तरह की समस्या को हल करने के लिए और समय नहीं दे सकतीं। यह वीडियो जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई यूज़र्स ने जनसेवा के प्रति उनके सख्त रवैये की तारीफ़ की।

गुप्ता के निरीक्षण पर सोशल मीडिया यूज़र्स की प्रतिक्रिया
एक यूज़र ने X पर लिखा कि यह देखना होगा कि क्या गुप्ता की फटकार से सरकारी अधिकारियों के काम करने के तरीके में कोई बदलाव आता है या नहीं।

उन्होंने लिखा, "रेखा गुप्ता गुस्से में अधिकारियों को जमकर फटकार लगा रही हैं। देखते हैं मुख्यमंत्री की फटकार का क्या असर होता है।" एक अन्य यूज़र ने लिखा कि गुप्ता के इस तरह के कदमों से ऊपर के स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित होती है। “दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खराब काम और लगातार हो रही देरी को लेकर सिविक इंजीनियरों और अधिकारियों से मौके पर ही कड़े सवाल किए। जब ​​अधिकारियों ने ‘एक हफ़्ते का और समय’ मांगा, तो उन्होंने उन्हें 24 घंटे की सख्त डेडलाइन दे दी और कल तक ठीक किए गए स्लैब की फोटो दिखाने को कहा। कोई फ़ाइल नहीं, कोई बहाना नहीं — सीधे तौर पर जवाबदेही तय की गई!” उन्होंने लिखा।

एक और यूज़र ने कहा कि अधिकारियों से ‘अपना काम करवाने’ के लिए कभी-कभी चिल्लाना बहुत ज़रूरी हो जाता है।
 

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“दिल्ली की CM रेखा गुप्ता का गुस्से वाला वीडियो वायरल हो रहा है... वीडियो में रेखा गुप्ता अधिकारियों को डांट रही हैं... चिल्ला रही हैं... ऐसे घमंडी अधिकारियों को अच्छी तरह डांट-फटकार कर लाइन पर लाना ज़रूरी है... वरना, सिस्टम की लापरवाही के कारण कई परिवारों की खुशियां इसी तरह खत्म होती रहेंगी,” उन्होंने लिखा।
 

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हालांकि गुप्ता के गुस्से की वजह साफ़ नहीं है, लेकिन इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर इस बात पर बहस छेड़ दी है कि सरकारी अधिकारी सिविक कामों में देरी और कमियों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। फ़िलहाल, अधिकारियों के साथ गुप्ता की सख्त बातचीत ने उन लोगों का ध्यान खींचा है जो प्रशासन से ज़्यादा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
 
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Satya Niketan Building Collapse: Delhi Police तलाश रही मरम्मत करने वाला ठेकेदार

नयी दिल्ली, आठ सितंबर दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास सत्य निकेतन स्थित पीजी इमारत के बेसमेंट में पानी के रिसाव (सीपेज) की पुरानी समस्या थी। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को इस इमारत के गिरने से सात लोगों के मौत हो गई थी।

इस इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट व्यवस्था के रूप में किया जा रहा था। पुलिस अब उस ठेकेदार की तलाश कर रही है जो बेसमेंट में रिसाव की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम करा रहा था। सूत्रों ने बताया कि पुलिस उन परिस्थितियों की जांच कर रही है जिनमें यह काम कराया जा रहा था, और क्या इसके कारण कोई ढांचागत बदलाव हुआ जिससे भवन ढह गया।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने भी दक्षिण जोन में कार्रवाई तेज कर दी है। सात सितंबर के आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चला है कि भवन विभाग ने वार्ड 160 में मैदानगढ़ी, सैदुलाजाब और नेब सराय सहित अन्य क्षेत्रों की पांच आवासीय संपत्तियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किए हैं, जबकि सैदुलाजाब में एक अन्य आवासीय संपत्ति को जर्जर होने की वजह से गिराने की कार्रवाई की गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सत्य निकेतन में दशकों पुरानी यह इमारत लगभग 55 वर्ग मीटर में फैली हुई थी और इसमें एक बेसमेंट तथा भूतल और चार ऊपरी मंजिलें थीं।

बताया जाता है कि प्रत्येक मंजिल पर दो कमरे थे और हर कमरे में दो बिस्तर थे। इस संरचना में खंभे और बीम नहीं थे। यह इमारत रविवार को दोपहर करीब 1:30 बजे मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई।

मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने इमारत ढहने के सिलसिले में इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेवा से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार कर लिया है। शुरू में हरिराम को संपत्ति का मालिक माना जा रहा था, लेकिन पुलिस ने कहा कि दस्तावेजों से पता चला है कि इमारत की मालकिन उर्मिला हैं, जबकि हरिराम और महेश कथित तौर पर पीजी का प्रबंधन संभालते थे।

इमारत ढहने की घटना के बाद नगर निकाय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, जिसके तहत एमसीडी के दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों - अधीक्षण अभियंता रणबीर सिंह, अधिशासी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार को निलंबित कर दिया गया। एमसीडी ने पूरी दिल्ली में इमारतों, विशेष रूप से ऊंचाई और मंजिल सीमाओं का उल्लंघन करने वाली संरचनाओं के निरीक्षण का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अधिकारियों को शहर में सभी पांच मंजिला ढांचों को सील करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उच्च स्तरीय एमसीडी जांच के आदेश देते हुए कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उच्च न्यायालय ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधु ने पीजी हब में निरीक्षण के निर्देश दिए और अधिकारियों से इमारतों के लिए सुरक्षा मानदंडों को सख्ती से लागू करने को कहा है।

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'तीन साल से बात नहीं हुई, उनकी बहुत याद आती है', जेल में बंद इमरान खान को लेकर भावुक हुए वसीम अकरम

wasim akram got emotional over Imran khan health: पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने अपने पूर्व कप्तान और दोस्त इमरान खान की सेहत को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से अलग इमरान को उचित और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलना प्राथमिकता होनी चाहिए. Wed, 9 Sep 2026 00:23:13 +0530

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