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DAVV में नकल जांच पर बड़ा संकट, बैटरी खत्म होने से बंद हो रहे जब्त मोबाइल, अब जांच के लिए बनाया जाएगा नया सिस्टम

इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में हर साल सैकड़ों नकल प्रकरण सामने आते हैं लेकिन अब जांच प्रक्रिया एक नई तकनीकी चुनौती से जूझ रही है। दरअसल परीक्षा के दौरान जब्त किए गए मोबाइल लंबे समय तक विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में जमा रहते हैं। इस बीच फोन बंद हो जाते हैं और उनमें मौजूद डिजिटल सबूत तुरंत जांच के लिए उपलब्ध नहीं रह पाते हैं।

दरअसल विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे कई मामलों में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि छात्र ने मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ साथ रखने के लिए किया था या वास्तव में परीक्षा के दौरान उससे उत्तर देखे थे। इसी वजह से जांच प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नया सिस्टम लागू किया जा रहा है।

कैसे अटक रही है नकल जांच?

बता दें कि परीक्षा के दौरान यदि किसी छात्र के पास मोबाइल मिलता है तो उड़नदस्ता या परीक्षा केंद्राध्यक्ष नकल प्रकरण दर्ज कर फोन जब्त कर लेते हैं। इसके बाद मामला अनफेयर मीन्स कमेटी के पास पहुंचता है जहां मोबाइल के डेटा के आधार पर जांच की जाती है। हालांकि समस्या तब आती है, जब जांच शुरू होने तक कई सप्ताह या महीनों का समय निकल जाता है। इतने लंबे समय तक बंद रहने के कारण मोबाइल की बैटरी पूरी तरह खत्म हो जाती है। ऐसे में फोन तुरंत चालू नहीं हो पाता या तकनीकी जांच में अतिरिक्त समय लगता है। इस स्थिति में समिति यह स्पष्ट नहीं कर पाती कि परीक्षा के दौरान मोबाइल कितनी देर इस्तेमाल हुआ, कितने सवाल देखे गए या छात्र ने किस तरह की जानकारी का उपयोग किया। पर्याप्त डिजिटल प्रमाण न मिलने से कुछ मामलों में कार्रवाई तय करने में भी दिक्कत आती है और जांच लंबी खिंच जाती है।

अब नई जांच समिति करेगी तुरंत मोबाइल की जांच

दरअसल विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इस समस्या के समाधान के लिए अलग जांच समिति बनाने को मंजूरी दे दी है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के अनुसार, यह समिति सिर्फ मोबाइल से जुड़े नकल मामलों की जांच करेगी और फोन जब्त होते ही उसकी तकनीकी जांच शुरू करेगी। नई व्यवस्था का मकसद मोबाइल में मौजूद जानकारी को समय रहते सुरक्षित करना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा के दौरान फोन का वास्तविक इस्तेमाल कितना हुआ। इससे नकल की गंभीरता तय करने में आसानी होगी और छात्रों के मामलों का फैसला भी जल्दी हो सकेगा। विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल करीब 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जिनमें मोबाइल फोन जब्त किए जाते हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद जांच में देरी कम होने और डिजिटल सबूतों के आधार पर अधिक स्पष्ट निर्णय लेने की उम्मीद जताई जा रही है।

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  Sports

Duleep Trophy से बाहर होने पर Karun Nair का बल्ले से जवाब, Thimmappiah Trophy में जड़ा शानदार Century

दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल और चेन्नई में खेले जा रहे फाइनल मुकाबले के लिए दक्षिण क्षेत्र की टीम में जगह नहीं मिलने के बाद कर्नाटक के अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर वापस बेंगलुरु लौट आए हैं। इसके बजाय वह चिन्नास्वामी स्टेडियम में केएससीए सचिव एकादश की ओर से थिम्मापैया ट्रॉफी में खेल रहे हैं। यह लाल गेंद से खेली जाने वाली प्रतियोगिता आमतौर पर कर्नाटक की रणजी ट्रॉफी की तैयारियों की शुरुआत मानी जाती है।

करुण नायर शनिवार को चेपॉक में दलीप ट्रॉफी फाइनल से पहले दक्षिण क्षेत्र के अभ्यास सत्र का हिस्सा थे। हालांकि, लगातार दूसरे मुकाबले के लिए टीम में चयन नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने रविवार को टीम का साथ छोड़ दिया। इसके अगले ही दिन सोमवार को नायर ने केएससीए सचिव एकादश की ओर से छत्तीसगढ़ के खिलाफ शानदार शतक जड़ दिया।

दलीप ट्रॉफी के दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद दक्षिण क्षेत्र के मुख्य कोच विक्रम वर्मा ने कहा कि नायर निजी कारणों से टीम से अलग हुए हैं। हालांकि, नायर की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट से अलग संकेत मिले। इसके बाद दक्षिण क्षेत्र की टीम में चयन को लेकर सवाल उठने लगे।

विक्रम वर्मा ने कहा कि नायर ने घर जाने के लिए अनुमति ली थी और उन्हें निजी कारणों के चलते वापस जाना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि टीम संयोजन को ध्यान में रखते हुए नायर को अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक, दक्षिण क्षेत्र की टीम के सामने दोनों मुकाबलों में बाएं हाथ के स्पिनरों की चुनौती थी, इसलिए मध्यक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज को उतारने की रणनीति बनाई गई।

वर्मा ने बताया कि उत्तर क्षेत्र के खिलाफ पहले मुकाबले में युवा कोडिमेला हिमतेजा को मौका दिया गया था। इसके बाद देवदत्त पडिक्कल की वापसी हुई और टीम संयोजन को देखते हुए उन्हें फिर से अंतिम एकादश में जगह दी गई। ऐसे में नायर को बाहर रखना टीम प्रबंधन के लिए आसान फैसला नहीं था, लेकिन टीम के संतुलन को प्राथमिकता दी गई।

दक्षिण क्षेत्र की फाइनल टीम में विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज के तौर पर केवल एन जगदीशन हैं। मुकाबले से पहले कप्तान तिलक वर्मा ने चयन का बचाव करते हुए कहा था कि उपकप्तान रिकी भुई भी पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। भुई ने बेंगलुरु में खेले गए सेमीफाइनल में भी पारी की शुरुआत की थी, जहां उन्होंने 5 और 42 रन बनाए थे।

हालांकि, प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 90 मुकाबले खेल चुके रिकी भुई ने अब तक केवल तीन मैचों में सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई है। तिलक वर्मा के अनुसार भुई पहले भी पारी की शुरुआत कर चुके हैं और वरिष्ठ खिलाड़ी होने के कारण जरूरत के मुताबिक अपनी भूमिका बदल सकते हैं। इसी वजह से टीम ने उन्हें जगदीशन के साथ पारी की शुरुआत कराने का फैसला किया।

गौरतलब है कि दलीप ट्रॉफी की टीमों का चयन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं द्वारा नहीं किया जाता। प्रत्येक क्षेत्र की टीम के लिए संबंधित राज्य क्रिकेट संघों के चयनकर्ता खिलाड़ियों का चयन करते हैं। ऐसे में करुण नायर के लगातार दो मुकाबलों से बाहर रहने और उनके तुरंत बाद दूसरी प्रतियोगिता में शतक लगाने के घटनाक्रम ने दक्षिण क्षेत्र के चयन और टीम संयोजन पर चर्चा तेज कर दी है। नायर फिलहाल मैदान पर अपने बल्ले से जवाब देते नजर आ रहे हैं और उनके प्रदर्शन पर कर्नाटक की आगामी रणजी तैयारियों के दौरान भी नजरें टिकी हैं।
Tue, 08 Sep 2026 22:12:00 +0530

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