RRB Group D Answer Key 2026 OUT: प्रोविजनल आंसर-की जारी, 15 सितंबर तक ऑब्जेक्शन का मौका
रेलवे में ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने ग्रुप-डी परीक्षा की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी है। उम्मीदवार अब अपने प्रश्नों के जवाब और बोर्ड की ओर से जारी उत्तरों का मिलान कर सकते हैं।
आंसर-की देखने के लिए उम्मीदवारों को RRB की संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने लॉगिन क्रेडेंशियल दर्ज करने होंगे। इसके लिए आम तौर पर रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड की जरूरत होगी।
आंसर-की के जरिए उम्मीदवार अपने संभावित स्कोर का अनुमान भी लगा सकते हैं। वहीं, अगर किसी अभ्यर्थी को किसी सवाल के उत्तर को लेकर आपत्ति है तो वह तय समय के भीतर ऑनलाइन चुनौती दर्ज कर सकता है।
इन 5 स्टेप्स में डाउनलोड करें RRB Group D Answer Key
उम्मीदवार नीचे बताए गए आसान स्टेप्स की मदद से अपनी प्रोविजनल आंसर-की डाउनलोड कर सकते हैं।
स्टेप 1: सबसे पहले RRB की संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
स्टेप 2: वेबसाइट के होमपेज पर दिए गए Answer Key/Objection से संबंधित लिंक पर क्लिक करें।
स्टेप 3: अब RRB Group D Answer Key 2026 के लिंक को चुनें।
स्टेप 4: स्क्रीन पर मांगी गई लॉगिन डिटेल, जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड दर्ज करके सबमिट करें।
स्टेप 5: लॉगिन करने के बाद प्रोविजनल आंसर-की स्क्रीन पर दिखाई देगी। इसे चेक करने के बाद डाउनलोड कर लें और भविष्य के लिए इसका प्रिंटआउट सुरक्षित रखें।
15 सितंबर तक दर्ज कर सकते हैं आपत्ति
RRB ने उम्मीदवारों को प्रोविजनल आंसर-की पर आपत्ति दर्ज करने का भी मौका दिया है। अगर किसी उम्मीदवार को लगता है कि आंसर-की में किसी सवाल का उत्तर गलत दिया गया है, तो वह 15 सितंबर तक ऑनलाइन ऑब्जेक्शन दर्ज कर सकता है।
आपत्ति दर्ज करने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित प्रश्न का चयन करना होगा और अपनी आपत्ति का आधार बताना होगा। इसके साथ ही प्रत्येक प्रश्न के लिए 50 रुपये ऑब्जेक्शन फीस जमा करनी होगी।
आपत्ति दर्ज करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
उम्मीदवार को आपत्ति दर्ज करने से पहले संबंधित प्रश्न और जारी उत्तर को ध्यान से देखना चाहिए। यदि किसी उत्तर को चुनौती दी जा रही है, तो उसके समर्थन में उचित प्रमाण या संदर्भ उपलब्ध होना जरूरी है।
साथ ही उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर है। अंतिम तारीख के बाद प्राप्त आपत्तियों पर विचार नहीं किया जा सकता है।
आंसर-की के बाद क्या होगा?
प्रोविजनल आंसर-की पर प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा के बाद बोर्ड अंतिम आंसर-की जारी कर सकता है। इसके बाद परीक्षा के परिणाम और आगे की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सामने आएगी।
इसलिए उम्मीदवारों को सलाह है कि वे अपनी आंसर-की जरूर चेक करें और यदि किसी उत्तर पर वास्तविक आपत्ति है तो निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑब्जेक्शन दर्ज करें।
BRICS Summit 2026: 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता'; विकास केंद्रित एजेंडे से वैश्विक मंच को दिशा देने की तैयारी
राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। मिस्र, ईरान और यूएई जैसे नए सदस्यों के जुड़ने से ब्रिक्स की ताकत और दायरा काफी बढ़ चुका है।
हालांकि, बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच पश्चिमी देश इस संगठन को एक नए शीत युद्ध के अखाड़े और अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने वाले गुट के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में बहुध्रुवीय दुनिया का संतुलन बनाए रखना भारत के लिए मुख्य परीक्षा होगी।
'पश्चिम-विरोधी' छवि को तोड़ने का कूटनीतिक प्रयास
रूस और चीन लगातार ब्रिक्स को अमेरिकी डॉलर और पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश में रहते हैं। ईरान की मौजूदगी से भी पश्चिमी थिंक-टैंक इसे विरोधी धड़े की नजर से देख रहे हैं। लेकिन भारत, जिसके अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बेहद मजबूत रणनीतिक व आर्थिक रिश्ते हैं, ब्रिक्स को किसी भी ब्लॉक के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहता। भारत की कोशिश है कि यह समूह किसी टकराव का जरिया बनने के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग का जरिया बने।
सकारात्मक और विकास-केंद्रित एजेंडे पर भारत का ध्यान
इस बार ब्रिक्स सम्मेलन की आधिकारिक थीम "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई है। भारत इस सम्मेलन में भू-राजनीतिक विवादों को दरकिनार कर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित ऊर्जा संक्रमण, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करेगा।
ग्लोबल साउथ का सेतु बनेगा भारत
भारत खुद को केवल पश्चिम या पूर्व के किसी एक पाले में सीमित रखने के बजाय 'ग्लोबल साउथ मतलब विकासशील और उभरते देशों की एक जिम्मेदार और निष्पक्ष आवाज के रूप में पेश कर रहा है। भारत की रणनीति यह सुनिश्चित करना है कि चीन अपनी आर्थिक ताकत या कर्ज नीति के जरिए ब्रिक्स पर एकतरफा दबदबा न बना सके। भारत इस महामंच के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि विकासशील देशों की तरक्की बिना किसी टकराव के समावेशी नीतियों से संभव है।
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