कॉर्पोरेट अपराध पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला:व्यक्ति आरोपी न हो, तब भी कंपनी पर चलेगा मुकदमा; जेल की जगह जुर्माना देना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों को लेकर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इसलिए किसी कंपनी के खिलाफ केस खत्म नहीं किया जा सकता कि जिस कर्मचारी या अधिकारी के जरिए अपराध हुआ, उसकी पहचान नहीं हो पाई या उसे आरोपी नहीं बनाया गया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई के बाद फार्मा कंपनी सनोफी इंडिया लिमिटेड की अपील खारिज कर दी। यह मामला दवा बनाने वाली कंपनी सनोफी इंडिया लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही खत्म करने से इनकार किया गया था। दवा खरीद से जुड़ा है मामला, फायदे के लिए रिश्वत देने का आरोप यह मामला BARC के लिए दवाओं की खरीद से जुड़ा CBI केस है। चार्जशीट में आरोप लगाया गया था कि BARC के एक अधिकारी ने सनोफी इंडिया के साथ मिलकर महंगी दरों पर दवाएं खरीदीं और गलत फायदा पहुंचाने के बदले रिश्वत दी गई। सनोफी इंडिया एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जिसका मुख्य कारोबार दवाओं का निर्माण है। इस मामले में कंपनी के साथ उसका कोई कर्मचारी या अधिकारी आरोपी नहीं बनाया गया था। कंपनी ने दलील दी थी कि उसके खिलाफ मुकदमा चलाया ही नहीं जा सकता, क्योंकि उस पर आपराधिक मंशा यानी मेंस रिया नहीं थोपी जा सकती। कंपनी ने यह भी कहा था कि दोषी पाए जाने पर उसे जेल नहीं भेजा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने 98 पेज का फैसला लिखा जस्टिस जेबी पारदीवाला ने 98 पन्नों का फैसला लिखा। बेंच ने कॉर्पोरेट आपराधिक जिम्मेदारी के नियमों और किसी व्यक्ति के कृत्य व आपराधिक मंशा को कंपनी से जोड़ने के सिद्धांतों की विस्तार से जांच की। बेंच के सामने यह सवाल था कि क्या हाईकोर्ट को इस आधार पर कंपनी के खिलाफ शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही खत्म कर देनी चाहिए थी कि उसके साथ किसी प्राकृतिक व्यक्ति की पहचान नहीं हुई और उसे आरोपी नहीं बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनी में "मेंस रिया" किसी जीवित व्यक्ति के कृत्य और मंशा को कंपनी से जोड़कर ही मानी जा सकती है। लेकिन कार्यवाही खत्म करने की मांग पर सुनवाई के चरण में किसी खास व्यक्ति की पहचान न होना अपने आप में अभियोजन के लिए घातक नहीं है। कोर्ट ने कहा, “भारतीय कानून के तहत स्थिति साफ है। किसी कंपनी पर ऐसे अपराध के लिए भी मुकदमा चलाया जा सकता है, जिसमें सजा के तौर पर जेल जरूरी हो या मेंस रिया साबित करना जरूरी हो। कंपनी पर तभी मुकदमा नहीं चल सकता, जब अपराध में केवल जेल की सजा हो या अपराध की प्रकृति ऐसी हो कि उसमें व्यक्तिगत दुर्भावनापूर्ण मंशा जरूरी हो और कंपनी वह अपराध कर ही न सकती हो।” भास्कर नॉलेज- क्या है मेंस रिया एक कानूनी शब्द है, जिसका सीधा मतलब है— "अपराधी का इरादा" या "दोषी मन"।कानून की भाषा में किसी भी गलती को 'जुर्म' तभी माना जाता है जब वह जान-बूझकर की गई हो। 'मेंस रिया' का मतलब है कि क्या उस व्यक्ति का मन साफ़ था या उसने बुरा करने की नीयत से ही वह काम किया था। अगर नीयत खराब थी, तो कानून उसे 'मेंस रिया' मानकर सजा देता है। चार्जशीट में कंपनी का अपराध दिखना जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट को पहली नजर में यह दिखाना चाहिए कि अपराध कंपनी ने खुद किया है। कंपनी की भूमिका उसके काम, फैसलों और लेन-देन से जुड़े आरोपों से सामने आ सकती है। इसके लिए उस खास व्यक्ति का नाम देना जरूरी नहीं है, जिसने ये काम किए हों। कोर्ट ने कहा कि भारत और दूसरे देशों में कंपनियों को आपराधिक जिम्मेदारी के दायरे में लाया जाता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि कंपनियों के पास बहुत ज्यादा आर्थिक और सामाजिक-राजनीतिक ताकत होती है और वे गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम होती हैं। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह सवाल आसान लग सकता है, लेकिन करीब से देखने पर यह काफी जटिल है। उसने कहा कि कॉर्पोरेट आपराधिक जिम्मेदारी लंबे समय से कठिन विषय रही है। कोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे दो बुनियादी धारणाएं हैं। पहली, कंपनी अपने सदस्यों से अलग पहचान रखने वाली एक कृत्रिम इकाई है। दूसरी, कंपनी एक अमूर्त संस्था है। कोर्ट ने इसी संदर्भ में मशहूर कहावत का जिक्र किया कि कंपनी की कोई आत्मा नहीं होती, जिसे दोषी ठहराया जा सके और न ही शरीर होता है, जिसे सजा दी जा सके। व्यक्ति की पहचान के बिना भी मंशा का आकलन संभव कोर्ट ने कहा कि शुरुआती चरण में आसपास के तथ्यों और परिस्थितियों से मेंस रिया का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके लिए किसी खास व्यक्ति की पहचान जरूरी नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि किस व्यक्ति के कृत्य और मंशा को कंपनी से जोड़ा जाए, इसका विस्तृत आकलन ट्रायल के दौरान किया जाएगा। किसी व्यक्ति को आरोपी बनाना जरूरी है, इस दलील को भी बेंच ने खारिज कर दिया। फैसले में कहा गया कि कंपनी की सीधी आपराधिक जिम्मेदारी वाले मामलों में किसी प्राकृतिक व्यक्ति को आरोपी न बनाया जाना, अकेले कार्यवाही खत्म करने का आधार नहीं हो सकता। हालांकि, बेंच ने साफ किया कि कंपनियों को आपराधिक कार्यवाही खत्म करने के सामान्य नियमों से कोई विशेष छूट नहीं है। कंपनी की जिम्मेदारी तय करने के लिए 3 चरणों का ढांचा सुप्रीम कोर्ट ने यह तय करने के लिए तीन चरणों वाला नया क्रमबद्ध ढांचा बताया कि किसी व्यक्ति के कृत्य और उसकी आपराधिक मंशा को कंपनी से कैसे जोड़ा जाए। पहले चरण में कोर्ट को कंपनी के संवैधानिक दस्तावेज यानी आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन देखने होंगे। इससे पता चलेगा कि कंपनी की ओर से काम करने का अधिकार किसे दिया गया था। दूसरे चरण में यह देखा जाएगा कि यह अधिकार ऐसे व्यक्ति को सौंपा गया था या नहीं, जिसके पास पर्याप्त स्वतंत्रता और अपने स्तर पर फैसला लेने की क्षमता थी। इसके लिए उस व्यक्ति का आधिकारिक पद महत्वपूर्ण नहीं होगा। अगर पहले दोनों चरणों से स्थिति साफ नहीं होती, तो कोर्ट संबंधित कानून के उद्देश्य और नीति के आधार पर “विशेष आरोपण नियम” बना सकता है। कोर्ट ने कहा कि मेंस रिया अपराधों में कॉर्पोरेट आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े सवाल काफी मुश्किल होते हैं। इन पर आगे कानून बनाने और इस पूरे क्षेत्र के रिव्यू की जरूरत पड़ सकती है।
वडोदरा में PM मोदी का Gen-Z कार्यक्रम:35200 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन-शिलान्यास भी करेंगे
गुजरात के वडोदरा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम होने जा रहा है। पीएम का यह कार्यक्रम कई प्रोजेक्ट्स के शिलान्यास और लोकार्पण का है, लेकिन इसमें जेन-जी का पीएम से सीधा संवाद भी होगा। इसीलिए इस बार पीएम का स्टेज भी न्यू थीम पर डिजाइन किया गया है। पीएम के मंच के साथ एक 'वाय' शैप में रैंप बनाया गया है, जिसके चारों ओर युवा बैठेंगे। मोदी रैंप पर चलते हुए स्टूडेंट्स से बातचीत करेंगे। 35200 करोड़ के प्रोजेक्ट का उद्घाटन-शिलान्यास करेंगे पीएम मोदी वडोदरा और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े 35200 करोड़ रुपए के कई विकास प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इसके बाद नवसारी जाएंगे। नवसारी में बीजेपी कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। नवसारी से सूरत पहुंचेंगे और यहां से मुंबई के लिए रवाना होंगे। वडोदरा में इन प्रोजेक्ट्स की शुरुआत करेंगे पीएम मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट-जी.एफ.एफ 2026 का शुभारंभ करेंगे पीएम शाम को मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट-जी.एफ.एफ 2026 का शुभारंभ करेंगे। दुनिया के सबसे बड़े और प्रभावशाली सालाना फिनटेक सम्मेलनों में से एक, जी.एफ.एफ का इस बार का विषय है- ‘पोटेंशियल टू इम्पैक्ट: एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन, क्वांटम – ट्रस्टेड, कनेक्टेड, ग्लोबल सिस्टम्स फॉर इन्क्लूसिव फाइनेंस’। प्रधानमंत्री सम्मेलन को संबोधित भी करेंगे। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, इस महोत्सव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करना तथा संभावनाओं को वास्तविकता में बदलना है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें... पीएम मोदी की 13 साल बाद श्रीराम कॉलेज में स्पीच:कहा- मैंने लाल किले से होम्योपैथी की गोली दी प्रधानमंत्री शनिवार शाम मेट्रो से सफर कर श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) पहुंचे। उन्होंने कॉलेज के 100वें स्थापना दिवस पर जेन-जी छात्रों के बीच 48 मिनट स्पीच दी। पीएम मोदी ने कहा कि आपकी लैंग्वेज में कहूं तो इस कॉलेज के पूर्व छात्र OG (ओरिजनल गैंग्स्टर) हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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