दरअसल, USB-C पोर्ट ने स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप की दुनिया में चार्जिंग को पहले से कहीं ज्यादा आसान कर दिया है। अब एक ही तरह का पोर्ट में कई डिवाइसों में देखने को मिलता है। इसी वजह अधिकतर लोग समझ लेते हैं कि यदि लैपटॉप में USB-C पोर्ट है, तो वह किसी भी USB-C चार्जर से आसानी से चार्ज हो जाता है।
हालांकि, सच तो इससे काफी अलग है। कई बार यूजर नया चार्जर खरीदने के बाद भी हैरान हो जाते हैं कि उनका लैपटॉप चार्ज क्यों नहीं कर रहा। खासकर, हर टाइप-C पोर्ट का काम चार्जिंग करना होता ही नहीं है। आइए आपको USB Type-C पोर्ट के पीछे की पूरी कहानी बताते हैं।
सभी USB-C पोर्ट एक जैसे नहीं होते
- असल में आप USB-C कनेक्टर को तकनीकी दुनिया का 'स्विस आर्मी नाइफ'(मल्टी-टूल) मान लेते हैं। एक ही पोर्ट से डेटा ट्रांसफर हो सकता है, वीडियो आउटपुट दिया जा सकता है, ऑडियो सुना जा सकता है और डिवाइस को चार्ज भी किया जा सकता है।
- हालांकि, यह जरुरी नहीं है कि आपके लैपटॉप का पोर्ट इन सभी सुविधाओं को सपोर्ट करता है। कई बार बजट और मिड-रेंज लैपटॉप में कंपनियां एक USB-C पोर्ट सिर्फ डेटा (फाइल्स या फोटो) ट्रांसफर करने के लिए देती हैं। वहीं, कुछ अन्य लैपटॉप में एक पोर्ट सिर्फ डिस्प्ले कनेक्ट करने के काम आता है। लेकिन पोर्ट की शक्ल देखकर पता लगाना कि इससे चार्जिंग हो जाएगी, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है।
USB-C का पॉवर डिलीवरी कॉम्पिटेबल होना जरूरी
यदि किसी USB-C पोर्ट से लैपटॉप को चार्ज होना, तो उस पोर्ट के भीतर USB पॉवर डिलीवरी (PD) नाम की तकनीकी का होना जरुरी है। यही वो तकनीक है जिससे USB-C पोर्ट चार्जिंग को सपोर्ट करने के लायक बन जाएगा और तय करेगा कि लैपटॉप को सुरक्षित तरीके से कितनी बिजली भेजी जानी चाहिए।
Thunderbolt और USB-C में कन्फ्यूज न हों
- ऐसे में कई यूजर Thunderbolt और USB-C को एक ही तकनीक समझ लेते हैं, बल्कि दोनों में काफी अंतर है। Thunderbolt भी USB-C कनेक्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसमें सामान्य USB-C की तुलना में कई अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं।
- Thunderbolt 4 और Thunderbolt 5 पोर्ट तेज डेटा ट्रांसफर स्पीड, हाई-रिजॉल्यूशन डिस्प्ले सपोर्ट और बेहतर चार्जिंग क्षमता प्रदान करता है। इसलिए हर Thunderbolt पोर्ट USB-C जरुर होता है, लेकिन हर USB-C पोर्ट Thunderbolt नहीं होता।
कैसे चेक करें आपका USB-C पोर्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है या नहीं?
- क्या आपको भी अपने लैपटॉप के USB-C पोर्ट की क्षमता नहीं पता है, तो सबसे आसान तरीका है उसकी ऑफिशियल स्पेसिफिकेशन चेक करना। कुछ निर्माता USB-C पोर्ट के पास पावर, बैटरी या Thunderbolt का लोगो देते हैं, जिससे पहचान आसान हो जाती है। लेकिन सभी कंपनियां ऐसा नहीं करती है।
- वहीं, कुछ लैपटॉप में केवल एक USB-C पोर्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है, जबकि बाकी पोर्ट सिर्फ डेटा ट्रांसफर के लिए होते हैं। ऐसे में यदि आपको जानना है कि आपके लैपटॉप का USB-C पोर्ट चार्जिंग सपोर्ट करना है या नहीं, तो आपको कंपनी की वेबसाइट या फिर यूजर मैनुअल को एक बार जरुर देख लें।
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नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव में घर, गाड़ियां और सरकारी ढांचे बह गए। बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में पानी का स्तर करीब 30 फीट तक पहुंच गया, जिससे राहत और बचाव कार्य मुश्किल हो गया।
वहीं बाढ़ के बाद खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच राहत टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। कई प्रभावित इलाके अब भी सड़क संपर्क से कटे हुए हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी इस आपदा की चपेट में आ गए।
नेपाल बाढ़ की वजह क्या रही?
दरअसल बुधवार सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस हुए थे। शुरुआत में इसे भूकंप माना गया, लेकिन बाद की जांच में पता चला कि चीन की ओर ल्हेंदे नदी के पास पहाड़ और ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था। इसी लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा कंपन पैदा हुआ। पहाड़ से गिरे मलबे और पानी ने ल्हेंदे नदी का बहाव तेज कर दिया। इसके बाद यही सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंच गया, जिससे नेपाल के कई हिस्सों में अचानक बाढ़ आ गई। बहाव इतना तेज था कि मलबा और लोग करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक पहुंच गए। चितवन में अब तक 33 शव बरामद किए जा चुके हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक घटना में ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा भी टूटकर नीचे आया हो सकता है। हालांकि इसकी पूरी वजह जानने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
133 भारतीय समेत 1000 से ज्यादा लोग लापता
वहीं बाढ़ के बाद नेपाल में लापता लोगों की संख्या 1000 से ज्यादा बताई गई है। इनमें 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय और 37 एनआरआई भी हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े कई लोग भी प्रभावित हुए हैं। रसुवा जिले में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 133 से ज्यादा कर्मचारी और श्रमिक भी लापता बताए गए हैं। नेपाल विद्युत प्राधिकरण की टीमें स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी तलाश कर रही हैं। बाढ़ से बेट्रावती से रसुवागढ़ी सीमा चौकी तक जाने वाली सड़क का करीब 42 किलोमीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। कई पुल बह जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है।
बाढ़ से कितना नुकसान हुआ
दरअसल नेपाल में अब तक 157 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बाढ़ से 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिनमें 8 चालू और 5 निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 748 मेगावाट बताई गई है। कम से कम 19 बड़े पुल बह गए हैं और कई स्थानीय झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
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