महंगी पड़ी 'काले सोने' की चोरी, क्रूड ऑयल निकालने के चक्कर में 37 की मौत
अफ्रीकी देश नाइजीरिया में क्रूड ऑयल चोरी करने के प्रयास में 37 लोगों की मौत हो गई है। चोर पाइपलाइन को टैप करके उसमें से तेल को निकालने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान जहरीली गैस के लीक होने से उनकी मौत हो गई।
Property Buying Tips: अपने पार्टनर के साथ मिलकर प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पति-पत्नी का मिलकर घर खरीदना आज आम बात है। खासकर जब दोनों कमाते हों और घर खरीदने में दोनों का पैसा लग रहा हो। जॉइंट होम लोन से दोनों की आय को लोन की पात्रता में शामिल किया जा सकता है, जिससे अधिक लोन मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उपलब्ध अधिकतम लोन ले लेना समझदारी है। ज्यादा लोन का मतलब लंबे समय तक ज्यादा ईएमआई और बड़ा वित्तीय बोझ भी हो सकता है।
टैक्स बचत के लिए सिर्फ नाम जोड़ना सही नहीं
संयुक्त रूप से प्रॉपर्टी खरीदने पर टैक्स से जुड़ा फायदा मिल सकता है, लेकिन केवल घर के कागजों में पति-पत्नी दोनों का नाम होने से टैक्स लाभ अपने आप नहीं मिलता। पुराने टैक्स रिजीम में पात्र व्यक्ति होम लोन के ब्याज और मूलधन के भुगतान पर लागू नियमों के अनुसार कटौती का दावा कर सकते हैं। इसके लिए घर में हिस्सेदारी, लोन की जिम्मेदारी और भुगतान में वास्तविक योगदान जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं।
इनकम टैक्स रिटर्न में को-ओनर को प्रॉपर्टी में अपनी हिस्सेदारी का प्रतिशत भी बताना होता है। इसलिए रजिस्ट्रेशन से पहले यह साफ होना चाहिए कि दोनों की हिस्सेदारी कितनी है और लोन की जिम्मेदारी किस अनुपात में होगी।
नए टैक्स रिजीम में नियम अलग
सिर्फ टैक्स बचाने के लिए पति या पत्नी को को-ओनर बनाना सही फैसला नहीं हो सकता। मौजूदा नियमों के अनुसार नए टैक्स रिजीम में सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर पर सामान्य तौर पर सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज की कटौती उपलब्ध नहीं है। हालांकि, किराये पर दी गई प्रॉपर्टी के लिए टैक्स का इलाज अलग हो सकता है। इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले अपने टैक्स रिजीम और दोनों की पात्रता को समझना जरूरी है।
EMI की जिम्मेदारी दोनों की
जॉइंट लोन का मतलब केवल EMI बांटना नहीं है। अगर किसी एक की नौकरी चली जाती है या वह भुगतान नहीं कर पाता, तब भी बैंक दोनों उधारकर्ताओं से लोन की किस्त चुकाने की उम्मीद कर सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले यह भी तय करें कि एक आय कुछ समय के लिए बंद हो जाए तो EMI कैसे चुकाई जाएगी।
हिस्सेदारी पहले तय करें
अगर दोनों बराबर पैसा लगा रहे हैं तो 50:50 हिस्सेदारी उपयुक्त हो सकती है। लेकिन योगदान अलग-अलग है तो प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी भी सोच-समझकर तय करनी चाहिए। शादी, अलगाव, मृत्यु, विरासत या परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने पर प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद पैदा हो सकते हैं। इसलिए मालिकाना कागज, लोन दस्तावेज, नॉमिनेशन और वसीयत को समय-समय पर अपडेट रखना बेहतर है।
आखिरकार, पति-पत्नी के नाम पर संयुक्त प्रॉपर्टी खरीदना तभी बेहतर फैसला है जब मालिकाना हक, भुगतान और लोन की जिम्मेदारी दोनों की वास्तविक वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप हो।
(प्रियंका कुमारी)
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