युवराज सिंह ने अभिषेक शर्मा से उठक-बैठक लगवाई:कहा- बोल कि मैं पहली गेंद पर लप्पा नहीं मारूंगा; बर्थडे पर वीडियो पोस्ट किया
अभिषेक शर्मा के बर्थडे पर उनके मेंटर युवराज सिंह ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार वीडियो पोस्ट किया है। इसमें अभिषेक से युवराज कहते हैं कि 'बोलो, मैं पहली बॉल पर लप्पा नहीं मारूंगा।' इसके बाद अभिषेक कान पकड़कर ऐसा ही कहते हुए उठक-बैठक लगाते हैं। अभिषेक आज 4 सितंबर को 26 साल के हो गए। उन्होंने अब तक भारत के लिए 56 टी-20 मैच खेले हैं। इसमें उन्होंने 2 शतकों और 11 अर्धशतकों की मदद से 1629 रन बनाए हैं। युवराज ने लिखा- आप अपनी गलतियों से सीखते हैं युवराज सिंह ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा- ‘सर अभिषेक, आपका जन्मदिन है। कितना शुभ दिन है! आप जिस इंसान के रूप में बदले हैं, उससे मुझे प्यार है।’ उन्होंने आगे लिखा- ‘आप अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखते हैं और एक बेहतरीन लीडर हैं। आप अपनी गलतियों से सीखते हैं और हर बार ज्यादा मेहनत करने को तैयार रहते हैं। आपको ढेर सारे रनों और शतकों की शुभकामनाएं।’ युवी की मेंटरशिप में बने नंबर-1 टी-20 बल्लेबाज अभिषेक को इंटरनेशनल क्रिकेट के शिखर तक पहुंचाने में युवराज सिंह की बड़ी भूमिका रही है। युवी की गाइडेंस में ट्रेनिंग करने के बाद ही अभिषेक ने भारतीय टी-20 टीम में जगह बनाई। युवराज की मदद से अभिषेक दुनिया के नंबर-1 टी-20 बल्लेबाज भी बने। फिलहाल वे ICC टी-20 रैंकिंग में 819 पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर है। वीडियो में दोनों के बीच का गुरु-शिष्य वाला यह खास बॉन्ड फैंस को काफी पसंद आ रहा है। ------------------------------ स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… मंधाना विमेंस इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बैटर:मिताली का रिकॉर्ड तोड़ा, सबसे ज्यादा शतक भी लगाए; दीप्ति टॉप विकेट टेकर भारत ने विमेंस एशिया कप में हॉन्गकॉन्ग को 137 रन से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय ओपनर स्मृति मंधाना ने 124 रन की पारी में कई बड़े रिकॉर्ड्स अपने नाम किए। पूरी खबर पढ़ें…
मूवी रिव्यू- जीवन या भीमा कॉन:2 करोड़ के इंश्योरेंस के लिए रची मौत की साजिश, अरशद वारसी की कॉमेडी हंसाती है या उलझाती है?
कास्ट- अरशद वारसी, विजय राज, संजीदा शेख डायरेक्टर- अभिषेक डोगरा ड्यूरेशन: 1 घंटा 55 मिनट रेटिंग- 3/ 5 एक आदमी अपनी मौत का झूठा नाटक रचता है, करोड़ों का इंश्योरेंस पाने का सपना देखता है और फिर उसकी जिंदगी में ऐसा बवाल शुरू होता है कि संभालना मुश्किल हो जाता है। ‘जीवन या भीमा कॉन?’ का आइडिया पहली नजर में काफी मजेदार लगता है और फिल्म की शुरुआत भी इसी वजह से उम्मीद जगाती है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कॉमेडी के साथ उलझन भी बढ़ती जाती है। कुछ सीन खूब हंसाते हैं, कलाकारों की टाइमिंग भी अच्छी है, लेकिन कहानी हर बार अपने ही सेटअप का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी है जीवन (अरशद वारसी) की, जो एक आम आदमी है और अपनी जमा-पूंजी एक रेस्टोरेंट खोलने में लगा देता है। हालात बिगड़ते हैं, कर्ज बढ़ता है और पैसे की जरूरत ऐसी आती है कि जीवन अपनी मौत का नाटक करने की खतरनाक योजना बना लेता है। किस्मत उसका साथ कुछ इस तरह देती है कि उसे अपने हमशक्ल भीमा (अरशद वारसी) के बारे में पता चलता है। भीमा एक डायमंड स्मगलर है, जिसका संबंध गैंगस्टर विनायक (विजय राज) से है। जीवन और उसकी पत्नी योजना (संजीदा शेख) मिलकर भीमा की पहचान का फायदा उठाकर दो करोड़ रुपए का इंश्योरेंस हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन प्लान यहां से बिगड़ना शुरू होता है। भीमा के पीछे पड़े विनायक और उसका साथी मनु (बृजेंद्र काला) उनके घर तक पहुंच जाते हैं। दूसरी तरफ इंश्योरेंस इंस्पेक्टर (अतुल परचुरे) भी क्लेम की जांच में लग जाता है। घर की मालकिन याशिका (पूजा चोपड़ा) की अपनी अलग दिलचस्पी है। इसके बाद हर किरदार दूसरे को शक की नजर से देखने लगता है और शुरू होती है गलत पहचान, झूठ और पैसों के पीछे भागने की कॉमेडी। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? अरशद वारसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। एक तरफ वह परेशान, कर्ज में डूबे जीवान बने हैं और दूसरी तरफ शराबी डायमंड स्मगलर भीमा। दोनों किरदारों के हाव-भाव, बोलने के तरीके और बॉडी लैंग्वेज में फर्क दिखाना आसान नहीं था, लेकिन अरशद इसे अच्छी तरह संभालते हैं। खासकर भीमा वाले हिस्सों में उनका कॉमिक टाइमिंग फिल्म को कई बार बचाता है। संजीदा शेख, योजना के किरदार में अच्छी लगती हैं और अरशद के साथ उनकी केमिस्ट्री भी सहज लगती है। विजय राज अपने अंदाज में फिल्म में क्राइम और कॉमेडी का अच्छा बैलेंस बनाते हैं। बृजेंद्र काला भी अपने किरदार में फिट बैठते हैं और कुछ सीन में अच्छी हंसी निकालते हैं। पूजा चोपड़ा को याशिका के रूप में कुछ मजेदार मौके मिलते हैं, हालांकि उनके किरदार को थोड़ा और इस्तेमाल किया जा सकता था। दिवंगत अतुल परचुरे इंश्योरेंस इंस्पेक्टर के छोटे लेकिन असरदार रोल में अपनी स्वाभाविक कॉमिक टाइमिंग दिखाते हैं। कैसा है डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और टेक्निकल एस्पेक्ट्स? डायरेक्टर अभिषेक डोगरा ने कहानी को ज्यादातर एक ही घर के अंदर रखा है। इससे फिल्म का सेटअप एक तरह की कमरे में बंद कॉमेडी जैसा बन जाता है, जहां कलाकारों और स्क्रीनप्ले पर पूरा दारोमदार रहता है। शुरुआत में यह तरीका काम करता है, लेकिन बाद में यही सीमित लोकेशन कहानी पर भारी पड़ने लगती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी समस्या यह है कि फिल्म के पास एक अच्छा आइडिया होने के बावजूद उसके साथ लगातार नए और मजेदार खेल नहीं किए जाते। कुछ स्थितियां बार-बार दोहराई जाती हैं। गलत पहचान से पैदा होने वाली कॉमेडी में काफी गुंजाइश थी, लेकिन कहानी उस संभावनाओं को पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती। फिल्म में कुछ वन-लाइनर्स हंसाते हैं, लेकिन कई जगह हास्य जरूरत से ज्यादा साधारण और जबरदस्ती का लगता है। खासकर फार्ट जोक्स और टॉयलेट ह्यूमर हर दर्शक को पसंद आए, यह जरूरी नहीं। फिल्म का दूसरा हिस्सा कुछ जगह खिंचता हुआ महसूस होता है और क्लाइमैक्स भी बहुत ज्यादा चौंकाता नहीं है। टेक्निकल तौर पर फिल्म ठीक-ठाक है। सिनेमैटोग्राफी कहानी के हिसाब से काम करती है और प्रोडक्शन डिजाइन फिल्म के मिडिल क्लास माहौल को सपोर्ट करता है। एडिटिंग पहले हिस्से में ठीक रहती है, लेकिन बाद के हिस्से में कुछ सीन और छोटे किए जा सकते थे। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का म्यूजिक कहानी पर हावी नहीं होता और ज्यादातर बैकग्राउंड तक ही सीमित रहता है। कोई ऐसा गाना नहीं है जो फिल्म देखने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर कॉमेडी और क्राइम वाले हिस्सों को सपोर्ट करता है और फिल्म के माहौल के हिसाब से ठीक बैठता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? ‘जीवन या भीमा कॉन?’ के पास एक ऐसा आइडिया है, जिससे एक शानदार कॉमेडी ऑफ एरर्स बनाई जा सकती थी। कलाकार भी अच्छे हैं और अरशद वारसी फिल्म को लगातार संभालते नजर आते हैं। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, दोहराए गए मजाक, कुछ जबरदस्ती के जोक्स और अनुमान लगाने लायक क्लाइमैक्स फिल्म को उस स्तर तक नहीं पहुंचने देते, जहां यह यादगार कॉमेडी बन सके। फिर भी अगर आप बिना ज्यादा उम्मीद के हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो फिल्म एक बार मनोरंजन कर सकती है। मसाला मौजूद है, कलाकार भी दमदार हैं, बस कहानी की आंच थोड़ी और तेज होती तो स्वाद काफी बेहतर होता।
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