US Canada trade War: अमेरिका-कनाडा ट्रेड डील फेल होने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, कहा- 'कनाडा बिना राज्य बने उसके फायदे उठाना चाहता है'
US Canada trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता (ट्रेड डील) इस हफ्ते अचानक विफल हो गया। इस डील के टूटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पड़ोसी देश कनाडा पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने कहा कि ओटावा (कनाडा) अमेरिका का हिस्सा बने बिना एक राज्य होने के सभी लाभ उठाना चाहता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कनाडा पिछले कई वर्षों से अमेरिकी नागरिकों और किसानों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ट्रंप का तीखा हमला और 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट
80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "कनाडा बिना एक राज्य बने उसके सारे फायदे उठाना चाहता है।" उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने हमारे महान किसानों पर कई सालों तक भारी-भरकम टैरिफ थोपे हैं। अब और नहीं।"
बता दें कि इस ट्रेड डील के फेल होने के बाद वाशिंगटन ने लगभग 20 अरब डॉलर के कनाडाई उत्पादों पर 50 प्रतिशत भारी टैरिफ लगा दिया है।
President Trump just called out Canada for wanting the benefits of being a U.S. state without actually being one. He said Canada has charged American farmers massive tariffs for years. No more free rides. Trump made it clear the unfair treatment ends now. America First means… pic.twitter.com/nq5G26PCOM
— Commentary Donald J. Trump Posts From Truth Social (@TrumpDailyPosts) August 23, 2026
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की प्रतिक्रिया
अमेरिका के इस कदम पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डील टूटने के लिए अमेरिकियों द्वारा किए गए 'अंतिम समय के बदलावों' को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरफ से जो नई शर्तें रखी गईं, वे पूरी तरह से "अनुचित और अव्यवहारिक" थीं, जिससे किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कार्नी ने शनिवार को कहा था, "हाल के दिनों में अमेरिका ने ऐसी शर्तें पेश कीं जो अव्यवहारिक और अनुचित थीं, और कनाडा के लिए मिलने वाले फायदों को कमजोर करती थीं। हम उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते और न ही उनकी मांगें मानेंगे।"
क्यों टूटी यह ट्रेड डील?
कनाडा की ओर से ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमिनियम के क्षेत्र में ट्रंप प्रशासन से राहत की मांग की जा रही थी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमियन ग्रीर के अनुसार, वाशिंगटन इन क्षेत्रों में टैरिफ घटाने पर सहमत हो गया था, जिससे कनाडा को किसी भी व्यापारिक साझीदार की तुलना में सबसे अधिक प्राथमिकता मिलती। हालांकि, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि समझौता इसलिए विफल हुआ क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने कनाडा के अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे।
इसके अलावा, अमेरिकी वार्ताकारों द्वारा फ्रेंच भाषा और पूर्वी कनाडाई प्रांत 'क्यूबेक संस्कृति' को लेकर दी गई अस्वीकार्य धमकियों ने भी विवाद को और बढ़ा दिया। इस बढ़ते ट्रेड वॉर को लेकर अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों और मिनेसोटा, न्यूयॉर्क तथा वाशिंगटन जैसे सीमावर्ती राज्यों के गवर्नरों ने तीखी नाराजगी जताई है और ट्रंप की नीतियों को अमेरिका में महंगाई बढ़ाने वाला बताया है। दोनों देशों के बीच अब यूएसएमसीए (USMCA) समझौते के संशोधनों को लेकर भी गतिरोध बना हुआ है, जबकि ट्रंप के बयानों ने कनाडाई नागरिकों को और नाराज कर दिया है।
Japan Earthquake: जापान में भूकंप से कांपी धरती, 23 लोग घायल; टोक्यो तक महसूस हुए झटके
जापान में एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को दहला दिया। रविवार तड़के पूर्वी जापान और राजधानी टोक्यो के आसपास धरती हिलने लगी। अचानक आए झटकों से उस समय ज्यादातर लोग सो रहे थे और कई लोग घबराकर अपने बिस्तरों से उठ गए।
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 5.9 थी। वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसकी तीव्रता 5.8 दर्ज की। भूकंप का केंद्र इबाराकी प्रांत के दक्षिणी हिस्से में जमीन से करीब 70 किलोमीटर नीचे बताया गया है।
23 लोगों के घायल होने की सूचना
भूकंप के बाद चार प्रांतों में कुल 23 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। साइतामा और कानागावा में 9-9 लोग घायल हुए, जबकि चिबा में 4 और इबाराकी में एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना है।
अधिकांश लोगों को मामूली चोटें आई हैं। हालांकि कानागावा के योकोहामा में 80 साल से अधिक उम्र की एक महिला बिस्तर से गिर गईं, जिससे उनके कूल्हे में गंभीर चोट आई। भूकंप के झटकों के दौरान कुछ लोग गिर पड़े या घर के फर्नीचर और दरवाजों से टकरा गए।
सुनामी का खतरा नहीं
भूकंप के बाद सबसे बड़ी राहत की खबर यह रही कि सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया गया। प्रशासन ने हालात पर नजर बनाए रखी और संभावित नुकसान का आकलन शुरू किया।
भूकंप की वजह से टोक्यो और नारिता एयरपोर्ट के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों सहित कुछ स्थानीय रेल सेवाओं पर असर पड़ा और कई ट्रेनें देरी से चलीं। हालांकि जापान की तेज रफ्तार शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं।
सड़क पर भर गया पानी
टोक्यो के कोटो वार्ड में भूकंप के झटकों के बाद भूमिगत पानी की एक पाइप फट गई। इससे सड़क पर पानी जमा हो गया था। बाद में पाइप की मरम्मत कर स्थिति सामान्य कर दी गई। भूकंप के बाद करीब 460 घरों की बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई थी। हालांकि रविवार सुबह तक बिजली की सप्लाई बहाल कर दी गई।
परमाणु संयंत्रों में सब कुछ सामान्य
भूकंप के बाद जापान के परमाणु नियामक प्राधिकरण ने देश के परमाणु संयंत्रों और परमाणु सामग्री से जुड़ी अन्य सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की। प्राधिकरण के मुताबिक किसी भी परमाणु संयंत्र में कोई असामान्यता नहीं मिली। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भी संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए सरकारी टास्क फोर्स का गठन किया है।
पहले भी बड़े भूकंप से दहला था जापान
जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। इससे पहले जुलाई में क्यूशू द्वीप के कुमामोतो क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। उस घटना में 38 लोगों की मौत हुई थी और 364 लोग घायल हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार उस भूकंप के बाद 1,500 से ज्यादा इमारतें पूरी तरह ढह गई थीं, जबकि करीब 20 हजार इमारतों को नुकसान पहुंचा था।
ताजा भूकंप ने एक बार फिर जापान में भूकंपीय गतिविधियों और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है। फिलहाल अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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