सलमान खान ने कैफे को दी चेतावनी:बोले- हाइजीन मेंटेन रखना, वरना उनको भेज दूंगा; क्या तुकाराम मुंढे की ओर किया इशारा
सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे 'द टक शॉप एट सेवियोज' का वीडियो शुक्रवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है। सलमान ने अपने मशहूर “इट्स डन, ब्रो” कैचफ्रेज को भी अलग अंदाज में इस्तेमाल किया। उन्होंने मैसेज के आखिर में “इट्स डन, सिस” लिखा। सलमान की चेतावनी महाराष्ट्र में खाने-पीने की जगहों पर बढ़ी निगरानी के बीच आई। पिछले कुछ महीनों में FDA ने फूड सेफ्टी, हाइजीन और लाइसेंस से जुड़े उल्लंघनों को लेकर रेस्टोरेंट्स और दूसरे संस्थानों पर जांच और कार्रवाई तेज की है। तुकाराम मुंढे ने 26 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA कमिश्नर का पद संभाला था। उनके पद संभालने के बाद विभाग ने रेस्टोरेंट्स, होटल्स, क्लब्स, फास्ट-फूड आउटलेट्स और संस्थागत किचन में जांच बढ़ाई है। मुंढे के कमिश्नर बनने के शुरुआती दो महीनों में FDA ने 3,000 से ज्यादा जांच कीं। करीब 165 फूड संस्थानों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। इस कार्रवाई में खराब हाइजीन, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और जरूरी लाइसेंस के बिना कारोबार करने जैसी शिकायतों पर ध्यान दिया गया। मुंढे के सख्त रवैये के चलते सोशल मीडिया पर उन्हें रियल-लाइफ सिंघम का नाम भी मिला है। स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों को संबोधित करते हुए मुंढे ने फूड सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ की जरूरत पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “मेरा मानना है कि स्वस्थ देश के लिए स्वस्थ लोगों का होना जरूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए अच्छा खाना और दवाइयां जरूरी हैं। इसके लिए रेगुलेटर्स को इस लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए।” FDA ने शाहरुख, अजय और टाइगर को नोटिस भेजा गौरतलब है कि महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इन तीनों अभिनेताओं ने 'विमल इलायची' का विज्ञापन किया था। इस मामले में अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को अपना जवाब भेज दिया। वहीं, शाहरुख खान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। तीनों एक्टर्स को नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया था। 'सीएनएन-न्यूज18' की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटर को अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के जवाब मिल गए हैं। शाहरुख खान का जवाब अभी तक नहीं मिला है और FDA उनके रिप्लाई का इंतजार कर रहा है। रेगुलेटर ने सवाल उठाया है कि क्या यह विज्ञापन विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के बराबर हो सकता है। FDA का कहना है कि भले ही विज्ञापन इलायची प्रोडक्ट के लिए है, लेकिन इसकी ब्रांडिंग पान मसाला ब्रांड से अप्रत्यक्ष कनेक्शन बना सकती है। तीनों एक्टर्स से मांगे गए थे सबूत FDA ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ से इस बात के सबूत मांगे थे कि उन्होंने विमल इलायची का जो विज्ञापन किया है, वह पूरी तरह अलग प्रोडक्ट है। इसके साथ ही उनसे यह भी साबित करने को कहा गया था कि यह विज्ञापन बैन किए गए विमल पान मसाला और तंबाकू के दूसरे प्रोडक्ट्स के प्रमोशन के लिए बनाया गया सरोगेट विज्ञापन नहीं है। FDA ने उनसे विज्ञापन से जुड़े एग्रीमेंट, कैंपेन ब्रीफ और अन्य दस्तावेज भी मांगे थे। शाहरुख ने जवाब नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ का जवाब मिलने के बाद अब FDA शाहरुख खान के जवाब का इंतजार कर रहा है। शाहरुख की तरफ से जवाब नहीं मिलने पर FDA क्या कार्रवाई करेगा, यह अभी साफ नहीं है। जानकारी के मुताबिक, समय सीमा तक जवाब न देने या जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भ्रामक खाद्य विज्ञापन के मामले में FSS एक्ट की धारा 53 के तहत 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
Nepal Flood Science Analysis: लगातार बारिश नहीं, एवलांच बना आपदा का मुख्य कारण; वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट डेटा से किया खुलासा
पड़ोसी देश नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और रिहायशी इलाकों को तबाह कर दिया था। शुरुआत में इसे अत्यधिक मानसूनी बारिश या बादल फटने की घटना माना जा रहा था, लेकिन वैज्ञानिकों और रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञों की जांच में वास्तविक कारण कुछ और ही निकला।
उच्च-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी के अध्ययन से पुष्टि हुई है कि 7,227 मीटर ऊंची लांगतांग लिरुंग चोटी के ऊपरी हिस्से में बड़े पैमाने पर भूगर्भीय हलचल और हिमस्खलन हुआ था, जिसने इस तबाही की पटकथा लिखी।
लांगतांग लिरुंग से गिरा बर्फ और मलबे का विशाल पहाड़
सैटेलाइट विश्लेषण के अनुसार, लांगतांग लिरुंग पर्वत की खड़ी ढलानों पर मौजूद लटकते ग्लेशियर का एक विशाल हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे की संकरी घाटी में आ गिरा। ग्लेशियर के टूटने के साथ ही हजारों टन भारी बोल्डर्स, मिट्टी और चट्टानी अवसाद तीव्र गति से नीचे बहा। इस भारी मलबे ने नदी के मुख्य उद्गम और ऊपरी बहाव क्षेत्र में एक अस्थायी प्राकृतिक अवरोध यानी कच्चा बांध तैयार कर दिया, जिसके पीछे विशाल मात्रा में पानी तेजी से जमा होता चला गया।
प्राकृतिक बांध फटने से बना प्रलयंकारी फ्लैश फ्लड
जैसे-जैसे पानी का दबाव बढ़ता गया, मलबे और बर्फ की यह कमजोर दीवार पानी के प्रचंड वेग को संभाल नहीं सकी और अचानक टूट गई। इसके टूटते ही संकरी घाटियों में पानी की कई मीटर ऊंची विशाल लहरें उठीं, जिसने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में भयानक फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया। पानी के साथ तेज गति से बहे भारी पत्थरों और मलबे ने रास्ते में आने वाले हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स, पुलों, पक्की सड़कों और स्थानीय बाजारों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
जलवायु परिवर्तन और हिमालयी ग्लेशियरों की अस्थिरता
जलवायु वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण हिमालयी ग्लेशियरों का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। पहले आए भूकंपों और मौसमीय बदलावों की वजह से लांगतांग क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना काफी संवेदनशील हो चुकी है। तापमान के अचानक बढ़ने और चरम मौसमी घटनाओं के चलते ग्लेशियरों के अचानक टूटने और हिमस्खलन की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो निचले इलाकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
भविष्य की सुरक्षा के लिए रियल-टाइम निगरानी की दरकार
वैज्ञानिकों ने इस घटना के बाद जोर देकर कहा है कि हिमालयी नदी घाटियों में जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए ग्लेशियरों और संभावित एवलांच जोन की उपग्रहों के जरिए लगातार 24x7 निगरानी जरूरी है। जब तक संवेदनशील ग्लेशियर क्षेत्रों में रडार और अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित नहीं किए जाते, तब तक सीमावर्ती नदियों के किनारे स्थित ऊर्जा परियोजनाओं, जलविद्युत संयंत्रों और कस्बों पर अचानक आने वाली ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बना रहेगा।
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