मनु भाकर पर टूटा दुखों का पहाड़, कोच के बाद अब परिवार के सबसे करीबी सदस्य का हुआ निधन
ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर पर दुखों का पहाड़ टूट गया है. मनु भाकर की दादी दया कौर की रोहतक में निधन हो गया. उन्हें सीने में दर्द की शिकायत पर एक निजी अस्पताल में एडमिट कराया गया था. मनु की दादी 84 साल की थीं. उनकी दादी का जब निधन हुआ तो मनु अपनी मां के साथ भोपाल में एशियन गेम्स के लिए ट्रेनिंग कर रही थीं.
गणेश चतुर्थी 2026: गणपति की प्रतिमा घर लाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का पर्व इस साल 14 सितंबर 2026 से शुरू होगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाले इस उत्सव को लेकर देशभर में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु विधि-विधान से गणपति बप्पा को घर में विराजमान करते हैं और अगले कुछ दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
0गणपति उत्सव के दौरान भगवान गणेश को उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाया जाता है और परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में इस पर्व की विशेष रौनक देखने को मिलती है। आमतौर पर उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ होता है। अगर आप भी इस गणेश चतुर्थी अपने घर में गणपति की स्थापना करने की तैयारी कर रहे हैं, तो प्रतिमा का चयन करते समय कुछ पारंपरिक मान्यताओं का ध्यान रखा जा सकता है।
गणेश जी की प्रतिमा खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
सूंड की दिशा पर दें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में स्थापित करने के लिए बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा को शुभ माना जाता है। ऐसी प्रतिमा को गृहस्थ जीवन के लिए अनुकूल माना जाता है और भक्त सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना से इसकी स्थापना करते हैं। सीधी सूंड वाली गणपति प्रतिमा को भी कुछ परंपराओं में घर के लिए उपयुक्त माना जाता है। हालांकि दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा की पूजा से जुड़े नियम अपेक्षाकृत अधिक विशेष माने जाते हैं।
मूषक और मोदक वाली प्रतिमा चुनें
गणेश जी की प्रतिमा में उनका वाहन मूषक और हाथ में मोदक होना शुभ प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मोदक को ज्ञान और आनंद से जोड़ा जाता है, जबकि मूषक को भगवान गणेश का वाहन माना गया है। इसी वजह से घर के लिए प्रतिमा लेते समय इन प्रतीकों वाली पारंपरिक प्रतिमा को प्राथमिकता दी जा सकती है।
प्रतिमा के रंग का भी रखें ध्यान
गणपति की प्रतिमा के रंग को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। लाल या सिंदूरी रंग की प्रतिमा को ऊर्जा, उत्साह और सफलता का प्रतीक माना जाता है। वहीं सफेद रंग की गणेश प्रतिमा को शांति, ज्ञान और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए अपनी पसंद और पूजा की परंपरा के अनुसार प्रतिमा का रंग चुना जा सकता है।
बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा को दें प्राथमिकता
घर में गणपति की स्थापना के लिए बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह स्थिरता, सुख और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक है। प्रतिमा खरीदते समय यह भी देख लें कि भगवान गणेश का स्वरूप शांत और प्रसन्न मुद्रा में हो।
पारंपरिक स्वरूप वाली प्रतिमा चुनें
गणेश उत्सव के दौरान बाजार में अलग-अलग डिजाइन और आकर्षक रूपों वाली प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। घर की पूजा के लिए पारंपरिक स्वरूप वाली प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। प्रतिमा का चयन करते समय केवल उसकी सुंदरता ही नहीं, बल्कि उसकी धार्मिक एवं पारंपरिक विशेषताओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
कैसी गणेश प्रतिमा घर में लाने से बचें?
- खंडित या टूटी हुई प्रतिमा घर में स्थापित करने से बचें।
- प्रतिमा में भगवान गणेश का कोई अंग क्षतिग्रस्त न हो, यह खरीदते समय अच्छी तरह जांच लें।
- घर की नियमित पूजा के लिए बहुत अधिक फैंसी या असामान्य आकार की प्रतिमा के बजाय पारंपरिक स्वरूप वाली प्रतिमा चुनना बेहतर माना जाता है।
- दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा की पूजा विशेष विधि और नियमों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए यदि आप सामान्य गृहस्थ पूजा के लिए प्रतिमा ला रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें।
- पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक मिट्टी से बनी इको-फ्रेंडली प्रतिमा को प्राथमिकता देना अच्छा विकल्प है। इससे गणपति विसर्जन के बाद जलस्रोतों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है
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