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Swachh Vayu Sarvekshan में Lucknow अव्वल, Rourkela और कलिंग नगर ने भी मारी बाजी

नयी दिल्ली, सात सितंबर ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (एनसीएपी) के तहत उत्तर प्रदेश के लखनऊ और ओडिशा के राउरकेला एवं कलिंग नगर ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार के पांचवें संस्करण में इन शहरों के प्रयासों को सम्मानित किया। देश भर के शहरों और कस्बों को 2022-23 में जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण फ्रेमवर्क के आधार पर रैंक प्रदान किया गया।

इस फ्रेमवर्क में सड़क की धूल, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और औद्योगिक प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने के उपाय बताए गए थे। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों या कस्बों की श्रेणी में लखनऊ शीर्ष पर रहा, जिसके बाद मध्यप्रदेश के इंदौर और जबलपुर का स्थान रहा। इस श्रेणी में राजस्थान का कोटा, पश्चिम बंगाल का कोलकाता और तमिलनाडु का मदुरै सबसे निचले पायदान पर रहे।

वहीं, तीन लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों या कस्बों की श्रेणी में, राउरकेला के बाद उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद और आंध्र प्रदेश का गुंटूर रहा। इस श्रेणी में आखिरी तीन शहर हैं-- गयाजी (बिहार), गुलबर्ग (कर्नाटक) और जालंधर (पंजाब)। तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों या कस्बों की श्रेणी में कलिंग नगर सबसे ऊपर रहा।

इसके बाद ओडिशा के अंगुल और तलचर का स्थान है। सबसे निचले पायदान पर नगालैंड का कोहिमा, पंजाब का डेरा बस्सी और मेघालय का बर्नीहाट है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने एक बयान में कहा, ‘‘पुरस्कार पाने वालों ने यह प्रदर्शित किया है कि स्वच्छ हवा कोई आकांक्षा नहीं, बल्कि एक ऐसा व्यावहारिक लक्ष्य है, जिसे सही योजना और जमीनी स्तर पर अमल करके हासिल किया जा सकता है।’’ केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि एनसीएपी ने वित्त वर्ष 2017-18 के स्तर की तुलना में 2025-26 में ‘पीएम10’ के स्तर को कम करने के मामले में सकारात्मक नतीजे प्रदर्शित किये हैं।

पीएम10 से अभिप्राय हवा में मौजूद 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कणों से है, जो सांस के जरिये फेफड़े में प्रवेश कर सकते हैं।

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Maharashtra में Maratha Caste Certificate के लिए 10 सितंबर से लगेंगे शिविर

मुंबई, सात सितंबर महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने सोमवार को कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे की अध्यक्ष में गठित समिति द्वारा तलाश किये गए 58 लाख रिकॉर्ड ग्राम पंचायतों में प्रदर्शित किये जाएंगे और मराठा समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने में मदद के लिए 10 से 17 सितंबर तक शिविर लगाए जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा मराठा आरक्षण को लेकर गठित उप-समिति के अध्यक्ष विपाटिल ने संभागीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उचित समन्वय सुनिश्चित करें और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लें। मंत्री मराठवाड़ा के धाराशिव, बीड, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, हिंगोली, लातूर और जालना जिलों के जिलाधिकारियों और अप संभागीय अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर किए गए फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की।

उन्होंने जाति सत्यापन प्रमाण-पत्र जारी करने, कुनबी रिकॉर्ड का पता लगाने और प्राप्त आवेदनों से जुड़े जिलेवार आंकड़ों की समीक्षा की। जिलाधिकारियों ने अब तक की गई कार्रवाई और लागू किए गए उपायों का विवरण मंत्री के समक्ष रखा। विखे पाटिल ने कहा कि परभणी जिला कलेक्ट्रेट ने मिले सभी दस्तावेज प्रकाशित कर दिए हैं और दूसरे जिलों को भी ऐसा ही करने और अपनी वेबसाइट पर विवरण प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

विखे पाटिल ने कहा कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त)शिंदे समिति द्वारा तलाशे गए 58 लाख रिकॉर्ड ग्राम पंचायतों में प्रदर्शित किये जाएंगे। साथ ही, उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि 10 से 17 सितंबर तक शिविर लगाने के लिए उचित इंतज़ाम किए जाएं, ताकि मराठा समुदाय के लोग प्रमाण पत्र के लिए जरूरी कागज़ी कार्रवाई पूरी कर सकें। उन्होंने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार प्रमाण पत्र जारी करते समय कानून का पालन करेगी।

उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा में लगभग 3.5 लाख कुनबी प्रमाण-पत्र वितरित किये गए हैं और पात्र लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र जारी करते समय नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। विखे पाटिल ने कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा सरकार पर मराठा आरक्षण को लेकर केवल आश्वासन देने के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि पिछले आंदोलन के दौरान सामने रखे गए अधिकतर मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है और बाकी मांगों पर आगे का रास्ता निकालने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे के साथ बातचीत करेगी, जो जालना में अनशन कर रहे हैं।

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  Sports

Pakistan Cricket Chaos: आकिब जावेद पर बरसे अजहर अली, बोले- हर फैसला पड़ रहा उल्टा, नहीं संभल रही पाकिस्तान क्रिकेट की हालत

Pakistan Cricket Chaos: पाकिस्तान क्रिकेट में मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में पाकिस्तान 0-2 से पीछे है। हेडिंग्ले और लॉर्ड्स में मिली हार के बाद अब 9 सितंबर से एजबेस्टन में आखिरी टेस्ट खेला जाना है। इस मैच से पहले पूर्व पाकिस्तान कप्तान अजहर अली ने PCB के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद पर जमकर हमला बोला है।

अजहर का मानना है कि पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति के लिए आकिब को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल से लगातार गलत फैसले लिए जा रहे हैं। अजहर ने आकिब के हालिया इंटरव्यू का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वह अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेने के बजाय सरफराज अहमद और बाबर आजम पर दोष डाल रहे हैं।

अजहर ने कहा- उनका हर फैसला उल्टा पड़ जाता है और फिर वह कहते हैं कि इसमें मेरी गलती नहीं है। पहले खुद को देखना चाहिए। अगर आप टीम को संभाल नहीं सकते और पाकिस्तान क्रिकेट में बदलाव नहीं ला सकते तो आपको हट जाना चाहिए।

पाकिस्तान की परेशानी सिर्फ इंग्लैंड सीरीज तक सीमित नहीं है। टीम में लगातार कप्तान, कोच और मैनेजमेंट बदलते रहे हैं। अजहर के मुताबिक कभी पाकिस्तान की पहचान उसकी अनिश्चितता हुआ करती थी। टीम एक दिन 46 रन पर ऑलआउट हो सकती थी तो अगले ही दिन किसी मजबूत टीम को हरा सकती थी। लेकिन अब हालात इतने खराब हैं कि टीम ने अपनी वही अनिश्चितता भी खो दी है और नकारात्मक तरीके से लगातार हार रही है।

अजहर ने लंबे समय की योजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को तेज गेंदबाजों की नई पौध तैयार करने पर काम करना होगा। उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तेज गेंदबाजों को तैयार करने के लिए लगातार प्रयास हुए और इसका फायदा टीम को मिला।

उन्होंने अंडर-19 क्रिकेट की स्थिति पर भी सवाल उठाए। अजहर के मुताबिक पाकिस्तान को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें लोगों को 3-4 साल का समय देकर उनका समर्थन किया जाए।

बाबर आजम को लेकर अजहर ने उनका बचाव किया। उन्होंने कहा कि बाबर पर बहुत ज्यादा दबाव रहा है और लगातार आलोचना ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया। अजहर ने माना कि बाबर मानसिक रूप से मिस्बाह-उल-हक और यूनिस खान जितने मजबूत नहीं हैं, लेकिन उन्हें बेहतर माहौल देने की जरूरत है।

वहीं एजबेस्टन टेस्ट को लेकर अजहर ज्यादा उम्मीद नहीं जता रहे। उन्होंने पाकिस्तान खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें देखकर नहीं लगता कि टीम अच्छी स्थिति में है। अजहर ने यहां तक कहा कि उन्हें हैरानी होगी अगर आखिरी टेस्ट वास्तव में कड़ा मुकाबला बन पाता है।

Mon, 07 Sep 2026 22:40:11 +0530

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