Congress के वरिष्ठ नेता Jose Kuttiani का 87 वर्ष की आयु में निधन
इडुक्की (केरलम), सात सितंबर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक जोस कुट्टियानी का सोमवार को कोलेनचेरी के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि उम्र संबंधी बीमारियों को लेकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कुट्टियानी 87 वर्ष के थे। कुट्टियानी ने छह दशक पहले कांग्रेस के छात्र संगठन केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। जिला बनने के बाद वह इडुक्की जिला कांग्रेस कमेटी के पहले अध्यक्ष बने थे।
उन्होंने 1980 और 1982 के विधानसभा चुनावों में इडुक्की क्षेत्र से चुनाव जीता था। स्नातक और एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले कुट्टियानी उच्च न्यायालय के अधिवक्ता भी रहे। उन्होंने 1982 से 1984 तक याचिका समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
इडुक्की जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के अलावा वह सहकारिता क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वह नयी दिल्ली स्थित नेशनल कोऑपरेटिव हाउसिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्वाचित निदेशक और अध्यक्ष रहे। इसके अलावा उन्होंने ‘नेफेड’ के उपाध्यक्ष तथा ‘इफको’ के निदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं।
पार्टी नेताओं ने कहा कि इडुक्की में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन और कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कुट्टियानी के निधन पर शोक व्यक्त किया। जोसेफ ने कहा कि कुट्टियानी ने इडुक्की में कांग्रेस आंदोलन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा, “संगठन के क्षेत्र में और एक जनसेवक के रूप में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।” जोसेफ ने कहा कि छात्र जीवन से ही उनके कुट्टियानी के साथ मधुर संबंध थे। उन्होंने कहा, “जोस कुट्टियानी का निधन कांग्रेस आंदोलन और इडुक्की के लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है।
Maharashtra Governor के फर्जी लेटरहेड से Railway टिकट रैकेट चलाने वाले भाइयों की जमानत खारिज
मुंबई, सात सितंबर मुंबई की एक अदालत ने महाराष्ट्र के राज्यपाल कार्यालय के लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर का फर्जी इस्तेमाल करके रेलवे आरक्षण का रैकेट चलाने के आरोपी दो भाइयों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.बी. डिगे ने तीन सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि यह एक ‘‘गंभीर अपराध’’ है और इस चरण में जमानत देने से निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच प्रभावित हो सकती है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस रैकेट का पता तब चला जब रेलवे विभाग ने राज्यपाल कार्यालय (लोक भवन) की ओर से भेजे गए वीआईपी (अति विशिष्ट व्यक्ति) श्रेणी के तहत आरक्षण के अनुरोधों के सत्यापन की मांग की।
लोक भवन के एक सहायक ने पाया कि आरक्षण पर्ची में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर, लेटरहेड और सरकारी मुहरें फर्जी थीं। इसके बाद मालाबार हिल थाने में मामला दर्ज किया गया। बाद में पुलिस ने धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और सबूत मिटाने जैसे अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत घाटकोपर के रहने वाले दो भाइयों -अमरीश ईश्वरलाल ठक्कर (41) और सागर ईश्वरलाल ठक्कर (32)- को गिरफ्तार किया।
अतिरिक्त लोक अभियोजक वीणा शेलार ने अदालत को बताया कि अमरीश ठक्कर ने राज्यपाल के निजी सहायक (पीए) के आधिकारिक लेटरहेड की डिजिटल प्रतियां हासिल कीं और सह-आरोपियों की मदद से नकली रबर स्टांप तैयार करवाए। पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 नकली लेटरहेड, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और कई नकली रबर स्टांप बरामद किए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अंजलि पाटिल ने दलील दी कि आरोपियों को झूठे मामले में फंसाया गया है।
पाटिल ने दलील दी कि शुरुआती प्राथमिकी में उनके नाम नहीं थे और पुलिस ने सभी जरूरी चीजें पहले ही जब्त कर ली थीं, जिनमें दस्तावेज और हस्ताक्षर के नमूने शामिल हैं। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या फरार हो सकते हैं।
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