'मेरा भाई कहां है?' 30 घंटे बाद भी नहीं मिला पवन, अस्पताल दर अस्पताल भटक रही बहन
सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत ढहने के 30 घंटे बाद भी पवन नाम के एक छात्र का कोई सुराग नहीं मिल रहा है. सोशल मीडिया से हादसे की खबर पाकर पहुंची बहन प्रियांशी दर-दर भटक रही है. एम्स ट्रॉमा सेंटर की खाक छानने के बाद भी भाई का पता न चलने पर उसकी चीखें हर दिल को दहला रही हैं.
मोती बाग गांव से Gen-Z के अड्डे तक... 1973 के एक फैसले ने कैसे चमका दी किस्मत? जानें सत्य निकेतन की कहानी
Satya Niketan History: कभी धूल उड़ाता गुमनाम मोती बाग गांव आज दिल्ली के युवाओं का अल्टीमेट अड्डा कैसे बन गया? 1973 में DU साउथ कैंपस की एंट्री ने पूरा सीन ही पलट दिया. 60-65 गज के मकान रातों-रात 5 मंजिला पीजी और कूल कैफे में तब्दील हो गए. लेकिन इस किलर वाइब के पीछे छुपा है अवैध निर्माण का वो खौफनाक सच जो आज सभी को परेशान कर रहा है.
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