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Ground Report: सत्य निकेतन हादसे में 7 की मौत, अभी और मौतें होनी बाकी है?
Ground Report: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर भ्रष्टाचार और लालच के गठजोड़ ने मासूम जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है. दक्षिण दिल्ली के सत्यनिकेतन इलाके में भरभराकर गिरी एक बहुमंजिला इमारत ने यह साफ कर दिया है कि यहां नियम और कानून केवल कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए बने हैं. देश के कोने-कोने से अपने बच्चों को बड़ा आदमी बनाने का सपना देखकर माता-पिता दिल्ली भेजते हैं, लेकिन यहां उन्हें सपनों की जगह मौत के साए में रहने को मजबूर किया जाता है.
लोहे की पतली छड़ों, कमजोर पिलर और लकड़ी के पट्टों के सहारे छह-छह मंजिला इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं और उनमें चल रहे होते हैं अवैध पीजी. सत्यनिकेतन का यह हादसा अकेला नहीं है, बल्कि यह उस सड़ चुके प्रशासनिक ढांचे का जीता जागता सबूत है जिसकी नाक के नीचे वर्षों से अवैध निर्माण का खेल बदस्तूर जारी है.
बीस साल बाद भी नहीं बदले हालात
साल 2006 में बनी तेजेंद्र खन्ना कमेटी ने साफ तौर पर चेताया था कि दिल्ली में सत्तर से अस्सी प्रतिशत निर्माण कार्य नियमों को ताक पर रखकर किए जाते हैं. आज दो दशक बीत जाने के बाद भी राजधानी में रत्ती भर बदलाव नहीं आया है, बल्कि हालात पहले से ज्यादा बदतर हो चुके हैं. नीति निर्माता साल 2047 तक दिल्ली को एक विकसित राज्य के तौर पर पेश करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बीस साल पुरानी सुरक्षा सिफारिशें सरकारी अलमारियों में धूल फांक रही हैं.
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