RBI Re-KYC Deadline 15 September: छोटे दुकानदारों के QR कोड भुगतानों पर संकट; पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI से मांगी और मोहलत
देशभर में चाय के ठेले, सब्जी मंडी, किराना स्टोर और छोटे विक्रेताओं के पास QR कोड से भुगतान करना आम दिनचर्या बन चुका है। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए और कड़े नियमों के तहत पेमेंट एग्रीगेटर्स को अपने नेटवर्क से जुड़े सभी मर्चेंट्स की री-केवाईसी 15 सितंबर 2026 तक पूरी करनी है। यदि तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो कई अनौपचारिक और छोटे दुकानदारों के QR कोड आधारित UPI भुगतान अस्थायी रूप से प्रभावित या सस्पेंड हो सकते हैं।
30-35% छोटे कारोबारियों के प्रभावित होने की आशंका
उद्योग जगत और फिनटेक एग्रीगेटर्स के अनुसार, इस समयसीमा का सबसे अधिक प्रभाव छोटे और असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों पर पड़ सकता है। अनुमान है कि करीब 30 से 35 प्रतिशत छोटे व्यापारी और लगभग 10 लाख छोटे कारोबारी इस डेडलाइन के जोखिम के दायरे में हैं। कंपनियों का मानना है कि तय तारीख तक करीब 80 प्रतिशत री-केवाईसी ही पूरी हो पाएगी, जिसके कारण पेमेंट एग्रीगेटरों जैसे पेटीएम, फोनपे, गूगल पे ने आरबीआई से अतिरिक्त समय देने की मांग की है।
डिजिटल भुगतान बंद नहीं होगा, छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा असर
इस पूरे मामले पर विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि भारत का समग्र डिजिटल भुगतान और नेशनल यूपीआई नेटवर्क बंद नहीं होगा। बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, शॉपिंग मॉल्स और संगठित रिटेलर्स के भुगतान सामान्य रूप से चलते रहेंगे। समस्या मुख्य रूप से उन स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों के साथ है जिनके पास पूरे दस्तावेज या भौतिक सत्यापन के साधन उपलब्ध कराने में कठिनाई आ रही है।
फिजिकल और डिजिटल वेरिफिकेशन बनी सबसे बड़ी चुनौती
आरबीआई के नियमों के मुताबिक केवल डिजिटल कागजात जमा करना ही पर्याप्त नहीं है। कुछ श्रेणियों में पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों के अपने कर्मचारियों द्वारा मर्चेंट के व्यापार स्थल का जाकर इन-पर्सन सत्यापन करना जरूरी है। आउटसोर्सिंग पर पाबंदी और फील्ड स्टाफ की सीमा के कारण फिनटेक कंपनियों के सामने देश के सुदूर इलाकों में फैले लाखों दुकानदारों का वेरिफिकेशन समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर और क्या करें?
अगर किसी छोटे दुकानदार की री-केवाईसी समय पर पूरी न होने की स्थिति में उनका QR कोड काम करना बंद कर देता है, तो ग्राहकों को ऑनलाइन UPI भुगतान करने में समस्या आ सकती है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों को नकद भुगतान का सहारा लेना पड़ सकता है। फिलहाल पैनिक होने की जरूरत नहीं है, लेकिन छोटे बाजारों या मंडियों में जाते समय सुरक्षा के तौर पर कुछ कैश साथ रखना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
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