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अमित शाह के दो दिनों के गोवा दौरे का अंतिम दिन आज, राजधानी पणजी में क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की करेंगे अध्यक्षता

केंद्रीय गहमंत्री अमित शाह सोमवार को गोवा के पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे. बैठक में क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और राज्यों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है. पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र के साथ केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं. क्षेत्रीय परिषदों का उद्देश्य और केंद्र के बीच सहयोग बढ़ाना और साझा हितों से जुड़े विषयों पर समन्वय करना शामिल है. 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को दो दिनों के दौरे पर गोवा गए थे. उनके दौरे के दौरान, पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के अलावा राज्य प्रशासन और शासन से जुड़े मुद्दों की समीक्षा भी की जा रही है. बैठक में संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे. मीटिंग में क्षेत्रीय स्तर पर विकास, प्रशासनिक समन्वय और राज्यों के बीच लंबित विषयों पर चर्चा बैठक के प्रमुख हिस्सों में शामिल हो सकती है. 

राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना

भारत में 5 क्षेत्रीय परिषदों का गठन राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत हुआ था. इन परिषदों का उद्देश्य राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना होगा. इन परिषदों का उद्देश्य राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना है. पश्चिमी क्षेत्रीय परिषदों में शामिल राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के साझा हितों से जुड़े हुए विषयों पर इस मंच के जरिए चर्चा होती है.

मुद्दों पर सभी संबंधित राज्यों की नजरें

पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में शामिल राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साझा हितों से जुड़े विषयों पर इस मंच के जरिए चर्चा की जाती है. अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक ऐसे वक्त में हुई, जब केंद्र और पश्चिमी राज्यों के बीच विकास, कानून-व्यवस्था, इंटरस्टेट कोऑर्डिनेशन को और मजबूत करने की जरूरत है. बैठक के दौरान, फैसलों और चर्चा में उठाए गए मुद्दों पर सभी संबंधित राज्यों की नजरें हैं. पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद का ये मंच राज्यों के बीच संवाद बढ़ाने और साझा समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. 

 

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सहारनपुर मस्जिद विवाद: अखिलेश यादव का 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रोका गया, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात


पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है क्योंकि समाजवादी पार्टी (सपा) के कई नेताओं को उनके प्रस्तावित सहारनपुर दौरे से ठीक पहले हाउस अरेस्ट (नज़रबंद) कर लिया गया है. यह पूरा विवाद सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद से जुड़ा है, जिसे हाल ही में अदालत के आदेश के बाद ढहा दिया गया था. मस्जिद परिसर में एक कुआं निकलने के बाद यह मामला और भी ज्यादा गरमा गया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर 23 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बनाया गया था. इस दल को सहारनपुर पहुंचकर मौके का मुआयना करना था और मंडलायुक्त से मुलाकात कर मस्जिद विध्वंस के मामले में जवाब मांगना था. लेकिन, किसी भी तरह की अशांति की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए. इकरा हसन, आशु मलिक और पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान समेत कई प्रमुख नेताओं को उनके आवास पर ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर लिया गया. प्रशासन की यह कार्रवाई केवल सहारनपुर तक ही सीमित नहीं रही. मुजफ्फरनगर, शामली और कैराना जैसे आस-पास के जिलों में भी सपा नेताओं और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को रोक दिया गया, ताकि वे विवादित स्थल की ओर न बढ़ सकें. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने सहारनपुर को छावनी में तब्दील कर दिया है. 

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  Sports

England से हार के बाद PCB का 'Clean Sweep' प्लान, Shoaib Akhtar बोले- 2 साल तक टीम से कोई उम्मीद नहीं

इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम का प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहने के बाद अब पूरा क्रिकेट ढांचा बदलाव के दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खत्म होने से पहले ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कई बड़े फैसले लिए हैं। इंग्लैंड ने पहले दोनों टेस्ट जीतकर सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से हार मिली थी, जबकि लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने 194 रन से बाजी मारी।

लगातार दो बड़ी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टीम और उसके सहयोगी दल में बड़े बदलाव किए हैं। सरफराज अहमद और उमर गुल को कोचिंग व्यवस्था से अलग कर दिया गया है। उनकी जगह माइक हेसन को टीम की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज एश्ले नॉफ्के को सहायक की भूमिका सौंपी गई है।

इसके अलावा तीसरे और अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की टीम में भी बड़ा बदलाव किया गया है। सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया गया है। इनमें अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान, इमाम-उल-हक और सलमान अली आगा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इस फैसले से संकेत मिल रहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अब मौजूदा खिलाड़ियों पर निर्भर रहने के बजाय युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी टीम में हो रहे इन बदलावों को लेकर अपनी राय रखी है। एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान अख्तर ने कहा कि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का मौजूदा खिलाड़ियों के एक बड़े हिस्से पर भरोसा लगभग खत्म हो चुका है। उनके अनुसार, बोर्ड अब इंग्लैंड में मिली हार को केवल एक खराब दौरे के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे टीम के व्यापक पुनर्निर्माण के मौके के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

शोएब अख्तर के मुताबिक, बोर्ड मौजूदा टीम को हटाकर नए और युवा खिलाड़ियों को आगे लाने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए खेलने की इच्छा रखने वाले नए खिलाड़ियों पर ध्यान दिया जा रहा है और भविष्य के लिए टीम तैयार करने की कोशिश हो रही है।

हालांकि, अख्तर ने इस बदलाव के दौरान कुछ अनुभवी खिलाड़ियों के करियर को बचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने खास तौर पर शाहीन शाह अफरीदी, नसीम शाह और हारिस रऊफ का नाम लिया। उनका कहना है कि इन तीनों तेज गेंदबाजों के करियर में अभी काफी क्रिकेट बाकी है और बदलाव की प्रक्रिया में उनके भविष्य का ध्यान रखा जाना चाहिए।

अख्तर ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी के साथ हुई कथित बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अधिकारी से पूछा कि इंग्लैंड दौरे पर मौजूदा टीम से बोर्ड को क्या उम्मीद है, तो जवाब बेहद सीधा था। अख्तर के अनुसार अधिकारी ने कहा कि मौजूदा टीम से कोई उम्मीद नहीं है और बोर्ड की उम्मीदें अगली पीढ़ी के उन खिलाड़ियों से हैं, जिन्हें बड़े मंच के लिए तैयार किया जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अख्तर ने पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसे पटरी पर लौटने में करीब दो साल लग सकते हैं। उन्होंने लाहौर स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी का भी जिक्र किया, जहां दूसरे टेस्ट के दौरान वह पहुंचे थे। अख्तर ने कहा कि करीब 26 साल बाद अकादमी में बुनियादी ढांचे से जुड़े काम होते दिखाई दे रहे हैं।

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज ने टीम के प्रदर्शन पर भी कड़ी टिप्पणी की। उनका कहना था कि इंग्लैंड के खिलाफ दोनों मुकाबलों में पाकिस्तान की टीम में संघर्ष करने का जज्बा नजर नहीं आया। लगातार दो बड़ी हार ने टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और दबाव झेलने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

बता दें कि अब पाकिस्तान के सामने एजबेस्टन में तीसरे टेस्ट की चुनौती है। इंग्लैंड पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुका है और उसकी नजर अब पाकिस्तान का 3-0 से सफाया करने पर होगी। वहीं पाकिस्तान के लिए यह मुकाबला सिर्फ हार से बचने का अवसर नहीं है, बल्कि बदली हुई टीम और नए कोचिंग ढांचे के साथ भविष्य की दिशा तय करने का मौका भी माना जा रहा है।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के हालिया फैसलों और शोएब अख्तर की टिप्पणियों से साफ है कि टीम की समस्या को अब केवल इंग्लैंड दौरे की हार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। युवा खिलाड़ियों को मौका देना, ढांचे में बदलाव करना और लंबे समय के लिए मजबूत टीम तैयार करना पाकिस्तान क्रिकेट की प्राथमिकता बनती दिखाई दे रही है। आने वाले दो साल इस पुनर्निर्माण की सफलता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
Mon, 07 Sep 2026 21:35:00 +0530

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