छत्तीसगढ़ में भी रील की लत बनी जानलेवा, पहले तोड़ा फोन फिर दे दी खुद की जान
Chhattisgarh Woman Suicide: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम केराकछार से एक बेहद हैरान और व्यथित करने वाला मामला सामने आया है. यहां केवल मोबाइल नेटवर्क चले जाने और इंटरनेट बंद होने की मामूली बात पर 52 वर्षीय एक महिला ने अपनी जान दे दी. हाथ में पकड़े स्मार्टफोन पर रील देखने की आदत किस कदर जानलेवा साबित हो सकती है, यह घटना उसका सबसे भयावह उदाहरण बनकर सामने आई है. मृतका मंगलो बाई सारथी केवल इस बात से बुरी तरह भड़क उठी थीं कि उनके फोन में इंटरनेट रुक-रुककर चल रहा था. इस मामूली बाधा ने महिला के भीतर इतना तीव्र आक्रोश भर दिया कि पहले तो उन्होंने अपना कीमती फोन जमीन पर पटककर चकनाचूर कर दिया और फिर कुछ ही देर बाद घर में रखा जहरीला कीटनाशक गटक लिया.
नेटवर्क जाने से भड़का भयंकर गुस्सा
घटना पांच सितंबर की दोपहर की बताई जा रही है. मंगलो बाई अपने घर के कमरे में बैठकर मोबाइल पर सोशल मीडिया रील्स देख रही थीं. इसी दौरान अचानक क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या खड़ी हो गई और फोन की कनेक्टिविटी बार-बार गायब होने लगी. नेटवर्क न मिलने के कारण स्क्रीन पर चल रही रील अचानक अटकने लगी. काफी देर तक जब वीडियो आगे नहीं बढ़ा, तो मंगलो बाई का धैर्य पूरी तरह जवाब दे गया. उनका गुस्सा इस हद तक बेकाबू हो गया कि उन्होंने बिना सोचे-समझे अपने हाथ में पकड़ा स्मार्टफोन सीधे जमीन पर दे मारा. फोन बुरी तरह टूट गया, मगर इस तोड़फोड़ के बाद भी उनका आपा शांत नहीं हुआ. वह अत्यधिक बेचैन हो उठीं और गुस्से के उसी आवेग में उन्होंने घर के एक कोने में रखा कीटनाशक उठाकर पी लिया.
बेटी ने देखा तो उड़े होश
जहर निगलने के कुछ ही मिनटों के भीतर महिला के शरीर में तेज दर्द शुरू हो गया और उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी. जब वह असहनीय दर्द के मारे फर्श पर तड़पने लगीं, तब जाकर परिजनों को इस अनहोनी की भनक लगी. सबसे पहले उनकी सत्रह साल की नाबालिग बेटी कमरे में पहुंची, जिसने अपनी मां को छटपटाते देखा. बेटी के शोर मचाने पर घर के बाकी लोग दौड़कर आए. पूरे परिवार के होश उड़ गए. आनन-फानन में स्वजन महिला को लेकर करतला के सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भागे. वहां के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर महिला की जान बचाने का प्रयास किया, लेकिन कीटनाशक का प्रभाव पूरे शरीर में फैल चुका था. स्थिति बेकाबू होते देख चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी उनकी सांसें नहीं बचा सकी.
हंसते-खेलते परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस अकल्पनीय घटना ने पूरे परिवार को उजाड़ कर रख दिया है. मृतका मंगलो बाई के परिवार में उनके पति प्रेमलाल सारथी और तीन बच्चे हैं. उनका सबसे बड़ा बेटा चौबीस साल का है, जिसका विवाह हो चुका है और वह कोरबा शहर में रहकर काम करता है. गांव वाले घर में मंगलो बाई अपने पति प्रेमलाल, बाईस साल के दूसरे बेटे और सत्रह साल की बेटी के साथ रहती थीं. घर का माहौल सामान्य चल रहा था और किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि महज एक मोबाइल स्क्रीन की वजह से मंगलो बाई ऐसा कदम उठा लेंगी. सबसे ज्यादा सदमा उस नाबालिग बेटी को लगा है, जिसने अपनी आंखों से मां को तड़पते देखा. सूचना मिलते ही करतला थाना पुलिस अस्पताल पहुंची, शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम कराया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया.
मनोरंजन से बढ़कर मानसिक बीमारी बनती मोबाइल की लत
यह दुखद घटना केवल एक आपराधिक या अप्राकृतिक मौत का मामला नहीं है, बल्कि समाज में चुपचाप पांव पसार रही डिजिटल लत की कड़वी हकीकत है. आज के दौर में रील और छोटे वीडियो लोगों के खाली समय को काटने का सबसे सुलभ साधन बन चुके हैं. घंटों तक स्क्रीन पर उंगलियां घुमाते रहना लोगों के दिमाग को इस तरह जकड़ लेता है कि उन्हें असल दुनिया का होश नहीं रहता. इंटरनेट न चलने, फोन की बैटरी खत्म होने या किसी के द्वारा टोके जाने पर अत्यधिक चिड़चिड़ापन, हिंसक गुस्सा या गहरा डिप्रेशन महसूस होना मोबाइल निर्भरता के गंभीर लक्षण हैं. मनोचिकित्सकों का मानना है कि जब कोई व्यक्ति स्क्रीन से दूर होने पर अपना मानसिक संतुलन खोने लगे, तो परिवार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए. ऐसे में जरूरी है कि फोन के उपयोग की समय-सीमा तय हो, आपस में बातचीत बढ़े और हालात बिगड़ने पर समय रहते डॉक्टर से परामर्श लिया जाए.
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अमित शाह के दो दिनों के गोवा दौरे का अंतिम दिन आज, राजधानी पणजी में क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की करेंगे अध्यक्षता
केंद्रीय गहमंत्री अमित शाह सोमवार को गोवा के पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे. बैठक में क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और राज्यों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है. पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र के साथ केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं. क्षेत्रीय परिषदों का उद्देश्य और केंद्र के बीच सहयोग बढ़ाना और साझा हितों से जुड़े विषयों पर समन्वय करना शामिल है.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को दो दिनों के दौरे पर गोवा गए थे. उनके दौरे के दौरान, पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के अलावा राज्य प्रशासन और शासन से जुड़े मुद्दों की समीक्षा भी की जा रही है. बैठक में संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे. मीटिंग में क्षेत्रीय स्तर पर विकास, प्रशासनिक समन्वय और राज्यों के बीच लंबित विषयों पर चर्चा बैठक के प्रमुख हिस्सों में शामिल हो सकती है.
राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना
भारत में 5 क्षेत्रीय परिषदों का गठन राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत हुआ था. इन परिषदों का उद्देश्य राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना होगा. इन परिषदों का उद्देश्य राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना है. पश्चिमी क्षेत्रीय परिषदों में शामिल राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के साझा हितों से जुड़े हुए विषयों पर इस मंच के जरिए चर्चा होती है.
मुद्दों पर सभी संबंधित राज्यों की नजरें
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में शामिल राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साझा हितों से जुड़े विषयों पर इस मंच के जरिए चर्चा की जाती है. अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक ऐसे वक्त में हुई, जब केंद्र और पश्चिमी राज्यों के बीच विकास, कानून-व्यवस्था, इंटरस्टेट कोऑर्डिनेशन को और मजबूत करने की जरूरत है. बैठक के दौरान, फैसलों और चर्चा में उठाए गए मुद्दों पर सभी संबंधित राज्यों की नजरें हैं. पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद का ये मंच राज्यों के बीच संवाद बढ़ाने और साझा समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
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