दिल्ली हादसा- परिवार ने बेटे की आंखें दान कीं:पिता बोले- काश बेटे को PG से निकाल पाता; एक रात पहले ही वीडियो कॉल पर बात की
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG बिल्डिंग गिरने से जान गंवाने वाले 18 साल के अर्पित जय के परिवार ने उनकी आंखें दान कर दीं। उनके पिता ने कहा कि काश बेटे को उस PG से निकाल पाते। एक रात पहले ही उससे वीडियो कॉल पर बात की थी। इसी तरह दिल्ली के बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वालों में DU के PGDAV कॉलेज के सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत सिंह यादव भी थे। उनकी मौत की खबर मिलने के बाद परिवार सोमवार सुबह नई दिल्ली के AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। अक्षत के शव को देखकर उनके माता-पिता टूट गए। उनकी बहन लीची सदमे में है और बोल नहीं पा रही है। दो दिन पहले ही अक्षत ने मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। रेस्क्यू टीम ने सोमवार सुबह मलबे से एक और शव निकाला। हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। हॉस्टल 5 मंजिला इमारत में था, जो करीब 40 साल पुरानी थी। रक्षाबंधन पर घर आया था परिवार के मुताबिक, अक्षत हाल ही में रक्षाबंधन पर घर आए थे। उनके पिता ने उन्हें कुछ दिन और रुकने के लिए कहा था, लेकिन अक्षत ने कहा कि उनका टिकट पहले ही बुक है और उन्हें दिल्ली लौटना होगा। अक्षत को तलवारों में काफी दिलचस्पी थी। उनकी मां ने बताया कि हाल ही में 2,500 रुपए की एक तलवार घर पहुंची थी। वीडियो कॉल के दौरान परिवार ने उन्हें तलवार दिखाई तो वह बहुत खुश हुए। UPSC की तैयारी कर रहे थे अक्षत के पिता ने बताया कि उनके शिक्षक अक्सर अक्षत की पढ़ाई की तारीफ करते थे। अक्षत उनसे कहा करते थे, “पापा, एक दिन मैं अफसर बनकर आपको गर्व महसूस कराऊंगा।” अक्षत के पिता ने इस हादसे को लेकर प्रशासन से सवाल किया। उन्होंने कहा कि ऐसी इमारतों का नियमित निरीक्षण होना चाहिए, ताकि वहां रहने या पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, “लोग अपने बच्चों को इन इमारतों में यह भरोसा करके भेजते हैं कि वे सुरक्षित हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा वहां असुरक्षित होगा।” पिता बोले- बेटे को PG में नहीं रहने देता अर्पित के पिता भूपेंद्र जय ने कहा, “मेरा बेटा रक्षाबंधन की छुट्टियों के बाद हमारे शहर से वापस लौटा था। वह कल सुबह अपने PG पहुंचा था और अगली बार हमने उसे उसके शव के रूप में देखा।” उन्होंने कहा, “हर कोई हमें बता रहा है कि PG की हालत कितनी खराब थी। काश, मेरे बेटे ने मुझे पहले बताया होता। मैं उसे वहां कभी रहने नहीं देता।” दोस्त ने बताया, रातभर अर्पित को तलाशते रहे अर्पित के एक दोस्त ने बताया कि जब उनका परिवार अस्पताल पहुंचा और शव देखा, तो चोटों की गंभीरता के कारण पहचान करना मुश्किल था। दोस्त ने कहा, “सोमवार सुबह अस्पताल यानी AIIMS ने हमें बताया कि एक शव हमारी बताई पहचान से मेल खाता है। लेकिन जब हम पहचान करने गए, तो शव बुरी तरह घायल था और हम उसे पहचान नहीं सके।” उसने आगे बताया, “करीब सुबह 6:30 बजे उनका परिवार पहुंचा। आखिरकार वे अर्पित की पहचान कर सके। उनकी मां ने शरीर पर मौजूद जन्मचिह्नों से पहचान की।” दोस्त ने कहा कि वे पूरी रात अर्पित को तलाशते रहे, लेकिन उनका पता नहीं चला। उसने बताया, “हम पूरी रात उन्हें ढूंढते रहे और वे कहीं नहीं मिले। आखिरकार हमें बताया गया कि वह अब नहीं रहे।” --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मलबे के अंदर से छात्रों ने परिचित को फोन किया:बताया- हम जिंदा हैं; मलबा हटाया तो दबा मिला युवक; दिल्ली बिल्डिंग हादसे की 19 PHOTOS दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला हॉस्टल की बिल्डिंग रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे गिर गई। मलबे में फंसे छात्रों ने अपने परिचितों को फोन किया और बताया कि वे जिंदा हैं। पूरी खबर पढ़ें…
ISRO का निजीकरण नहीं, हर साल 50 लॉन्च व्हीकल चाहिए:कहा- संस्था सरकारी है, कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान करेंगे
ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी सरकारी संस्था है और इसका निजीकरण नहीं हुआ है। उन्होंने ISRO के कर्मचारियों की चिंताओं को जायज बताते हुए कहा कि उनका समाधान किया जाएगा। नारायणन ने यह बात बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (BSX) के 9वें संस्करण के उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से कही। यह जानकारी न्यूज एजेंसी PTI ने दी है। नारायणन का बयान ISRO की 9 कर्मचारी एसोसिएशनों के 4 सितंबर को भेजे गए पत्र के बाद आया। एसोसिएशनों ने ISRO के मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल कामों को प्राइवेट संस्थाओं को सौंपने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा था। नारायणन ने कहा कि भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए हर साल करीब 50 लॉन्च व्हीकल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में अंतरिक्ष क्षेत्र और स्पेस इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए ISRO प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ काम कर रहा है। ISRO के निजीकरण पर चेयरमैन ने क्या कहा वी. नारायणन ने कहा, “ISRO का निजीकरण नहीं हुआ है और यह सरकारी संस्था है। हम सरकारी निवेश के साथ काम कर रहे हैं। लेकिन अब हमारे सामने कई तरह के काम हैं। देश में स्पेस इकोसिस्टम और स्पेस इकोनॉमी को बढ़ाना जरूरी है।” कर्मचारी एसोसिएशनों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर उन्होंने कहा, “मेरे साथियों की जो भी चिंताएं हैं, वे निश्चित रूप से जायज हैं। उन्हें स्पष्ट करना हमारी जिम्मेदारी है।” अलग-अलग आवाजों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “हम कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान करेंगे।” 6 साल पहले लागू हुए थे स्पेस सेक्टर के सुधार नारायणन ने बताया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम 64-65 साल पुराना है। इस समय देश के 56 स्पेस एसेट्स अंतरिक्ष में हैं, जो आम लोगों के काम आ रहे हैं। हालांकि, देश की जरूरत इससे कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि करीब 6 साल पहले स्पेस सेक्टर में सुधार लागू किए गए थे। उनके मुताबिक, इन सुधारों के तहत ISRO को प्राइवेट सेक्टर और स्टार्टअप कंपनियों को सहयोग देना और देश के स्पेस इकोसिस्टम को बढ़ाना है। नारायणन ने कहा, “जब भी PSLV या GSLV लॉन्च होता है, तो उसके बजट का करीब 80% हिस्सा भारतीय इंडस्ट्री में निवेश होता है। कुल 450 इंडस्ट्री हमारे लिए काम कर रही हैं।” हर साल 50 लॉन्च व्हीकल का लक्ष्य भारत की बढ़ती अंतरिक्ष जरूरतों पर नारायणन ने कहा, “देश की जरूरत हर साल करीब 50 लॉन्च व्हीकल की है। हमें आगे बढ़ना होगा।” हर साल 50 लॉन्च की क्षमता हासिल करने की व्यवहारिकता पर उन्होंने अपने ISRO से जुड़ने के समय को याद किया। उन्होंने कहा कि 43 साल पहले, जब वे ISRO में आए थे, तब 3 साल में एक लॉन्च होता था। नारायणन ने कहा, “अब बहुत सारी गतिविधियां चल रही हैं। बाहर के लोगों को शायद एक-दो चीजों के बारे में ही पता हो, लेकिन ISRO की ओर से हर काम को आगे ले जाना हमारी जिम्मेदारी है। हर साल 50 लॉन्च एक हकीकत बनने जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि यह काम “भारत में भारतीयों द्वारा” पूरा किया जाएगा।
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