'मैं मरने वाली हूं...', मनीषा कोइराला ने सुनाया दर्दनाक किस्सा, करण कर देगी एक्ट्रेस की मुश्किल दौर की कहानी
Manisha Koirala Recalls Longest Loneliest Night: 90 के दशक में हिंदी सिनेमा पर राज करने वाली एक्ट्रेसेस की बात हो तो मनीषा कोइराला का नाम सबसे ऊपर आता है. जी हां, अपनी खूबसूरती और दमदार अदाकारी से उन्होंने उस दौर में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है. नेपाली की मनीषा ने ‘सौदागर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘बॉम्बे’, ‘1942: ए लव स्टोरी’ और ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ जैसी फिल्मों में शानदार एक्टिंग की और दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई. हालांकि, ग्लैमर और सफलता से भरी इस जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया, जिसने मनीषा को अंदर तक तोड़ दिया था.
साल 2012 में उन्हें स्टेज IV ओवेरियन कैंसर का पता चला. ये खबर उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं थी. बीमारी के साथ-साथ उस समय उनकी निजी जिंदगी भी मुश्किल दौर से गुजर रही थी. उन्होंने लंबा इलाज करवाया, करीब 11 घंटे तक चली सर्जरी का सामना किया और कई दौर की कीमोथेरेपी से गुजरीं. करीब एक साल तक चले इलाज के बाद उन्होंने 2013 में कैंसर को मात दी. लेकिन इस बीमारी ने उनके मन पर जो असर छोड़ा, उसकी यादें आज भी उनके साथ हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में मनीषा ने कैंसर से जंग के दौरान महसूस किए गए अकेलेपन और डर के बारे में खुलकर बात की.
‘वो मेरे लिए सबसे अकेली और सबसे लंबी रात थी’
हाल ही में ‘ब्रूट इंडिया’ से बातचीत में मनीषा कोइराला ने कैंसर के बारे में पता चलने के बाद की अपनी पहली रात को याद किया. उन्होंने बताया कि उस समय उनके मन में किस तरह के ख्याल आ रहे थे. मनीषा ने कहा, “दिन में मुझे पता चला कि मुझे कैंसर है. वो रात मेरे लिए सबसे अकेली और सबसे लंबी रात थी. ऐसा लगा जैसे सब कुछ अंधेरे में डूबा हो. मुझे लगा कि मैं मरने वाली हूं.” एक्ट्रेस ने कहा कि कैंसर से गुजरने के बाद उन्हें पहली बार समझ आया कि एक मरीज अंदर से कितना अकेला महसूस कर सकता है. उनके लिए ये सिर्फ शारीरिक बीमारी नहीं थी, बल्कि मानसिक तौर पर भी बेहद कठिन अनुभव था. कैंसर का नाम सुनते ही जिंदगी, भविष्य और मौत से जुड़े तमाम सवाल उनके सामने खड़े हो गए थे. उस वक्त उन्हें ये भी नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है.
तलाक के बाद मिला कैंसर का दर्द
मनीषा कोइराला की जिंदगी में ये मुश्किल दौर उनकी शादी टूटने के कुछ ही समय बाद आया. 19 जून 2010 को उन्होंने नेपाली बिजनेसमैन सम्राट दहल से शादी की थी. काठमांडू में ट्रेडिशनल रीति-रिवाजों के साथ हुई इस शादी के बाद दोनों ने फिनलैंड में हनीमून भी मनाया था. बताया गया था कि मनीषा और सम्राट की मुलाकात फेसबुक के जरिए हुई थी. हालांकि, शादी ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल सकी. दोनों का रिश्ता 2012 में खत्म हो गया और मनीषा ने तलाक ले लिया. इसी साल उनकी जिंदगी को एक और बड़ा झटका लगा, जब उन्हें ओवेरियन कैंसर होने की जानकारी मिली. यानी एक तरफ वो अपनी शादी टूटने के दर्द से गुजर रही थीं और दूसरी तरफ उन्हें एक गंभीर बीमारी से लड़ाई लड़नी थी.
कमजोरी महसूस होने के बाद अस्पताल पहुंची थीं
मनीषा कोइराला को अपनी बीमारी के बारे में शुरुआत में कोई अंदाजा नहीं था. उन्होंने पहले भी एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें तब तक नहीं पता था कि उनके शरीर में इतनी गंभीर बीमारी है, जब तक कि उन्हें कमजोरी महसूस नहीं होने लगी. कमजोरी महसूस होने के बाद वो अपने भाई के साथ काठमांडू के एक अस्पताल गईं. वहां जांच के बाद बीमारी का पता चला. इसके बाद वो इलाज के लिए भारत आईं और मुंबई के जसलोक अस्पताल में भर्ती हुईं. बाद में बेहतर इलाज के लिए वो अमेरिका चली गईं, जहां उनका इलाज हुआ. कैंसर के खिलाफ उनकी लड़ाई आसान नहीं थी. उन्हें लंबी सर्जरी और कई दौर की कीमोथेरेपी से गुजरना पड़ा.
‘भीड़ में भी इंसान अकेला महसूस करता है’
मनीषा ने इंटरव्यू में ये भी बताया कि बीमारी ने उनके सामाजिक जीवन को किस तरह प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि कभी-कभी इंसान लोगों के बीच मौजूद होकर भी खुद को अकेला महसूस कर सकता है. एक्ट्रेस के मुताबिक, बॉलीवुड की पार्टियों में जाने के बाद भी उन्हें कई बार लोगों के बीच घुलने-मिलने में परेशानी महसूस होती है. हालांकि, काम का हिस्सा होने के कारण वो ऐसी जगहों पर जाना जारी रखती हैं. उन्होंने अपने उस दौर को जिंदगी का “सबसे भयानक और बुरा” समय बताया. मनीषा ने कहा कि जिंदगी कई अलग-अलग परतों से मिलकर बनी होती है और कई बार इंसान भीड़ के बीच भी अकेलापन महसूस करता है.
'एयर इंडिया को फिर से महान बनाएंगे' कार्यभार संभालने से पहले बोले नए सीईओ टेवोल्डे गेब्रेमारियम
नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। एयर इंडिया के आने वाले सीईओ और एमडी टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने सोमवार को कर्मचारियों से कहा कि वे टाटा ग्रुप की एयरलाइन को एक मजबूत भविष्य की ओर ले जाना चाहते हैं। साथ ही कहा, हम एयर इंडिया को फिर से महान बनाएंगे।
एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और पद छोड़ रहे सीईओ और एमडी कैंपबेल विल्सन के साथ एक टाउन हॉल मीटिंग में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए गेब्रेमारियम ने कहा, मैं अमेरिका से आ रहा हूं, इसलिए मैं एक फ्रेज एमएजीए (हम एयर इंडिया को फिर से महान बनाएंगे) का इस्तेमाल करना चाहूंगा।
गेब्रेमारियम सरकार से सिक्योरिटी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं और जरूरी मंजूरी मिलने के बाद एयर इंडिया के सीईओ और एमडी का पद औपचारिक रूप से संभालेंगे।
उन्होंने कहा, एयर इंडिया की विरासत शानदार है, ब्रांड मजबूत है और इसमें बहुत ज्यादा क्षमता है। अगर हम सही समय पर सही कदम उठाएं, तो तरक्की की कोई सीमा नहीं होगी।
उन्होंने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब टाटा ग्रुप के तहत एयर इंडिया बदलाव के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। एयरलाइन अपने कामकाज को मजबूत करने, ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने और यात्रियों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
टाउन हॉल में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन का अगला चरण मुख्य रूप से सुरक्षा, ग्राहकों का भरोसा फिर से जीतने, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और लागत पर नियंत्रण रखने पर केंद्रित होगा।
चंद्रशेखरन ने कहा, मेरे लिए, एयर इंडिया को टाटा समूह में वापस लाना मेरे करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है, यह एक बहुत ही अहम घटना है। एयर इंडिया अरबों लोगों की है। यह सिर्फ एक और बिजनेस नहीं है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एयर इंडिया का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य यात्रियों और आम जनता के मन में भरोसा कायम करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा, एयर इंडिया को सबसे ज्यादा लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करनी चाहिए।
चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन ने पिछले 18 महीनों में बेहद मुश्किल दौर का सामना किया है, जिसमें भू-राजनीतिक उथल-पुथल, एयरस्पेस बंद होने, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और दुखद एआई171 दुर्घटना ने इसके कामकाज को प्रभावित किया है।
उन्होंने साफ किया कि सुरक्षा एयरलाइन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी और एयर इंडिया से दुनिया की बेहतरीन एयरलाइनों से भी बेहतर सुरक्षा रिकॉर्ड बनाने की कोशिश करने को कहा।
चंद्रशेखरन ने कहा, सुरक्षा इस बारे में नहीं है कि हम क्या कहते हैं। यह इस बारे में है कि हम हर दिन क्या करते हैं। उन्होंने पूरे संगठन में कड़े नियमों के पालन, विश्व-स्तरीय प्रक्रियाओं और व्यक्तिगत जवाबदेही के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने ग्राहक सेवा और अनुभव में ज्यादा एकरूपता लाने का भी आह्वान किया, साथ ही कर्मचारियों से तेजी से बदलते ऑपरेटिंग माहौल का सामना करते हुए चुस्त-दुरुस्त रहने को कहा।
वित्तीय अनुशासन भी एक मुख्य फोकस होगा, जिसमें चंद्रशेखरन ने पूरी एयर इंडिया में लागत के प्रति जागरूकता की मजबूत संस्कृति बनाने पर जोर दिया।
--आईएएनएस
एबीएस
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