'एयर इंडिया को फिर से महान बनाएंगे' कार्यभार संभालने से पहले बोले नए सीईओ टेवोल्डे गेब्रेमारियम
नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। एयर इंडिया के आने वाले सीईओ और एमडी टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने सोमवार को कर्मचारियों से कहा कि वे टाटा ग्रुप की एयरलाइन को एक मजबूत भविष्य की ओर ले जाना चाहते हैं। साथ ही कहा, हम एयर इंडिया को फिर से महान बनाएंगे।
एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और पद छोड़ रहे सीईओ और एमडी कैंपबेल विल्सन के साथ एक टाउन हॉल मीटिंग में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए गेब्रेमारियम ने कहा, मैं अमेरिका से आ रहा हूं, इसलिए मैं एक फ्रेज एमएजीए (हम एयर इंडिया को फिर से महान बनाएंगे) का इस्तेमाल करना चाहूंगा।
गेब्रेमारियम सरकार से सिक्योरिटी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं और जरूरी मंजूरी मिलने के बाद एयर इंडिया के सीईओ और एमडी का पद औपचारिक रूप से संभालेंगे।
उन्होंने कहा, एयर इंडिया की विरासत शानदार है, ब्रांड मजबूत है और इसमें बहुत ज्यादा क्षमता है। अगर हम सही समय पर सही कदम उठाएं, तो तरक्की की कोई सीमा नहीं होगी।
उन्होंने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब टाटा ग्रुप के तहत एयर इंडिया बदलाव के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। एयरलाइन अपने कामकाज को मजबूत करने, ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने और यात्रियों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
टाउन हॉल में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन का अगला चरण मुख्य रूप से सुरक्षा, ग्राहकों का भरोसा फिर से जीतने, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और लागत पर नियंत्रण रखने पर केंद्रित होगा।
चंद्रशेखरन ने कहा, मेरे लिए, एयर इंडिया को टाटा समूह में वापस लाना मेरे करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है, यह एक बहुत ही अहम घटना है। एयर इंडिया अरबों लोगों की है। यह सिर्फ एक और बिजनेस नहीं है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एयर इंडिया का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य यात्रियों और आम जनता के मन में भरोसा कायम करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा, एयर इंडिया को सबसे ज्यादा लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करनी चाहिए।
चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन ने पिछले 18 महीनों में बेहद मुश्किल दौर का सामना किया है, जिसमें भू-राजनीतिक उथल-पुथल, एयरस्पेस बंद होने, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और दुखद एआई171 दुर्घटना ने इसके कामकाज को प्रभावित किया है।
उन्होंने साफ किया कि सुरक्षा एयरलाइन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी और एयर इंडिया से दुनिया की बेहतरीन एयरलाइनों से भी बेहतर सुरक्षा रिकॉर्ड बनाने की कोशिश करने को कहा।
चंद्रशेखरन ने कहा, सुरक्षा इस बारे में नहीं है कि हम क्या कहते हैं। यह इस बारे में है कि हम हर दिन क्या करते हैं। उन्होंने पूरे संगठन में कड़े नियमों के पालन, विश्व-स्तरीय प्रक्रियाओं और व्यक्तिगत जवाबदेही के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने ग्राहक सेवा और अनुभव में ज्यादा एकरूपता लाने का भी आह्वान किया, साथ ही कर्मचारियों से तेजी से बदलते ऑपरेटिंग माहौल का सामना करते हुए चुस्त-दुरुस्त रहने को कहा।
वित्तीय अनुशासन भी एक मुख्य फोकस होगा, जिसमें चंद्रशेखरन ने पूरी एयर इंडिया में लागत के प्रति जागरूकता की मजबूत संस्कृति बनाने पर जोर दिया।
--आईएएनएस
एबीएस
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तुलसी के पौधे के पास ये चीजें क्यों नहीं रखनी चाहिए? जानें धार्मिक मान्यता और पूजा से जुड़े नियम
Tulsi ke paas kya nahi rakhna chahiye: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना जाता है। कई घरों में आंगन, बालकनी या पूजा स्थल के पास तुलसी का पौधा लगाया जाता है और प्रतिदिन इसकी पूजा करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी को माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि कई धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है।
तुलसी के पौधे के पास क्या नहीं रखना चाहिए?
लोकप्रिय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे के आसपास गंदगी या अशुद्ध वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। तुलसी के स्थान को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने की परंपरा है।
कई परिवार तुलसी के पास जूते-चप्पल, कूड़ा या अन्य अनुपयुक्त वस्तुएं रखने से बचते हैं। इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वच्छता की दृष्टि से भी उचित माना जा सकता है।
तुलसी के पास शिवलिंग रखने को लेकर क्या है मान्यता?
कुछ धार्मिक परंपराओं में तुलसी दल को भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा में विशेष महत्व दिया जाता है, जबकि भगवान शिव की पूजा में तुलसी का उपयोग न करने की मान्यता प्रचलित है।
इसके पीछे अलग-अलग पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं बताई जाती हैं। हालांकि, अलग-अलग संप्रदायों और क्षेत्रों में पूजा-पद्धतियां भिन्न हो सकती हैं।
तुलसी के पौधे के पास दीपक क्यों जलाया जाता है?
कई हिंदू परिवार सुबह और शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने की परंपरा निभाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में शुभता और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
शाम के समय तुलसी के पास जलता दीपक भारतीय घरों में लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
तुलसी की पत्तियां कब नहीं तोड़नी चाहिए?
तुलसी की पत्तियां तोड़ने को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। कई परिवार विशेष तिथियों और दिनों में तुलसी दल न तोड़ने की परंपरा का पालन करते हैं।
हालांकि, इन नियमों में क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार इसका पालन किया जा सकता है।
तुलसी के पौधे की देखभाल भी है जरूरी
धार्मिक महत्व के साथ-साथ तुलसी एक जीवित पौधा भी है, इसलिए इसकी उचित देखभाल जरूरी है। पौधे को पर्याप्त धूप, पानी और अनुकूल वातावरण मिलना चाहिए।
धार्मिक आस्था के साथ पौधे की नियमित देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि तुलसी का पौधा स्वस्थ बना रहे।
आज भी घर-घर में निभाई जाती है तुलसी पूजा की परंपरा
बदलती जीवनशैली के बावजूद भारत के कई घरों में तुलसी पूजा की परंपरा आज भी कायम है। सुबह जल अर्पित करने से लेकर शाम को दीपक जलाने तक, तुलसी भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोक-परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में पूजा से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। इसे केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
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