त्योहारी सीजन से पहले मारुति सुजुकी ने चुनिंदा मॉडल्स के 20,000 रुपए तक बढ़ाए दाम
त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले सोमवार को देश की शीर्ष कार कंपनियों में एक मारुति सुजुकी ने अपनी चुनिंदा गाड़ियों की कीमतों को 20,000 रुपए तक बढ़ा दिया है. यह बढ़ोतरी इसी महीने से लागू हो गई है. कंपनी ने इस बढ़ोतरी की वजह बढ़ते महंगाई के दबाव को बताया.
मारूती ने क्यों बढ़ाए अपनी कारों के दाम?
मारुति सुजुकी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में लागत कम करने के उपायों से असर को कम करने की कोशिशों के बावजूद, महंगाई का दबाव और लागत के लिए मुश्किल हालात बने रहे. मारुति सुजुकी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, "महंगाई का बोझ बढ़ने और लागत के लिए मुश्किल हालात बने रहने के कारण, कंपनी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार पर डालने के लिए मजबूर है."
ग्राहकों पर कम असर पड़ने की कही बात
कंपनी ने कहा कि वह यह पक्का करना जारी रखेगी कि ग्राहकों पर कीमत बढ़ने का असर कम से कम हो. हालांकि, भारत की सबसे बड़ी पैसेंजर कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुजुकी ने फाइलिंग में उन मॉडल्स के बारे में नहीं बताया जिनकी कीमतें बढ़ाई गई हैं, और न ही अलग-अलग वैरिएंट्स की नई कीमतों के बारे में जानकारी दी.
मारूती ने अगस्त में किया था कीमतें बढ़ाने का एलान
इससे पहले अगस्त में, मारुति सुजुकी ने अपने एरेना और नेक्सा मॉडल्स की कीमतें बढ़ाई थीं, जिसमें मॉडल और वैरिएंट के आधार पर 2,500 रुपए से लेकर 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई थी. इसके अलावा, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने भी 1 सितंबर से अपने पैसेंजर व्हीकल पोर्टफोलियो (जिसमें इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मॉडल शामिल हैं) की कीमतों में 25,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी.
हुंडई ने भी बढ़ाई अपनी कारों की कीमत
साथ ही, हुंडई मोटर इंडिया ने भी अपने पोर्टफोलियो की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब कार बनाने वाली कंपनियों को इनपुट कॉस्ट बढ़ने का लगातार दबाव झेलना पड़ रहा है, और वे पैसेंजर व्हीकल मार्केट में लागत बढ़ने और ग्राहकों की मांग व खरीदने की क्षमता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं.
स्रोत- आईएएनएस
Atal Awasiya Vidyalaya: मजदूरों के बच्चों को मुफ्त आवासीय शिक्षा, जानें अटल आवासीय विद्यालय योजना की पूरी जानकारी
Atal Awasiya Vidyalaya: उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और निर्माण श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल आवासीय विद्यालय योजना संचालित की जा रही है. यह योजना खासतौर पर उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके माता-पिता रोजगार के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित होती है. सरकार ने इसी समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2022 में इस योजना की शुरुआत की.
योजना के तहत बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि रहने, खाने और स्कूल से जुड़ी जरूरी सुविधाएं भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं.
क्या है अटल आवासीय विद्यालय योजना?
अटल आवासीय विद्यालय योजना उत्तर प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग के अंतर्गत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) द्वारा लागू की जाती है.
इस योजना में चयनित बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त आवासीय शिक्षा देने की व्यवस्था है. विद्यार्थियों को हॉस्टल, भोजन, यूनिफॉर्म और किताबें जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं. स्कूलों में पढ़ाई का पाठ्यक्रम CBSE से मान्यता प्राप्त मानकों के अनुरूप रखा गया है.
यूपी में 18 अटल आवासीय विद्यालय
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 18 अटल आवासीय विद्यालय संचालित हैं. हर मंडल मुख्यालय पर एक स्कूल स्थापित किया गया है. इनमें से 16 विद्यालयों को सितंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया था.
इन विद्यालयों के निर्माण पर करीब 1,115 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. योजना का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और स्थिर वातावरण उपलब्ध कराना है.
कक्षा 6 और 9 में मिलता है दाखिला
अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश मुख्य रूप से कक्षा 6 और कक्षा 9 में दिया जाता है. चयनित विद्यार्थी आगे इसी विद्यालय में कक्षा 12 तक अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं.
प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा देनी होती है. इससे योग्य विद्यार्थियों का चयन सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है.
किन बच्चों को मिलता है लाभ?
योजना का प्रमुख लाभ उन निर्माण श्रमिकों के बच्चों को दिया जाता है, जिनके माता-पिता का UPBOCW में कम से कम 365 दिनों से पंजीकरण है.
इसके अलावा अनाथ बच्चों और कोविड-19 महामारी के दौरान महिला कल्याण विभाग द्वारा चिन्हित बच्चों को भी योजना के दायरे में रखा गया है. एक परिवार से अधिकतम दो बच्चे आवेदन कर सकते हैं.
खास बात यह है कि पंजीकृत निर्माण श्रमिक होने की शर्त के अलावा अलग से कोई आय सीमा निर्धारित नहीं है. यानी योजना का फोकस उन परिवारों के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं.
लड़कियों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित
योजना में बेटियों की शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है. अटल आवासीय विद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित हैं. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को भी गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलता है.
स्कूलों में मिलती हैं ये सुविधाएं
इन विद्यालयों के कैंपस को आधुनिक आवासीय स्कूल की तर्ज पर विकसित किया गया है. यहां विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग बालक और बालिका हॉस्टल, डाइनिंग हॉल और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं हैं.
इसके अलावा खेलकूद के लिए सुविधाएं, सिक रूम और रेजिडेंट नर्स की व्यवस्था भी की गई है. स्कूल परिसर में शिक्षकों के लिए आवासीय क्वार्टर भी बनाए गए हैं.
कब और कैसे करें आवेदन?
अटल आवासीय विद्यालयों में दाखिले की सूचना आमतौर पर जनवरी के अंत से फरवरी के मध्य के बीच जारी की जाती है. कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए निर्धारित प्रवेश परीक्षा आयोजित होती है.
आवेदन फॉर्म UPBOCW की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित जिला श्रम कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं. आवेदन के दौरान माता-पिता का यूपी लेबर कार्ड या निर्माण श्रमिक पंजीकरण और बच्चे का आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जरूरी होते हैं.
बच्चों के भविष्य को स्थिर बनाने की पहल
अटल आवासीय विद्यालय योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य उन बच्चों को लगातार शिक्षा का अवसर देना है, जिनके माता-पिता का रोजगार स्थायी नहीं है. निर्माण श्रमिकों के बार-बार पलायन के कारण बच्चों की पढ़ाई छूटने या बाधित होने की समस्या आम है.
ऐसे में मुफ्त आवासीय शिक्षा बच्चों को पढ़ाई के साथ सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य की दिशा प्रदान करने का प्रयास है. योजना के जरिए सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बोर्डिंग स्कूल जैसी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है.
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