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'NASA के मून बेस प्रोग्राम में शामिल होगा ISRO', बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का बड़ा एलान

Bengaluru Space Expo 2026: NASA मिशन में भारत को लेकर अमेरिकी  राजदूत ने बड़ा बयान दिया है. गोर ने नासा के चांद मिशन के बारे में खुलकर बात की. गोर ने मिशन में भारत का भी जिक्र किया. इसे भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. गोर ने यह भी कहा कि हमारे इकोसिस्टम आपका स्वागत करते हैं. 

दरअसल, कोलकाता में बेंगलुरु स्पेस एक्सपो 2026 का आयोजन हो रहा है. इसमें अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी शिरकत की. इस दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि NASA ने आधिकारिक तौर पर ISRO को हमारे मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है. हम चांद पर वापस जा रहे हैं और हम चाहते हैं कि चांद की सतह पर भारत हमारे साथ हो. इस कमरे में मौजूद हर भारतीय स्पेस एंटरप्रेन्योर से, अमेरिकी बाजार आपके लिए खुला है. कहा कि हमारे निवेशक आप पर नजर रखे हुए हैं.  

पार्टनरशिप केवल सहयोग तक सीमित नहीं...

बेंगलुरु स्पेस एक्सपो 2026 में राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि 9वें US-इंडिया सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप में हमने बड़े बदलाव होते देखे. उन चर्चाओं से यह पक्का हुआ कि हमारी पार्टनरशिप अब सिर्फ सहयोग तक सीमित नहीं है. यह मिलकर कुछ नया बनाने (को-क्रिएशन) के बारे में है. हम अब सिर्फ डेटा शेयर नहीं कर रहे हैं. हम मिलकर इंस्ट्रूमेंट्स डिजाइन कर रहे हैं, स्टार्टअप्स को मिलकर फंडिंग दे रहे हैं और इंसानी खोज के भविष्य को मिलकर आकार दे रहे हैं. 

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स्पेस ट्रैफिक कोऑर्डिनेशन से लेकर शंघाई तक...

अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि स्पेस ट्रैफिक कोऑर्डिनेशन से लेकर शंघाई में होने वाली वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस तक, वॉशिंगटन और दिल्ली तानाशाही दबदबे के खिलाफ खुले और नियमों पर आधारित स्पेस गवर्नेंस की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. 

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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज ही सुनवाई, मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे का मामला एक बार फिर चर्चा में है. इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई होने जा रही है. हादसे के बाद से ही निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं. अब अदालत की सुनवाई के साथ मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं.

इसी बीच मामले में एक अहम कार्रवाई सामने आई है. बिल्डिंग मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है. इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों की गतिविधियां भी तेज होने की संभावना है.

हादसे के बाद जांच में तेजी

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने राजधानी में निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे. ऐसे हादसों में अक्सर निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा नियमों के पालन और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आती है.

इस मामले में भी जांच एजेंसियां हादसे से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं. अदालत में सुनवाई के दौरान मामले की जांच से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है.

हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस

मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम बिल्डिंग मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जाना है. इस तरह की कार्रवाई आम तौर पर किसी आरोपी या संबंधित व्यक्ति की देश से बाहर आवाजाही पर नजर रखने के उद्देश्य से की जाती है.

लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति के देश छोड़ने की कोशिश की स्थिति में सुरक्षा और जांच एजेंसियों को सूचना मिल सकती है. ऐसे में इस कार्रवाई को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर

अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर हैं. अदालत इस मामले में जांच की प्रगति और संबंधित कार्रवाई से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई कर सकती है.

हादसे के बाद पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय का सवाल भी अहम बना हुआ है. ऐसे मामलों में अदालत की निगरानी से जांच को दिशा मिलने और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद रहती है.

निर्माण सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

सत्य निकेतन की घटना ने राजधानी में निर्माणाधीन और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है. दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में निर्माण गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं. ऐसे में सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की ओर से समय-समय पर यह सवाल उठाया जाता रहा है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की निगरानी कितनी प्रभावी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कितनी सख्ती होती है.

सुनवाई पर सबकी नजरें

अब मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और जांच की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी. लुकआउट नोटिस के बाद हरिओम बंसल को लेकर जांच एजेंसियों की गतिविधियां भी अहम रहेंगी.

सत्य निकेतन हादसे का मामला सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निर्माण सुरक्षा, जवाबदेही और नियमों के पालन से जुड़े बड़े सवाल भी सामने लाता है. अदालत की सुनवाई के बाद इस मामले में आगे की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

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