सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज ही सुनवाई, मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे का मामला एक बार फिर चर्चा में है. इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई होने जा रही है. हादसे के बाद से ही निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं. अब अदालत की सुनवाई के साथ मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं.
इसी बीच मामले में एक अहम कार्रवाई सामने आई है. बिल्डिंग मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है. इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों की गतिविधियां भी तेज होने की संभावना है.
हादसे के बाद जांच में तेजी
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने राजधानी में निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे. ऐसे हादसों में अक्सर निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा नियमों के पालन और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आती है.
इस मामले में भी जांच एजेंसियां हादसे से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं. अदालत में सुनवाई के दौरान मामले की जांच से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है.
हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस
मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम बिल्डिंग मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जाना है. इस तरह की कार्रवाई आम तौर पर किसी आरोपी या संबंधित व्यक्ति की देश से बाहर आवाजाही पर नजर रखने के उद्देश्य से की जाती है.
लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति के देश छोड़ने की कोशिश की स्थिति में सुरक्षा और जांच एजेंसियों को सूचना मिल सकती है. ऐसे में इस कार्रवाई को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर
अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर हैं. अदालत इस मामले में जांच की प्रगति और संबंधित कार्रवाई से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई कर सकती है.
हादसे के बाद पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय का सवाल भी अहम बना हुआ है. ऐसे मामलों में अदालत की निगरानी से जांच को दिशा मिलने और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद रहती है.
निर्माण सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
सत्य निकेतन की घटना ने राजधानी में निर्माणाधीन और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है. दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में निर्माण गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं. ऐसे में सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की ओर से समय-समय पर यह सवाल उठाया जाता रहा है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की निगरानी कितनी प्रभावी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कितनी सख्ती होती है.
सुनवाई पर सबकी नजरें
अब मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और जांच की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी. लुकआउट नोटिस के बाद हरिओम बंसल को लेकर जांच एजेंसियों की गतिविधियां भी अहम रहेंगी.
सत्य निकेतन हादसे का मामला सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निर्माण सुरक्षा, जवाबदेही और नियमों के पालन से जुड़े बड़े सवाल भी सामने लाता है. अदालत की सुनवाई के बाद इस मामले में आगे की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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जम्मू-कश्मीर: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे मेडिकल कॉलेज के इंटर्न, बोले हम चाहते हैं लिखित आदेश
श्रीनगर, 7 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के बेमिना में शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) कॉलेज के मेडिकल इंटर्नों की ओर से सोमवार को अपनी स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी गई है।
एसकेआईएमएस मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस बैच 2021 के इंटर्नों की ओर से अपनी इंटर्नशिप स्टाइपेंड (भत्ते) में बढ़ोतरी की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन को और तेज कर दिया गया है। वे अपनी मांग को मंजरी देने वाले प्रशासन के एक औपचारिक लिखित आदेश की मांग पर अड़े हुए हैं।
एमबीबीएस 2021 बैच के इंटर्नों की ओर से एक बयान में कहा गया कि कोई लिखित और औपचारिक आदेश नहीं मिलने पर यह फैसला लिया गया है। इंटर्नों की ओर से कहा गया कि बार-बार बातचीत और भरोसे के बावजूद स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के बारे में कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया, जिसके बाद प्रदर्शन को और तेज करना पड़ा।
इंटर्न ने कहा, हमारा रुख साफ है; जब तक लिखित आदेश नहीं मिलेगा, तब तक विरोध प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। उन्होंने घोषणा की कि भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक उनकी मांगों को पूरा करने वाला औपचारिक आदेश जारी नहीं हो जाता और प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई जाती।
विरोध कर रहे इंटर्न ने कहा कि उनकी मांग न्याय, सम्मान और इंटर्न डॉक्टरों की ओर से किए जाने वाले काम और जिम्मेदारियों के बदले उचित मुआवजे से जुड़ी है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे इस मामले पर तुरंत ध्यान दें और लिखित व आधिकारिक आदेश के जरिए इस गतिरोध को दूर करें।
यह भूख हड़ताल जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न के उस व्यापक आंदोलन का अगला चरण है, जिसमें वे अपनी मासिक इंटर्नशिप स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। इंटर्न का कहना है कि जुबानी भरोसे अब काफी नहीं हैं और जब तक सरकार औपचारिक आदेश जारी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इंटर्न की ओर से कहा गया, हम बातचीत चाहते हैं। हम न्याय चाहते हैं। हम लिखित आदेश चाहते हैं।
एसकेआईएमएस बेमिना के विरोध कर रहे इंटर्न ने फिर से कहा है कि भूख हड़ताल का मकसद बातचीत की प्रक्रिया को खत्म करना नहीं बल्कि मामले का जल्द समाधान निकालना है। साथ ही, उन्होंने साफ कर दिया है कि वे सिर्फ आश्वासन और भरोसे के आधार पर अपना विरोध प्रदर्शन वापस नहीं लेंगे।
बता दें कि अभी जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड 12,300 रुपये है। विरोध कर रहे इंटर्न का कहना है कि 2019 के बाद से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन महंगाई में कई गुना बढ़ोतरी हो गई है।
--आईएएनएस
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