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कार्लोस अल्काराज US ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे:टॉमी पॉल को हराया, सबालेंका भी अगले राउंड में: 5 अमेरिकी पुरुष अंतिम-16 में पहुंचे

न्यूयॉर्क में खेले जा रहे US ओपन 2026 में डिफेंडिंग चैंपियन कार्लोस अल्काराज और आर्यना सबालेंका ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। सबालेंका छठी बार US ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंची विमेंस सिंगल्स में सबालेंका ने अमेरिका की टेलर टाउनसेंड को 6-4, 6-3 से मात दी। पहले सेट में दोनों के बीच कई बार सर्विस ब्रेक हुई। टाउनसेंड ने सबालेंका की शुरुआती चार सर्विस में से तीन बार ब्रेक लिया, लेकिन सबालेंका ने वापसी करते हुए पहला सेट 6-4 से जीत लिया। दूसरे सेट में 1-3 से पिछड़ने के बाद उन्होंने लगातार पांच गेम जीते और मैच अपने नाम किया। इस जीत के साथ सबालेंका लगातार छठी बार US ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंची हैं। अब उनका सामना छठी सीड और मौजूदा विंबलडन चैंपियन लिंडा नोस्कोवा से होगा। नोस्कोवा ने मार्ता कोस्ट्युक को 7-5, 5-7, 6-4 से हराया। कलाई की चोट से वापसी के बाद अल्काराज की लगातार 18वीं ग्रैंड स्लैम जीत मेंस सिंगल्स में अल्काराज ने अमेरिका के टॉमी पॉल को 6-4, 6-3, 6-4 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। दाहिनी कलाई की चोट के कारण करीब चार महीने कोर्ट से दूर रहने के बाद लौटे अल्काराज ने पॉल के खिलाफ तीनों सेट में दबदबा बनाए रखा। इस जीत के साथ उनकी ग्रैंड स्लैम में लगातार 18 मैच जीतने की लय बरकरार रही। टूर्नामेंट में अब तक उन्होंने सिर्फ एक सेट गंवाया है। अब क्वार्टर फाइनल में अल्काराज का सामना अमेरिका के 8वीं सीड बेन शेल्टन से होगा। शेल्टन ने स्टेफानोस त्सित्सिपास को 6-2, 6-3, 6-4 से हराकर अंतिम-8 में जगह बनाई। 5 अमेरिकी पुरुष अंतिम-16 में पहुंचे, अब 3 क्वार्टर फाइनल में US ओपन के मेंस सिंगल्स में पांच अमेरिकी खिलाड़ी अंतिम-16 में पहुंचे थे। इनमें टॉमी पॉल, बेन शेल्टन, लर्नर टिएन, फ्रांसिस टियाफो और एलेक्स माइकलसन शामिल थे। यह 1995 के बाद किसी ग्रैंड स्लैम के अंतिम-16 में पहुंचने वाले अमेरिकी पुरुष खिलाड़ियों की सबसे बड़ी संख्या थी। इनमें से टियाफो, माइकलसन और शेल्टन ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। टियाफो ने पूर्व चैंपियन डेनियल मेदवेदेव को 7-6(1), 6-4, 7-6(6) से हराया, जबकि माइकलसन ने टॉमस मार्टिन एचेवेरी को 7-6(6), 6-4, 6-4 से मात दी। अब टियाफो और माइकलसन क्वार्टर फाइनल में आमने-सामने होंगे, जिससे सेमीफाइनल में एक अमेरिकी खिलाड़ी का पहुंचना तय है। वहीं, बेन शेल्टन ने स्टेफानोस त्सित्सिपास को 6-2, 6-3, 6-4 से हराकर अंतिम-8 में जगह बनाई। अब उनका सामना डिफेंडिंग चैंपियन अल्काराज से होगा। विमेंस सिंगल्स में पेगुला-नवारो का ऑल-अमेरिकन क्वार्टर फाइनल विमेंस में भी अमेरिका की दो खिलाड़ियों के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला होगा। जेसिका पेगुला ने सोराना क्रिस्टिया को 6-3, 6-4 से हराया, जबकि एमा नवारो ने अन्ना कलिन्सकाया को सीधे सेटों में मात देकर अंतिम-8 में जगह बनाई।

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Prabhasakshi NewsRoom: Secret Airbase बनाने में तेजी से जुटा है China, सैटेलाइट तस्वीरों ने Lop Nur में बन रहे खतरनाक मिलिट्री टेस्ट बेस का किया खुलासा

चीन सिर्फ जमीन और समुद्र में ही अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ा रहा, बल्कि वह आसमान पर अगली पीढ़ी का वर्चस्व स्थापित करने की तैयारी में भी पूरी ताकत झोंक चुका है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिनजियांग के दुर्गम और वीरान रेगिस्तान में स्थित लोप नूर (Lop Nur) को तेजी से विस्तार देकर बीजिंग एक ऐसा विशाल फ्लाइट-टेस्ट कॉम्प्लेक्स तैयार कर रहा है, जो आने वाले वर्षों में चीन के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और संभावित स्टील्थ बॉम्बर कार्यक्रमों का केंद्र बन सकता है। देखा जाये तो यह अमेरिका को सीधी रणनीतिक चुनौती देने वाली चीन की एयर-पावर महत्वाकांक्षा का नया अध्याय है।

सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, लोप नूर स्थित इस सुविधा में चार विशाल हैंगर, नई टैक्सीवे, एक गोलाकार पैड और संभावित ईंधन भंडारण ढांचा तैयार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि गोलाकार संरचना का इस्तेमाल इंजन परीक्षण या विमानों को घुमाने और संचालन संबंधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। निर्माण की गति और पैमाना साफ संकेत देते हैं कि चीन यहां सामान्य परीक्षण सुविधा नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय और अत्यधिक गोपनीय एयरोस्पेस टेस्ट हब विकसित कर रहा है।

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रिटायर्ड अमेरिकी नौसेना खुफिया अधिकारी और एयरोस्पेस मामलों के विशेषज्ञ जे. माइकल डाहम ने इस संबंध में मीडिया से बातचीत में कहा है कि इस बड़े विस्तार की शुरुआत लगभग अगस्त 2025 में हुई। यही वह समय था जब चीन के कथित छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान J-36 को पहली बार इस इलाके में देखा गया। इसके महज 17 दिन बाद एक अन्य अगली पीढ़ी के विमान जिसे J-XDS या J-50 कहा जा रहा है, उसके भी इसी परिसर में देखे जाने की जानकारी सामने आई।

यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि इसका मतलब है कि चीन संभवतः एक साथ कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। अगर ऐसा है तो लोप नूर का विस्तार चीन को एक ही समय में कई संवेदनशील विमानों के उड़ान परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और विकास का अवसर देगा। दूसरे शब्दों में कहें तो बीजिंग अब अपनी अगली पीढ़ी की एयर-पावर परियोजनाओं को क्रमवार नहीं, बल्कि समानांतर गति से आगे बढ़ाने की क्षमता तैयार कर रहा है।

फरवरी तक इस परिसर में लगभग 60,000 वर्ग फुट अतिरिक्त हैंगर स्पेस और 3 लाख वर्ग फुट से अधिक अन्य बुनियादी ढांचा जुड़ चुका था। रिपोर्टों के अनुसार, नई सुविधाओं में परीक्षण और मूल्यांकन क्षेत्र के साथ-साथ कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था भी शामिल हो सकती है। कुल मिलाकर इस विस्तार ने बेस के आकार और संचालन क्षमता को लगभग दोगुना कर दिया है।

लोप नूर की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। विशाल, वीरान और कम आबादी वाले शिनजियांग क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां अत्यंत गोपनीय उड़ान परीक्षणों को आम निगरानी और आबादी की नजरों से दूर किया जा सकता है। यह चीन को संवेदनशील प्रोटोटाइप विमानों के परीक्षण के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच देता है। पहले से मौजूद 5 किलोमीटर लंबा रनवे इस सुविधा की महत्वाकांक्षा को और स्पष्ट करता है। यह परिसर कम से कम 2020 से चीन के पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष यान कार्यक्रम से भी जुड़ा रहा है।

अमेरिका-चीन की छठी पीढ़ी की जंग


लोप नूर का विस्तार ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका और चीन अगली पीढ़ी की वायु शक्ति की दौड़ में आमने-सामने हैं। भविष्य के लड़ाकू विमान सिर्फ तेज या स्टील्थ नहीं होंगे। वे उन्नत ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिस्टम, अत्याधुनिक सेंसर और लंबी दूरी के हथियारों के साथ नेटवर्क में काम करेंगे।

हम आपको यह भी बता दें कि चीन ने अभी तक J-36 और J-XDS/J-50 की आधिकारिक भूमिका, तकनीकी विशेषताओं या औपचारिक नामों की पुष्टि नहीं की है। लेकिन अमेरिकी पेंटागन की रिपोर्ट इन्हें अभी विकास के शुरुआती चरण में मानती है और अनुमान लगाती है कि ये विमान 2035 तक ऑपरेशनल हो सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर चीन ने परीक्षण ढांचा अभी से इतना विशाल बनाना शुरू कर दिया है, तो क्या बीजिंग विकास की रफ्तार को तेज करने की तैयारी कर रहा है?

यही वह रणनीतिक निहितार्थ है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विमान बनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे तेजी से परीक्षण कर युद्ध के लिए तैयार करना उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। विशाल हैंगरों और अलग-अलग परीक्षण क्षेत्रों के जरिए चीन कई कार्यक्रमों को एक साथ संचालित कर सकता है। इससे मौजूदा परीक्षण केंद्रों पर दबाव घटेगा और नए विमानों के विकास की गति बढ़ सकती है।

क्या H-20 स्टील्थ बॉम्बर भी है तस्वीर में?


इसके अलावा, लोप नूर के विस्तार ने चीन के रहस्यमय H-20 स्टील्थ स्ट्रैटेजिक बॉम्बर को लेकर भी अटकलों को हवा दे दी है। H-20 को लंबे समय से चीन का संभावित लंबी दूरी का स्टील्थ बॉम्बर माना जाता रहा है, लेकिन इसे अब तक सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया है और न ही इसके आधिकारिक विवरण की पुष्टि हुई है। हालांकि नई संरचनाओं का आकार सवाल जरूर खड़े करता है। दक्षिणी एप्रन पर बने तीन हैंगरों का आकार लगभग 80 गुणा 40 मीटर बताया गया है। ये इतने बड़े हैं कि चीन के मौजूदा बेड़े के बड़े विमानों, यहां तक कि लगभग 33 मीटर विंगस्पैन वाले H-6 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर को भी समायोजित कर सकते हैं।

हैंगरों की चौड़ाई सामान्य लड़ाकू विमानों के शेल्टर से कहीं अधिक बताई जा रही है। इसलिए भविष्य में बड़े विंगस्पैन वाले विमानों के लिए इनके इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि H-20 और इन हैंगरों के बीच फिलहाल कोई प्रत्यक्ष और पुष्ट संबंध सामने नहीं आया है।

भारत और हिंद-प्रशांत के लिए संदेश


इस पूरे घटनाक्रम का सामरिक महत्व केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत सहित पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को चीन के इस तेजी से बढ़ते एयरोस्पेस ढांचे पर नजर रखनी होगी। शिनजियांग में विकसित हो रही परीक्षण क्षमता भविष्य के उन प्लेटफॉर्मों को जन्म दे सकती है, जो लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों, ड्रोन और अत्याधुनिक सेंसर के साथ काम करेंगे। देखा जाये तो चीन केवल विमान नहीं बना रहा, बल्कि वह भविष्य की हवाई लड़ाई की फैक्ट्री तैयार कर रहा है। शेनयांग में मौजूदा सुविधा से लगभग 16 किलोमीटर उत्तर में बनाया जा रहा नया उत्पादन परिसर भी इसी तस्वीर का हिस्सा है। अनुमान है कि वहां लगभग 40 लाख वर्ग फुट का विनिर्माण क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।

लोप नूर की कहानी इसलिए केवल चार नए हैंगरों की कहानी नहीं है। यह उस चीन की कहानी है, जो युद्ध की अगली पीढ़ी के लिए अपना औद्योगिक और तकनीकी ढांचा खड़ा कर रहा है। रेगिस्तान की खामोशी में बन रहा यह विशाल अड्डा आने वाले वर्षों में आसमान की शक्ति-संतुलन की दिशा बदल सकता है।

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  Sports

Shafali Verma को आउट कर इशारेबाजी Pakistan कप्तान को पड़ी भारी, ICC का बड़ा एक्शन

7 सितंबर को दुबई में खेले गए विमेंस एशिया कप 2026 में भारत के खिलाफ ग्रुप A मैच के दौरान ICC आचार संहिता के लेवल 1 का उल्लंघन करने पर पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम की कप्तान फातिमा सना पर उनकी मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने पुष्टि की कि फातिमा ने खिलाड़ियों और खिलाड़ी सहायता कर्मियों के लिए ICC आचार संहिता के आर्टिकल 2.5 का उल्लंघन किया है। 
 

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इस नियम के अनुसार, "अंतर्राष्ट्रीय मैच के दौरान किसी बल्लेबाज के आउट होने पर ऐसी भाषा, हरकत या इशारों का इस्तेमाल करना जो अपमानजनक हों या जिनसे बल्लेबाज की ओर से आक्रामक प्रतिक्रिया भड़क सकती हो," आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है। इस गलती के लिए फ़ातिमा को एक डिमेरिट पॉइंट मिला। 24 महीनों में यह उनकी दूसरी गलती थी, जिससे उनके कुल डिमेरिट पॉइंट दो हो गए। उनका पिछला डिमेरिट पॉइंट 6 अगस्त, 2025 को डबलिन में आयरलैंड के खिलाफ़ T20I सीरीज़ के पहले मैच के दौरान मिला था।

यह घटना भारत की पारी के दूसरे ओवर में हुई, जब ओपनर शैफ़ाली वर्मा को आउट करने के बाद फ़ातिमा ने पवेलियन की ओर इशारा किया। फ़ातिमा ने अपनी गलती मान ली और एमिरेट्स ICC इंटरनेशनल पैनल ऑफ़ मैच रेफ़री की सुप्रिया रानी दास द्वारा बताई गई सज़ा को स्वीकार कर लिया, जिससे उन्हें औपचारिक सुनवाई से नहीं गुज़रना पड़ा। यह आरोप ऑन-फ़ील्ड अंपायर निमाली परेरा और शथिरा ज़ाकिर जेसी, थर्ड अंपायर रोकेया सुल्ताना और फ़ोर्थ अंपायर रबाब अहसान ने लगाया था।
 

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लेवल 1 के उल्लंघन के लिए आधिकारिक तौर पर फटकार लगाने से लेकर खिलाड़ी की मैच फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना और एक या दो डिमेरिट पॉइंट देने तक की सज़ा हो सकती है। जब कोई खिलाड़ी 24 महीनों के अंदर चार या उससे ज़्यादा डिमेरिट पॉइंट जमा कर लेता है, तो उन्हें सस्पेंशन पॉइंट में बदल दिया जाता है। दो सस्पेंशन पॉइंट मिलने पर खिलाड़ी पर एक टेस्ट मैच या दो वनडे इंटरनेशनल या दो टी20 इंटरनेशनल मैचों का बैन लग जाता है - इनमें से जो भी पहले हो। डिमेरिट पॉइंट मिलने की तारीख से 24 महीनों तक खिलाड़ी के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में बने रहते हैं, जिसके बाद उन्हें हटा दिया जाता है।
 
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Mon, 07 Sep 2026 17:08:00 +0530

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