Jitan Ram Manjhi: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को डेंगू, दिल्ली AIIMS में भर्ती; ICU में चल रहा इलाज
Jitan Ram Manjhi Health Update: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली AIIMS में भर्ती कराया गया है। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है। उन्हें बुखार और सांस लेने में परेशानी की शिकायत थी। रविवार शाम अस्पताल लाए जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ICU में शिफ्ट कर दिया, जहां चिकित्सकों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के AIIMS में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। जांच के बाद डेंगू की पुष्टि हुई, जिसके बाद चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मांझी को बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी की शिकायत भी थी। रविवार शाम करीब 5 बजे उन्हें AIIMS के इमरजेंसी विभाग में लाया गया। इसके बाद रात करीब 9 बजे उन्हें ICU में स्थानांतरित किया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रही है।
AIIMS में डॉक्टरों की निगरानी में इलाज
अस्पताल में मांझी का इलाज चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। फिलहाल उनकी स्थिति को लेकर किसी गंभीर जटिलता की जानकारी सामने नहीं आई है। डॉक्टर उनकी स्थिति और स्वास्थ्य से जुड़े जरूरी पैरामीटर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। डेंगू की पुष्टि होने के बाद उनके इलाज के साथ-साथ उनकी सांस संबंधी शिकायतों पर भी चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।
पहले पटना में भी बिगड़ी थी तबीयत
जीतन राम मांझी की तबीयत इससे पहले पटना में भी खराब हुई थी। तेज बुखार के बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, जिसके बाद वह दिल्ली रवाना हुए। हालांकि, दिल्ली पहुंचने के बाद दोबारा स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर उन्हें AIIMS में भर्ती कराया गया।
कौन हैं जीतन राम मांझी?
जीतन राम मांझी बिहार के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में शामिल हैं। वह हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक हैं और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
उनके AIIMS में भर्ती होने की खबर के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में उनके स्वास्थ्य को लेकर लोगों की नजर बनी हुई है। फिलहाल चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।
Bhaum Pradosh Vrat 2026: सितंबर में इस दिन रखा जाएगा भौम प्रदोष व्रत, जानें पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व
Bhaum Pradosh Vrat 2026: सितंबर 2026 में भाद्रपद मास का पहला भौम प्रदोष व्रत 8 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार और त्रयोदशी तिथि के संयोग के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भौम प्रदोष व्रत मंगल ग्रह से जुड़े दोष, कर्ज और जीवन की परेशानियों से राहत के लिए किया जाता है।
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
सितंबर 2026 में भाद्रपद मास का पहला भौम प्रदोष व्रत 8 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करने और व्रत रखने से विशेष पुण्य फल मिलने की मान्यता है।
भौम प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार सितंबर में पड़ने वाले भौम प्रदोष व्रत के लिए त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल इस प्रकार रहेगा-
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 8 सितंबर 2026, दोपहर 2:42 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 9 सितंबर 2026, दोपहर 12:30 बजे
प्रदोष काल पूजा: 8 सितंबर, शाम 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक
प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के आसपास का समय भगवान शिव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पूजा के लिए बताए गए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है।
मंगल दोष से जोड़कर क्यों देखा जाता है भौम प्रदोष?
ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। इसी वजह से मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से कुंडली में मंगल से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिलती है। हालांकि, यह ज्योतिषीय और धार्मिक विश्वास हैं, इनका वैज्ञानिक आधार प्रमाणित नहीं है।
कर्ज और आर्थिक परेशानी से जुड़ी है ये मान्यता
भौम प्रदोष व्रत को कर्ज और आर्थिक परेशानियों से राहत पाने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को आर्थिक संकट से उबरने की शक्ति और सकारात्मकता मिलती है। इसके अलावा स्वास्थ्य, मानसिक शांति और दीर्घायु के लिए भी इस व्रत को शुभ माना जाता है।
भौम प्रदोष पर ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
भौम प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग की पूजा करें।
पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद बेलपत्र, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें। भगवान शिव को अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित की जा सकती है। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करना भी शुभ माना जाता है।
शिव के साथ हनुमान जी की पूजा
चूंकि भौम प्रदोष मंगलवार को पड़ता है, इसलिए इस दिन हनुमान जी की पूजा को भी विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन-पूजन कर सकते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार शिव आराधना के साथ हनुमान जी की भक्ति करने से साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। हालांकि, पूजा-पद्धति और मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं।
ध्यान रखें
भौम प्रदोष व्रत से मंगल दोष, कर्ज या किसी विशेष परेशानी के निश्चित रूप से दूर होने की बात को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए। पूजा-पाठ आस्था का विषय है। आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए व्यावहारिक और विशेषज्ञ सलाह को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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