शोएब अख्तर बोले- मौजूदा टीम से कोई उम्मीद नहीं:2 साल में संभलेगा सेटअप, क्रिकेट वेंटिलेटर पर; मिस्बाह ने भी सिस्टम पर सवाल उठाए
इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने टीम में बदलाव शुरू कर दिए हैं। इंग्लैंड तीन टेस्ट की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त ले चुका है और तीसरा मुकाबला बाकी है। इसी बीच पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने कहा है कि PCB को मौजूदा टीम से कोई उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, बोर्ड युवा खिलाड़ियों की नई टीम तैयार करने पर ध्यान दे रहा है। वहीं पूर्व टेस्ट कप्तान मिस्बाह-उल-हक ने स्थानीय और विदेशी कोचों के साथ अलग-अलग व्यवहार किए जाने पर सवाल उठाए हैं। मिस्बाह ने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट में विदेशी कोचों को ज्यादा अधिकार और ताकत दी जाती है, जबकि स्थानीय कोचों को ज्यादा आलोचना और निगरानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को बार-बार जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय लंबे समय की योजना पर काम करना चाहिए। इंग्लैंड ने दोनों टेस्ट बड़े अंतर से जीते इंग्लैंड ने हेडिंग्ले में पहला टेस्ट पारी और 103 रन से जीता था। इसके बाद लॉर्ड्स में पाकिस्तान को 194 रन से हराया। इन दोनों हार के बाद PCB ने कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों के स्तर पर बदलाव किए। सरफराज अहमद और उमर गुल को कोचिंग सेटअप से हटा दिया गया है। माइक हेसन ने टीम की जिम्मेदारी संभाल ली है, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज एश्ले नॉफ्के उनके सहायक के तौर पर जुड़े हैं। तीसरे और आखिरी टेस्ट के लिए पाकिस्तान के स्क्वॉड से 7 खिलाड़ियों को बाहर किया गया है। इनमें मोहम्मद रिजवान, इमाम-उल-हक और सलमान अली आगा जैसे सीनियर खिलाड़ी शामिल हैं। शोएब बोले- PCB अब नई टीम तैयार कर रहा शोएब अख्तर ने ‘OutSide EDGE’ शो में कहा कि PCB सिर्फ इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। उनके मुताबिक, बोर्ड इस दौरे को टीम के बड़े पुनर्निर्माण की शुरुआत के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। अख्तर ने कहा, “PCB इन खिलाड़ियों से बहुत निराश था और उसे पाकिस्तान की इस टीम से कोई उम्मीद नहीं है। प्लान इस टीम को हटाकर युवा और नए खिलाड़ियों को लाने का है। ऐसे खिलाड़ी जो सिर्फ पाकिस्तान के लिए खेलना चाहते हैं। वे अब भविष्य पर ध्यान दे रहे हैं और सही तरीके से काम कर रहे हैं।” उन्होंने हालांकि शाहीन शाह अफरीदी, नसीम शाह और हारिस रऊफ जैसे तेज गेंदबाजों के करियर को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। अख्तर के मुताबिक, इन खिलाड़ियों के करियर में अभी काफी क्रिकेट बाकी है। PCB अधिकारी ने कहा- ‘कुछ नहीं’ की उम्मीद अख्तर ने PCB के एक अधिकारी से हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, उन्होंने अधिकारी से पूछा था कि इंग्लैंड दौरे पर मौजूदा टीम से बोर्ड को क्या उम्मीद है। अख्तर ने अधिकारी के हवाले से कहा, “कुछ नहीं। हमारी उम्मीदें उन खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी से हैं, जिन्हें हम बड़े मंच के लिए तैयार कर रहे हैं।” अख्तर ने दावा किया कि इसी अधिकारी ने पाकिस्तान क्रिकेट की स्थिति को ‘वेंटिलेटर पर’ बताया था। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय क्रिकेट सेटअप को दोबारा मजबूत करने में करीब दो साल लग सकते हैं। मिस्बाह बोले- विदेशी और स्थानीय कोचों के साथ अलग व्यवहार हाल ही में राष्ट्रीय चयनकर्ता पद से हटे पूर्व टेस्ट कप्तान मिस्बाह-उल-हक ने भी पाकिस्तान क्रिकेट सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय और विदेशी कोचों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जाता। मिस्बाह ने एक टीवी शो पर कहा, “यह तथ्य है कि पाकिस्तान क्रिकेट में स्थानीय और विदेशी कोचों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है। स्थानीय कोचों को विदेशी कोचों की तुलना में ज्यादा जांच और आलोचना का सामना करना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि उन्हें विदेशी कोच रखने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन विदेशी कोचों के प्रति PCB, मीडिया, आलोचकों और प्रशंसकों का रवैया ज्यादा नरम रहता है। मिस्बाह के मुताबिक, विदेशी कोचों को ज्यादा अधिकार और ताकत दी जाती है। टीम के खराब प्रदर्शन पर भी उन्हें स्थानीय कोचों की तुलना में कम जिम्मेदार ठहराया जाता है। ‘खराब प्रदर्शन के बाद खिलाड़ियों को मानसिक रूप से कमजोर करते हैं’ मिस्बाह ने खिलाड़ियों के खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें लगातार निशाना बनाने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी खराब प्रदर्शन के बाद खिलाड़ी को बार-बार आलोचना का सामना करना पड़ता है, जिससे उसके लिए फॉर्म और आत्मविश्वास हासिल करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट की मुख्य समस्या के तौर पर निरंतरता, धैर्य और लंबे समय की योजना की जरूरत बताई। मिस्बाह ने कहा कि दबाव में आकर बार-बार तुरंत फैसले लेने के बजाय प्रदर्शन और परिस्थितियों का विश्लेषण करके आगे की रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें दबाव में आकर कॉस्मेटिक सर्जरी नहीं करनी चाहिए। हमें प्रदर्शन और स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए और फिर तय करना चाहिए कि आगे कैसे बढ़ना है।” मिस्बाह बोले- पाकिस्तान में फैसले अक्सर प्रतिक्रिया में लिए जाते हैं मिस्बाह के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट में अक्सर फैसले समस्या सामने आने के बाद प्रतिक्रिया के तौर पर लिए जाते हैं। उनका मानना है कि सिस्टम को लंबे समय की योजना के साथ चलाने की जरूरत है। उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट आगे इसलिए बढ़ा क्योंकि वहां घबराकर फैसले लेने के बजाय योजनाओं पर काम किया गया। उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट सिस्टम ने खिलाड़ियों को समय देकर तैयार किया। मिस्बाह के मुताबिक, भारत ने 1990 के दशक के बाद अपने क्रिकेट सिस्टम में धीरे-धीरे निवेश किया और उसका असर अब दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सिस्टम को बदलने का कोई ‘क्विक फिक्स’ नहीं होता। ‘हमारे युवा ज्यादा व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेल रहे’ मिस्बाह ने पाकिस्तान के युवा खिलाड़ियों की तैयारी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवा क्रिकेटर्स ज्यादा व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेल रहे हैं और रेड-बॉल क्रिकेट में उनका अनुभव सीमित है। उनके मुताबिक, चार दिवसीय क्रिकेट पर्याप्त नहीं खेलने से खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट के दबाव का अनुभव कम मिलता है। इससे बड़े मंच पर दबाव झेलना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाड़ियों को भी सिस्टम तैयार करने में समय लगा था। पाकिस्तान को भी धैर्य के साथ घरेलू और रेड-बॉल क्रिकेट को मजबूत करना होगा। तीसरे टेस्ट में क्लीन स्वीप से बचने की चुनौती पाकिस्तान अब एजबेस्टन में तीसरा टेस्ट खेलेगा। टीम के सामने सीरीज में 3-0 की हार से बचने की चुनौती है। हालांकि, इस दौरे के दौरान लिए गए फैसले और पूर्व खिलाड़ियों की टिप्पणियां बताती हैं कि पाकिस्तान क्रिकेट के सामने चुनौती सिर्फ इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज का नतीजा नहीं है। PCB को अब टीम चयन, कोचिंग, युवा खिलाड़ियों की तैयारी और पूरे क्रिकेट सिस्टम को लेकर लंबे समय की रणनीति बनाने की जरूरत है।
खराब फॉर्म के बावजूद लाबुशेन पर भरोसा कायम:साउथ अफ्रीका दौरे के लिए 16 सदस्यीय ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम घोषित; कुहनेमन और कोनोली को मौका
मार्नस लाबुशेन को खराब फॉर्म के बावजूद साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया की 16 सदस्यीय टीम में बरकरार रखा गया है। बांग्लादेश के खिलाफ पिछली टेस्ट सीरीज में 1, 31 और 4 रन बनाने वाले लाबुशेन को लेकर चयन पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन सेलेक्टर्स ने नंबर-3 बल्लेबाज पर अपना भरोसा कायम रखा। वहीं मैथ्यू कुहनेमन, कूपर कोनोली और माइकल नेसर को टीम में शामिल किया गया है। सीरीज का पहला टेस्ट 9 अक्टूबर से डरबन में खेला जाएगा। दूसरा टेस्ट 18 अक्टूबर से जीक्वेबरहा और तीसरा 27 अक्टूबर से केप टाउन में होगा। 2023 के बाद टेस्ट में शतक नहीं लगा सके लाबुशेन लाबुशेन ने अपना पिछला टेस्ट शतक 2023 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में लगाया था। इसके बाद से वे 43 पारियों में 24.69 की औसत से रन बना पाए हैं। बांग्लादेश के खिलाफ हालिया सीरीज में भी उनका प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा। खराब फॉर्म के कारण उन्हें जिम्बाब्वे और साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज की टीम से भी बाहर किया गया है। हालांकि टेस्ट चयन में सेलेक्टर्स ने उनके लाल गेंद के प्रदर्शन को अलग रखते हुए उन्हें मौका दिया है। कुहनेमन को मर्फी पर तरजीह लेफ्ट आर्म स्पिनर मैथ्यू कुहनेमन को नाथन लायन के साथ दूसरे विशेषज्ञ स्पिनर के रूप में चुना गया है। उन्हें टॉड मर्फी पर प्राथमिकता मिली है। साउथ अफ्रीका की परिस्थितियों को देखते हुए दूसरे टेस्ट में लायन के साथ कुहनेमन को उतारने का विकल्प भी ऑस्ट्रेलिया के पास रहेगा। 23 साल के कूपर कोनोली को भी टीम में जगह मिली है। हालिया वनडे में बांग्लादेश के खिलाफ 149 रन की पारी के बाद उनका दावा मजबूत हुआ। सेलेक्टर्स उन्हें भविष्य की योजनाओं में शामिल खिलाड़ी के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि पीठ की समस्या के कारण उनकी गेंदबाजी पर अभी काम चल रहा है। छह वनडे के बाद तीन टेस्ट, इसलिए संतुलित टीम चीफ सेलेक्टर जॉर्ज बेली ने कहा कि छह वनडे के तुरंत बाद तीन टेस्ट की सीरीज होगी और मैचों के बीच ज्यादा अंतर नहीं है। इसलिए टीम में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए संतुलन और विकल्पों को ध्यान में रखा गया है। पेस अटैक में पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड के साथ स्कॉट बोलैंड और माइकल नेसर विकल्प होंगे। नेसर के लिए यह दौरा खास है, क्योंकि उनका जन्म साउथ अफ्रीका में हुआ है। 2018 के 'सैंडपेपरगेट' के बाद पहली बार टेस्ट दौरा यह 2018 के बॉल-टैंपरिंग विवाद के बाद ऑस्ट्रेलिया का पहला टेस्ट दौरा होगा। उस दौरे के बाद मौजूदा टीम में सिर्फ पांच खिलाड़ी ऐसे हैं जो साउथ अफ्रीका में ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट खेल चुके हैं—पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, मिचेल स्टार्क, स्टीव स्मिथ और मैट रेनशॉ। रेनशॉ ने 2018 में सीरीज का केवल आखिरी टेस्ट खेला था। साउथ अफ्रीका दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम पैट कमिंस (कप्तान), स्कॉट बोलैंड, एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), कूपर कोनोली, कैमरन ग्रीन, जोश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, जोश इंगलिस, मैथ्यू कुहनेमन, मार्नस लाबुशेन, नाथन लायन, माइकल नेसर, मैट रेनशॉ, स्टीव स्मिथ, मिचेल स्टार्क और ब्यू वेबस्टर।
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