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Supreme Court: लॉ स्टूडेंट्स पर बार काउंसिल नहीं कर सकता अनुशासनात्मक कार्रवाई, NALSAR विवाद में कोर्ट की अहम टिप्पणी

NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बार काउंसिल की शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BCI या किसी State Bar Council का वैधानिक अनुशासनात्मक अधिकार लॉ स्टूडेंट्स पर लागू नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल का अनुशासनात्मक अधिकार उस समय लागू होता है, जब कोई व्यक्ति एडवोकेट के रूप में एनरोल हो जाता है। लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार उनके संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान के पास रहता है।

यूनिवर्सिटी अपने नियमों के तहत ले सकती है कार्रवाई
तीन जजों की बेंच ने कहा कि लॉ स्टूडेंट्स के आचरण से जुड़े मामलों को संबंधित यूनिवर्सिटी या शिक्षण संस्थान अपने नियमों और विनियमों के तहत देख सकते हैं।

इसका मतलब यह है कि किसी छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जरूरत होने पर पहले संबंधित शैक्षणिक संस्थान के नियम लागू होंगे। बार काउंसिल का नियामक और अनुशासनात्मक अधिकार मुख्य रूप से अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण से जुड़ा है।

CJI सूर्यकांत की बेंच ने की टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब Bar Council of India के NALSAR Law University से जुड़े एक आदेश को लेकर विवाद सामने आया था। BCI की ओर से जारी आदेश को बाद में वापस ले लिया गया था।

क्या है NALSAR विवाद?
NALSAR यानी National Academy of Legal Studies and Research देश के प्रमुख कानून विश्वविद्यालयों में शामिल है। इससे जुड़े मामले में BCI की कार्रवाई और उसके बाद आदेश वापस लिए जाने के घटनाक्रम ने लॉ एजुकेशन और बार काउंसिल की शक्तियों को लेकर सवाल खड़े किए।

सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी में इसी व्यापक मुद्दे के संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया कि लॉ कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्रों पर अनुशासनात्मक अधिकार और बार काउंसिल में एनरोल हो चुके अधिवक्ताओं पर नियामक अधिकार अलग-अलग हैं।

छात्रों और अधिवक्ताओं के मामले में फर्क
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का अहम पहलू यह है कि लॉ स्टूडेंट और एनरोल्ड एडवोकेट की कानूनी स्थिति अलग है। छात्र के तौर पर व्यक्ति संबंधित शिक्षण संस्थान के नियमों के अधीन रहता है, जबकि एडवोकेट के रूप में एनरोल होने के बाद बार काउंसिल के पेशेवर अनुशासन संबंधी नियम लागू होते हैं।

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ED Raids On NHAI Toll Plazas: एनएचएआई टोल प्लाजा फर्जीवाड़े में ईडी की बड़ी कार्रवाई; 7 राज्यों के 14 ठिकानों पर छापेमारी

सरकारी राजस्व को भारी चपत लगाने और नेशनल हाईवे पर अनधिकृत फर्जी सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोल टैक्स वसूलने के गिरोह के खिलाफ ईडी ने शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत शुरू की गई इस जांच के सिलसिले में लखनऊ जोनल ऑफिस की अगुवाई में टीमों ने एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

जांच के दौरान 1.03 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और फर्जी सॉफ्टवेयर के फॉरेंसिक साक्ष्य बरामद किए गए हैं।

​समानांतर सॉफ्टवेयर और फर्जी FASTag का खेल

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी टोल ऑपरेटरों और आईटी कर्मियों की मिलीभगत से NHAI के आधिकारिक सिस्टम के समानांतर एक फर्जी सॉफ्टवेयर ऐप चलाया जा रहा था। इसके जरिए गाड़ियों और ओवरलोडेड कमर्शियल वाहनों से टोल वसूला जाता था, लेकिन रसीद फर्जी सॉफ्टवेयर से काटी जाती थी।

नतीजतन, वसूले गए कुल टोल टैक्स का महज 5 प्रतिशत हिस्सा ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होता था और बाकी 95 प्रतिशत राशि को निजी व बेनामी बैंक खातों में डायवर्ट कर दिया जाता था।

​यूपी एसटीएफ की एफआईआर के बाद सक्रिय हुई ईडी

यह पूरा मामला यूपी एसटीएफ (UP STF) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद सामने आया था। एनएचएआई के आंतरिक रिकॉर्ड्स और तकनीकी फॉरेंसिक जांच में भी इस समानांतर और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई थी।

इसके आधार पर ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की और मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने के लिए राज्यों के नेटवर्क को खंगालना शुरू किया।

​मनी ट्रेल और मुख्य लाभार्थियों की तलाश जारी

छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारियों ने सर्वर डेटा, बैंक खातों की जानकारी, फर्जी फास्टैग रसीदें और बेनामी संपत्तियों के कागजात जब्त किए हैं। ईडी अब इस घोटाले की मनी ट्रेल को ट्रैक कर रही है ताकि टोल संचालकों, भ्रष्ट अधिकारियों, बिचौलियों और आईटी विशेषज्ञों के बीच बांटी गई अवैध रकम के अंतिम लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।

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  Sports

No. 3 पर बल्लेबाजी की चुनौती? Devdutt Padikkal बोले - सिर्फ Team India के योगदान पर फोकस

भारत के बल्लेबाज़ देवदत्त पडिक्कल ने टेस्ट टीम में अपनी वापसी के बारे में बात करते हुए कहा कि जब उन्हें मौका मिलेगा, तब वे तैयार रहने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे। साथ ही, श्रीलंका के खिलाफ़ सीरीज़ में शामिल किए जाने की खबर सुनकर वे काफी उत्साहित थे। श्रीलंका के खिलाफ़ दो मैचों की टेस्ट सीरीज़, जिसे भारत ने 1-0 से जीता, में पडिक्कल ने नंबर 3 के बल्लेबाज़ साई सुदर्शन की जगह ली, जो चोट के कारण टीम से बाहर थे।
 

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कर्नाटक के साथ शानदार घरेलू सीज़न और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की लगातार IPL खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने के बाद, पडिक्कल ने अपनी शानदार फ़ॉर्म को इंटरनेशनल क्रिकेट में भी जारी रखा। उन्होंने तीन पारियों में 109 से ज़्यादा की औसत से 328 रन बनाकर 'प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़' का ख़िताब जीता। उन्होंने दो शतक भी लगाए, जिसमें उनका बेस्ट स्कोर 167 रन रहा। JioStar से बात करते हुए पडिक्कल ने कहा कि टेस्ट में खेलने का मौका आसानी से नहीं मिलता; इसके लिए लगातार कड़ी मेहनत और तैयारी की ज़रूरत होती है।

पडिक्कल ने कहा कि ज़ाहिर है, मुझे इसका बेसब्री से इंतज़ार था। ऐसे मौके आसानी से नहीं मिलते। खुद को बेहतर बनाते रहने और उस मौके का इंतज़ार करने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मुझे यह पक्का करना था कि जब भी मुझे मौका मिले, मैं उसके लिए तैयार रहूँ। उन्होंने आगे कहा कि सीरीज़ की शुरुआत में ही जब मुझे बताया गया कि मैं खेलने वाला हूँ, तो मैं बहुत उत्साहित था। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगा कि जिस तरह से मैं बैटिंग कर रहा था, उससे मैं अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में था, इसलिए मैं इसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।
 

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पडिक्कल ने भारत के लिए नंबर 3 पर बैटिंग करने के बारे में भी बात की, यह एक ऐसी जगह है जहाँ पहले राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे टेस्ट के महान खिलाड़ी खेलते थे। इस बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने कहा कि उनका ध्यान पुराने खिलाड़ियों से तुलना करने के बजाय टीम में योगदान देने पर है। पडिक्कल ने कहा कि आखिरकार, बात मैदान पर जाकर बैटिंग करने की है। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि मैं किस नंबर पर बैटिंग कर रहा हूँ; मैं टीम के लिए योगदान देने की कोशिश कर रहा हूँ।
 
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Mon, 07 Sep 2026 17:32:00 +0530

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